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सोनभद्र कांड: सीएम योगी का बड़ा एक्शन, दोषियों से वसूले जाएंगे करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपए
Lucknow News in Hindi

Kumari Ranjana | News18 Uttar Pradesh
Updated: March 24, 2020, 4:15 PM IST
सोनभद्र कांड: सीएम योगी का बड़ा एक्शन, दोषियों से वसूले जाएंगे करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपए
बता दें यूपी के सोनभद्र नरसंहार के बाद योगी सरकार ने जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी बनाई थी.

मामले में सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने उंभा में हुए नरसंहार के बाद विवादित जमीन को लेकर उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए थे. उन जमीनों को लेकर हुई जांच में में ये पाया गया कि कांग्रेस की सरकार के वक्त कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने फर्जी तरीके से सहकारी समितियां बनाकर आदिवासियों और गरीबों की जमीनों पर कब्जा कर लिया था. उसी क्रम में ये कार्रवाई हुई है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के सोनभद्र (Sonbhadra) जिले में अवैध भूमि कब्जा प्रकरण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने सख्त कार्रवाई की है. सीएम ने सोनभद्र के उम्भा और सपही गांव में धोखाधड़ी कर जमीन कब्जा करने वाले दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय कर दी है. इन दोषियों से ब्याज सहित 1 करोड़ 9 लाख 90 हजार 26 रुपए (1,09,90,026 रुपए) की वसूली होगी. वहीं दायित्व निर्वहन में उदासीनता बरतने के कारण 21 अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी होगी.

बता दें पिछले साल 17 जुलाई को सोनभद्र में जमीन विवाद में नरसंहार (Massacre) हुआ था. तब दर्जन भर से ज्यादा अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी. डीएम और एसपी को हटा दिया गया था. नरसंहार में 10 लोग मारे गए थे. उभ्भा मामले में प्रमुख सचिव राजस्व रेणुका कुमार की जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने तत्कालीन उपजिलाधिकारी घोरावल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे. क्षेत्राधिकारी घोरावल के खिलाफ भी सरकार ने कठोर कदम उठाए और पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने के लिए उन पर गुंडा एक्ट व आपराधिक वाद दर्ज करते हुए एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे.

सरकार ने तत्कालीन एएसपी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ ही एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे. आदर्श कृषि सहकारी समिति उभ्भा के प्राथमिक 12 सदस्यों में से जीवित सदस्यों के खिलाफ ग्राम सभा की भूमि हड़पने के लिए आईपीसी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया था. सरकार ने तत्कालीन एसडीएम, प्रभारी निरीक्षक घोरावल और तत्कालीन क्षेत्राधिकारी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे. जांच में पाया गया कि आशा मिश्रा ने जमीन बिक्री कर 50,00,064 और विनीता शर्मा ने जमीन बिक्रीकर 59,89,962 का लाभ अर्जित किया है.

मामले में सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने उंभा में हुए नरसंहार के बाद विवादित जमीन को लेकर उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए थे. उन जमीनों को लेकर हुई जांच में में ये पाया गया कि कांग्रेस की सरकार के वक्त कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने फर्जी तरीके से सहकारी समितियां बनाकर आदिवासियों और गरीबों की जमीनों पर कब्जा कर लिया था. उसी क्रम में ये कार्रवाई हुई है.



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First published: March 24, 2020, 4:03 PM IST
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