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तो यूपी में सपा-बसपा गठबंधन की​ मजबूरी है कांग्रेस के लिए अमेठी और रायबरेली सीट छोड़ना

अखिलेश यादव और मायावती (फाइल फोटो)

अखिलेश यादव और मायावती (फाइल फोटो)

आंकड़े गवाही देते हैं कि सपा और बसपा के लिए रायबरेली और अमेठी कांग्रेस को देना मजबूरी है. यहां कई सालों की कोशिश के बाद भी गांधी परिवार का वर्चस्व ये दोनों ही दल तोड़ नहीं सके हैं.

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देश में लोकसभा चुनाव की तैयारी तेज हो गई है. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ गठबंधन का ऐलान कर दिया है. इस गठबंधन में एक तरफ राष्ट्रीय लोकदल को तो शामिल किया गया है लेकिन गठबंधन में कांग्रेस को जगह मिलती नहीं दिख रही है.

खुद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव साफ कर चुके हैं, कि वह गैर कांग्रेसी गठबंधन की तरफ बढ़ रहे हैं. हालांकि गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर बात निकलकर आ रही है कि भले ही कांग्रेस इससे बाहर हो लेकिन रायबरेली और अमेठी की सीटों को गठबंधन छोड़ देगा.

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लखनऊ के सत्ता के गलियारे में चर्चा है कि कांग्रेस के लिए इन दो सीटों को छोड़ने के पीछे भविष्य की संभावनाओं के लिए राहें आसान करने की कोशिश है. वैसे आंकड़े गवाही देते हैं कि सपा और बसपा के लिए रायबरेली और अमेठी कांग्रेस को देना मजबूरी है. यहां कई सालों की कोशिश के बाद भी गांधी परिवार का वर्चस्व ये दोनों ही दल तोड़ नहीं सके हैं. सपा ने तो पिछले कुछ चुनावों से यहां प्रत्याशी उतारना ही छोड़ दिया है. वहीं बसपा काफी कोशिश के बाद भी यहां जीत का दीदार नहीं कर सकी है.

अमेठी में राहुल गांधी के सामने बसपा का ये रहा प्रदर्शन

2014 में राहुल गांधी ने एक लाख वोट से बीजेपी की स्मृति ईरानी को हराया. बसपा तीसरे स्थान पर रही. बसपा के धर्मेंद्र प्रताप सिंह को 57716 वोट मिले, ये करीब 3.46% हैं.

2009 में बसपा यहां दूसरे नंबर पर रही थी. हालांकि राहुल गांधी ने बसपा प्रत्याशी आशीष शुक्ला को 3.5 लाख से ज्यादा वोटों से मात दी थी. राहुल को जहां 464195 वोट मिले, वहीं आशीष शुक्ला महज 93997 वोट ही पा सके. ये कुल मतदान का महज 6.57% ही है.

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2004 में भी राहुल गांधी ने बसपा के चंद्रप्रकाश मिश्रा को करीब 3 लाख से ज्यादा वोटों से हराया. राहुल गांधी ने 390179 वोट हासिल किए, वहीं बसपा के चंद्र प्रकाश मिश्रा को 99326 ही वोट मिले.

1999 में कांग्रेस की तरफ से सोनिया गांधी ने अमेठी से चुनाव लड़ा. यहां बसपा तीसरे स्थान पर रही. सोनिया गांधी को जहां 418960 वोट मिले, वहीं बसपा के पारसनाथ मौर्य सिर्फ 33658
यानी 5.39% वोट ही हासिल कर सके. इसी चुनाव मेें सपा के कमरुज्जमा फौजी भी मैदान में थे. वे भी 16678 यानी 2.67% वोट हासिल कर सके.

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1998 में अमेठी को बीजेपी के संजय सिंह ने जीता. उन्होंने 205025 वोट हासिल किए. वहीं बसपा यहां तीसरे स्थान पर रही थी. उसके मोहम्मद नईम को 151096 वोट मिले थे, इसके अलावा सपा के शिव प्रसाद को 29888 वोट लेकर चौथे मिले थे.

1996 में कांग्रेस की तरफ से सतीश शर्मा ने जीत हासिल की. यहां बसपा तीसरे स्थान पर रही. चौधरी मोहम्मद ईसा 79285 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे.

रायबरेली में सोनिया गांधी के सामने सपा और बसपा का प्रदर्शन

रायबरेली की बात करें तो यहां अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों और 3 उपचुनावों में कांग्रेस ने 16 बार जीत दर्ज की. 1977 में भारतीय लोकदल और 1996, 1998 में बीजेपी ने इस सीट पर जीत दर्ज की. बीएसपी इस सीट पर अभी तक खाता नहीं खोल सकी है, जबकि समाजवादी पार्टी 2004 से अब तक लगातार 3 चुनावों से इस सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारती है.

2014 में बसपा के प्रवेश सिंह सोनिया गांधी के मुकाबले उतरे और महज 63,633 यानी 7.71 प्रतिशत वोट ही हासिल कर सके.

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2009 में सोनिया गांधी के सामने बसपा के आरएस कुशवाहा दूसरे स्थान पर रहे. उन्होंने 1,09,325 यानी 16.40 प्रतिशत वोट हासिल किए. सोनिया गांधी ने करीब 3 लाख 70 हजार वोटों से जीत दर्ज की.

2006 के उपचुनाव में सोनिया गांधी के मुकाबले सपा के राजकुमार मैदान में उतरे. लेकिन महज 57,003 यानी 9.66 वोट ही हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे. सोनिया ने इस चुनाव में 4,74,891 वोट हासिल किए.

2004 में सोनिया गांधी के सामने सपा दूसरे और बसपा तीसरे स्थान पर रही. सपा के अशोक कुमार सिंह ने 1,28,342 यानी 19.94 प्रतिशत वोट हासिल किए. वहीं बसपा के राजेश यादव 57,543 वोट ही पा सके.

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सोनिया गांधी से पहले इस सीट पर सपा और बसपा फिर बेहतर प्रदर्शन करती थी. हालांकि जीत उन्हें कभी नसीब न हो सकी. 1999 के चुनाव में कांग्रेस से कैप्टन सतीश शर्मा ने जीत दर्ज की. वहीं दूसरे नंबर पर रही सपा के गजाधर सिंह ने 1,50,653 वोट, ज​बकि बसपा के आनंद प्रकाश लोधी ने 1,37,775 वोट हासिल किए.

इसी तरह 1998 में बीजेपी के अशोक सिंह ने करीब 40 हजार वोटों से सपा के सुरेश बहादुर सिंह को हराया. बसपा के रमेश कुमार मौर्या तीसरे स्थान पर रहे.

1996 में बीजेपी के अशोक सिंह के मुकाबले बसपा के बाबूलाल लोधी तीसरे नंबर पर रहे. उस चुनाव में जनता दल के अशोक सिंह दूसरे नंबर पर रहे थे.

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