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सपा से कुछ इस तरह दूर हो रहे शिवपाल यादव, ले सकते हैं बड़ा फैसला!

सपा से कुछ इस तरह दूर हो रहे शिवपाल यादव, ले सकते हैं बड़ा फैसला!

फाइल फोटो- शिवपाल सिंह यादव

फाइल फोटो- शिवपाल सिंह यादव

हाल ही में जब मुलायम सिंह यादव ने बयान दिया कि उनका कोई सम्मान नहीं होता तो शिवपाल का बयान आया कि वह भी डेढ़ साल से पार्टी में सम्मानित पद का इंतजार कर रहे हैं.

अखिलेश यादव के समाजवादी पार्टी पर एकाधिकार के बाद से ही हाशिए पर चल रहे शिवपाल सिंह यादव अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर गंभीर होते दिख रहे हैं. उनसे जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले एक से डेढ़ साल के दौरान शिवपाल के साथ पार्टी में जिस तरह का सलूक हुआ, उससे वह अब कोई भी निर्णय लेते हैं तो वह स्वाभाविक ही माना जाएगा.

उधर इस बात को खुद शिवपाल सिंह यादव का बयान तस्दीक करता दिखता है. हाल ही में जब मुलायम सिंह यादव ने बयान दिया कि उनका कोई सम्मान नहीं होता तो शिवपाल का बयान आया कि वह भी डेढ़ साल से पार्टी में सम्मानित पद का इंतजार कर रहे हैं.

जानिए कब-कब मुलायम सिंह यादव ने दिखाया अखिलेश यादव को 'आईना'

दरअसल समाजवादी कुनबे की आपसी लड़ाई में शिवपाल सिंह यादव एक धड़े की अगुवाई करते हैं. यूपी विधानसभा चुनाव 2017 के पहले परिवार में झगड़ा सार्वजनिक मंचों पर दिखाई देने लगा. इस दौरान अखिलेश और रामगोपाल यादव एक तरफ हो गए, वहीं दूसरी तरफ शिवपाल सिंह यादव रहे. इस दौरान मुलायम सिंह यादव तटस्थ की भूमिका में दिखाई दिए. आखिरकार अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह यादव को अध्यक्ष पद से पार्टी का संरक्षक बना दिया और खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष हो गए.

शिवपाल सिंह यादव अखिलेश के इस कदम का विरोध करते रहे, लेकिन पार्टी में उनकी किसी ने नहीं सुनी. आखिरकार पूरी पार्टी अखिलेश के कब्जे में आ गई और शिवपाल तब से अभी तक एक विधायक की भूमिका में ही हैं. कभी पार्टी के सर्वेसर्वा की भूमिका में रहने वाले शिवपाल सिंह यादव के पास आज कोई पद भी नहीं है.

लोहिया ट्रस्ट पर शिवपाल की पकड़ अब भी मजबूत
तस्वीर का दूसरा पहलू ये है कि पार्टी में भले ही शिवपाल का रसूख कम हो गया हो, लेकिन संगठन में उनकी पकड़ आज भी मानी जाती है. समाजवादी पार्टी के अहम अंग लोहिया ट्रस्ट पर शिवपाल की अभी भी पकड़ मजबूत है. यहां राम गोपाल यादव को बाहर कर दिया गया है, ​सिर्फ अखिलेश ही बचे हैं. इस ट्रस्ट के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव हैं और शिवपाल सिंह यादव सचिव हैं. अपनी पूरी राजनीति अब शिवपाल सिंह यादव इसी ट्रस्ट के दफ्तर से चला रहे हैं.

उधर पार्टी में हाशिए पर ढकेले जाने का दर्द शिवपाल के मुंह से रक्षाबंधन के मौके पर छलका. उन्‍होंने कहा​ कि वह पिछले डेढ़ साल से पार्टी में सम्मानित पद का इं​तजार कर रहे हैं. उनका बयान ऐसे मौके पर आया, जब खुद मुलायम सिंह यादव ने सार्वजनिक मंच पर खुद को सम्मान नहीं मिलने की बात कह रहे हैं. मुलायम ने यहां तक कहा कि मरने के बाद शायद उन्हें सम्मान मिले. इस बयान को सीधे अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की बदली व्यवस्था से जोड़कर देखा गया. दिलचस्प ये है कि इस बयान के बाद मुलायम और शिवपाल की लोहिया ट्रस्ट में अहम मुलाकात हुई. इस मुलाकात के अब कई मायने निकाले जा रहे हैं.

मुलायम के बाद शिवपाल का छलका दर्द, कहा- पार्टी में सम्मानित पद का कर रहा हूं इंतजार

बहरहाल शिवपाल के मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार विजय शर्मा कहते हैं कि शिवपाल सिंह यादव का बयान उस कदम की कड़ी का हिस्सा है, जिसमें वह समाजवादी पार्टी से दूर हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि ये करीब-करीब तय है कि शिवपाल अब नया कदम उठाने की तैयारी में हैं. वह नई पार्टी बनाएंगे या किसी पार्टी को ज्वाइन करेंगे, यह वक्त बताएगा. लेकिन समाजवादी पार्टी से अलग होने पर अखिलेश यादव या कोई और उन पर कोई आरोप नहीं लगा सके. इसलिए वह लगातार ये एहसास करा रहे हैं कि वह ​समाजवादी पार्टी की बेहतरी के लिए हमेशा सोचते रहे, लेकिन पार्टी ने ही उन्हें हाशिए पर डाल दिया.

विजय शर्मा कहते हैं कि मुलायम के बाद समाजवादी पार्टी में शिवपाल सिंह यादव की पहचान रही. राजनीतिक अनुभव की बात करें तो दोनों इसके बड़े खिलाड़ी हैं, वहीं अखिलेश के लगातार कुछ निर्णयों और बयानों पर गौर करें तो वह इनके आगे नहीं टिकते. खुद मायावती अखिलेश की अनुभवहीनता पर सवाल उठा चुकी हैं. शिवपाल धीरे-धीरे अब इसी अनुभवहीनता का लाभ लेने की कोशिश में हैं.

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Tags: Akhilesh yadav, Mulayam Singh Yadav, News 18 Hindi Special, Samajwadi party, Shivpal singh yadav, Uttarpradesh news, लखनऊ

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