UP विधानसभा चुनाव 2022: राजनीतिक पार्टियों के लिए सोशल मीडिया ही बनेगा सहारा!
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UP विधानसभा चुनाव 2022: राजनीतिक पार्टियों के लिए सोशल मीडिया ही बनेगा सहारा!
राजनीतिक पार्टियों के लिए सोशल मीडिया ही बनेगा सहारा! (file photo)

बीजेपी नेता (BJP Politicians) तकनीक का इस्तेमाल तो काफी पहले से करते आ रहे हैं, लेकिन कोरोना (Coronavirus) काल में उसे कार्यकर्ताओं के साथ जोड़ दिया गया है.

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लखनऊ. वैश्विक महामारी (Pandemic) कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण के फैलाव से बचाव के लिए पूरे देश में लॉकडाउन (Lockdown) जारी है. वहीं आने वाले समय में राजनीति भी इससे अछूती नहीं रहेगी. सभी राजनीतिक दलों की राजनीति कोरोना काल में तकनीक के माध्यम से हो रही है. आने वाला यूपी विधानसभा चुनाव भी धीरे-धीरे नजदीक आता दिख रहा है. बता दें कि राज्य की योगी सरकार अपने तीन साल पूरे कर चुकी है और चुनावी तैयारियों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है, वहीं विपक्ष भी सोशल मीडिया में सिमटता नजर आ रहा है.

कोरोना काल में कोई भी सामूहिक आयोजन नहीं होगा. लॉकडाउन की विशेष परिस्थितियों में राजनीतिक पार्टियों का सारा काम तकनीक के माध्यम से हो रहा है. जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने के काम में भी सोशल डिस्टेंस मेंटेन किया जा रहा है. लेकिन सामने मिशन 2022 का एजेंडा भी है. सत्ताधारी पार्टी भाजपा अपने संगठनात्मक काम को अंजाम देने में जुटी हुई है. उसके लिए तकनीक ही एक सहारा है. भाजपा के नेता तकनीक का इस्तेमाल तो काफी पहले से करते आ रहे हैं, लेकिन कोरोना काल में उसे कार्यकर्ताओं के साथ जोड़ दिया गया है.

एमएलसी चुनाव, पंचायत चुनाव और मिशन 2022 की तरफ बढ़ रही भाजपा धीरे-धीरे चुनावी मोड में आ रही है. महामंत्री विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि हम राजनीतिक दल हैं और कोरोना काल में भी संगठन को चुस्त दुरुस्त रखना हमारी जिम्मेदारी है और भविष्य की तैयारी करना हमारा कर्तव्य है. यही कारण है कि हम तकनीक के माध्यम से कोरोनाकाल में भी कार्यकर्ताओं के बीच हैं.



दूसरी तरफ विपक्ष भी तकनीक के सहारे सरकार पर लगातार हमला करता नजर आ रहा है. चाहे समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव हों या फिर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी या बसपा सुप्रीमो मायावती. ट्वीटर और सोशल मीडिया के दूसरे साधनों के सहारे अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं। कोरोना काल के प्रभाव को को तकनीक के सहारे अपने अपने पक्ष में हर राजनीतिक दल मोड़ने की जुगत में लगे है.



कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत कहते हैं कि तकनीक के माध्यम से उनके नेता गरीबों मजलूमों के लिए लगातार काम कर रहे हैं. कांग्रेस नफरत की राजनीति नहीं करती है, बल्कि तकनीक के माध्यम से मोहब्बत के पैगाम के साथ राजनीति करती है. योगी सरकार भी तकनीक के माध्यम से अपने कामों को जमीन तक पहुंचाने का काम कर रही है. एप्प के माध्यम से डाटा कलेक्शन से लेकर स्वास्थ्य की निगरानी भी रखी जा रही है. तकनीक का कमाल है कि विपक्ष के हमलों का जवाब सरकार को देना पड़ रहा है क्योंकि कोरोना ने  सभी पार्टियों को एक मंच पर ला दिया है और मिशन 2022 की लड़ाई तकनीक की होगी.

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