केंद्रीय गृह मंत्रालय को मिली यूपी में PFI को बैन करने की योगी सरकार की सिफारिश: सूत्र

दिल्ली के मौजपुर में CAA और NRC के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन पर गृह मंत्रालय ने कड़ा बयान दिया है.
दिल्ली के मौजपुर में CAA और NRC के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन पर गृह मंत्रालय ने कड़ा बयान दिया है.

सूत्रों के अनुसार गृह मंत्रालय (MHA) पिछले कुछ महीनों में पीएफआई (PFI) से जुड़ी गतिविधियों की समीक्षा करेगा. गृह मंत्रालय इस पर लीगल ओपिनियन भी ले सकता है.

  • Share this:
लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) की तरह ही पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर प्रतिबंध लगाने को लेकर यूपी सरकार (UP Government) ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से सिफारिश की है. सूत्रों के अनुसार गृह मंत्रालय को ये सिफारिश मिल गई है और अब वो इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और इंटेलिजेंस एजेंसियों से पीएफआई को लेकर डिटेल रिपोर्ट तलब करने की तैयारी में है. सूत्रों के अनुसार गृह मंत्रालय पिछले कुछ महीनों में पीएफआई से जुड़ी गतिविधियों की समीक्षा करेगा. गृह मंत्रालय इस पर लीगल ओपिनियन भी ले सकता है.

दरअसल उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने पीएफआई को बैन करने का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा था. हाल के दिनों में नागरिकता संशोधन बिल पर हुए हिंसा के दौरान पकड़े गए पीएफआई मेंबर और उनके साथ सिमी के संबंध की जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस ने गृह मंत्रालय को दी है.

कई राज्यों तक बढ़ सकता है जांच का दायरा
सूत्रों के मुताबिक नागरिकता कानून को लेकर उत्तर प्रदेश में हिंसा हुई, जिसमें पीएफआई से जुड़े आरोपियों के यहां से आपत्तिजनक सामग्रियां, साहित्य, सीडी आदि मिले थे. जिसको आधार बनाकर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया नामक संगठन को बैन करने का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार ने भेजा है. वैसे बताया जा रहा है कि नागरिक संशोधन कानून पर हुए प्रदर्शन के पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई के रोल पर जांच का दायरा और ज्यादा बढ़ सकता है. 7 राज्यों में पीएफआई पिछले कई महीनों से सक्रिय है. सूत्रों के अनुसार इनमें दिल्ली, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, केरल, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश शामिल हैं.
देश की अलग-अलग जांच एजेंसियों को इस संगठन पर शक है. कहा जा रहा है कि देश भर में एन्टी सीएए और एनआरसी के नाम पर हुए प्रोटेस्ट में पीएफआई से जुड़े लोग शामिल थे. सूत्रों के मुताबिक नागरिक संशोधन कानून बनने से पहले पीएफआई से जुड़े लोगों ने असम और पश्चिम बंगाल में इस क़ानून के विरोध में आम लोगों के बीच पर्चे बांटे थे.



वैसे बता दें इससे पहले उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) ने नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान सूबे में हुई हिंसा के लिए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) को जिम्मेदार ठहराया. मौर्य ने कहा कि हिंसा के पीछे पीएफआई का हाथ था. सिमी के लोगों ने इस संगठन में शामिल होकर हिंसा फैलाई. जल्द ही सरकार इस संस्‍था पर प्रतिबंध लगाएगी.

डीजीपी ओपी सिंह ने भेजा है बैन करने का प्रस्ताव
बता दें उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने पीएफआई पर बैन का प्रस्ताव शासन को भेजा. जिसके बाद यूपी सरकार की तरफ से केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिमाइंडर भेजा गया. बता दें सरकार 6 महीने पहले ही गृह मंत्रालय को इस संबंध में पत्र भेज चुकी है. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य इस प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे. गौरतलब है कि बीते दिनों सूबे के 21 जिलों में हुए हिंसक प्रदर्शन में पीएफआई का नाम सामने आया था. इसके बाद पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद, कोषाध्यक्ष नदीम अहमद और मंडल अध्‍यक्ष अशफाक लखनऊ में गिरफ्तार भी हुए थे.

ऐसे बनाई यूपी में पैठ
बताया जा रहा है कि सीएए व एनआरसी का विरोध, अनुच्‍छेद 370, अयोध्या पर फैसला, तीन तलाक जैसे मुद्दों के बहाने विवादित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने यूपी में अपनी पैठ बनाई. पिछले एक साल से पीएफआई यूपी में तेजी से सक्रिय हो रहा था. लखनऊ, बाराबंकी, बहराइच, हरदोई, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, शामली, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, अलीगढ़ में पीएफआई के लोग संगठन को विस्तार देने में लगे हैं. बाराबंकी, सीतापुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और मेरठ में पीएफआई के लोगों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज हुए. कई मामलों में पुलिस ने जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट भी लगा दी. पीएफआई से जुड़े लोगों ने लखनऊ कुर्सी रोड स्थित भाखामऊ के एक निजी शिक्षण संस्थान, बाराबंकी में महादेवा के पास कुर्सी, अमरसंडा और बहराइच के जरवल में कई नुक्कड़ सभाएं कीं और पर्चे बांटे.

इनपुट: शैलेंद्र वांगू

ये भी पढ़ें:

प्रियंका की स्कूटी पर सवारी: चालान भरने को कांग्रेस लोगों से मांग रही चंदा

व्यक्तिगत फायदे के लिए कुछ पार्टियां कर रहीं राजनीति: मायावती
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज