#MissionPaani भविष्य के 'जल संकट' के लिए वर्तमान में संघर्ष, जानिए कौन हैं लखनऊ के रिद्धि
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#MissionPaani भविष्य के 'जल संकट' के लिए वर्तमान में संघर्ष, जानिए कौन हैं लखनऊ के रिद्धि
जल संरक्षण और गोमती संरक्षण

बारिश के बाद सारा पानी बहकर बर्बाद हो जाता है. लेकिन क्या जिस तरह अपार्टमेंट बनने के साथ ही पार्किंग जरूरी हो जाता तो क्या अपार्टमेंट बनवाने वालों की जिम्मेदारी नहीं बनती क्या वाटर रेन 'हार्वेस्टिंग सिस्टम' को जरूरी करा दिया जाए.

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कहते है जिस शहर के बीचों बीच कोई नदी बहती है वो शहर सबसे ज्यादा खुश नसीब होता है, लेकिन शहर लखनऊ की किस्मत शायद इतनी खुशनसीब नहीं. इसके पीछे लगातार पेय जल संकट धीरे-धीरे नीचे ज्यादा भू-गर्भ का गिरता स्तर. नदियों में गिरते नाले समझ में आते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो हमारे आपके भविष्य के लिए जल के लिए संघर्ष कर रहे हैं. रिद्धि किशोर गौड़ उनमें से हैं जो हमारे आपकी आने वाली पीढ़ी को पानी मिल सके उसके लिए जद्दोजहद कर रहे है. बता दें कि श्री शुभ संस्कार समिति लखनऊ में 2005 से जल संरक्षण और गोमती संरक्षण का कार्य कर रही है.

गोमती नदी की साफ सफाई हो या उसमें गिरते गंदे नालों पर रोक की बात लगाता सूख रहे कुओं का मुद्दा हो या फिर बे तरतीब खुद रहे बोरिंग पंप हो या बोरिंग पंप होम. रिद्धि लगातार संघर्ष करते रहे है. न्यूज 18 से बातचीत में रिद्धि कहते हैं कि जितनी लापरवाही से लोग पानी को खर्च कर रहे है, वो आने वाली पीढ़ियों के लिए शुभ संकेत नहीं है. गोमती की साफ सफाई के नाम पर आरबों रूपये का बजट हर सरकारों में पास जरूर होता है, कुछ मौकों पर नेता मंत्री दीया जलाकर थोड़ी देर अफसोस जरूर करते है.

लखनऊ
गोमती संरक्षण का कार्य




लेकिन शायद गोमती के साफ साफाई का मुद्दा उनके लिए कभी राजनीतिक मुद्दा नहीं बनता, बारिश के बाद सारा पानी बहकर बर्बाद हो जाता है. लेकिन क्या जिस तरह अपार्टमेंट बनने के साथ ही पार्किंग जरूरी हो जाता तो क्या अपार्टमेंट बनवाने वालों की जिम्मेदारी नहीं बनती क्या वाटर रेन 'हार्वेस्टिंग सिस्टम' को जरूरी करा दिया जाए.
रिद्धि किशोर गौड़


गौड़ कहते हैं हर जिम्मेदारी सरकारों की नहीं होती लोगों में भी इच्छा शक्ति की बहुत कमी है. आज लोग सेलिब्रिटी से मिलने हर काम को छोड़कर पहुच जाते है, लेकिन गोमती की सफाई के लिए लोगों के पास कभी मौका नहीं होता. पूर्जा अर्चना के बाद लोग बहुत बेफ्रिक से पूजा सामग्री नदियों में डाल कर प्रदूषित कर रहे है. रिद्धि किशोर गौड़ कहते हैं कि वर्षा जल संचयन को प्रभावी रूप देने के लिए पुराने लखनऊ के कुएं सेफ्टी चेंबर के माध्यम से वर्षा जल से जोड़ दिए गए हैं. प्रतिवर्ष लाखों लीटर वर्षा जल का संचयन किया जा रहा है.

जल संकट
भविष्य के जल संकट के लिए वर्तमान में संघर्ष


उन्होंने कहा कि फेल बोरिंग खराब पड़े हैंडपंप को भी सेफ्टी चेंबर जिसमें कोयला गिट्टी और मोहर्रम पड़ती है इससे वर्षा जल छन कर पृथ्वी में जाता है. प्राचीन और बड़े शिवलिंग को भी जल संचयन से जोड़ने का प्रयास किया गया है. आठ विभिन्न चेंबर बनाकर शंकर जी के ऊपर चढ़ा जल पृथ्वी में चला जाता है.

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