क्या बुआ-भतीजा दोहरा पाएंगे 1993 में मुलायम और कांशीराम गठबंधन का इतिहास?

सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद बीजेपी ने सर्वाधिक 177 विधानसभा सीटें जीती थीं, लेकिन उस समय भी सपा और बसपा ने उत्‍तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार को बनने से रोकने के लिए अन्‍य दलों से हाथ मिलाया था.

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Updated: January 11, 2019, 5:25 PM IST
क्या बुआ-भतीजा दोहरा पाएंगे 1993 में मुलायम और कांशीराम गठबंधन का इतिहास?
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Updated: January 11, 2019, 5:25 PM IST
समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन के ऐलान की बस अब औपचारिकता ही बची है. शनिवार को सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती साझा प्रेस कांफ्रेंस करने जा रहे हैं. वहीं यह कोई पहली बार नहीं है जब सपा और बसपा गठबंधन करके चुनावी मैदान में उतरे हैं. 1993 में भी सपा और बसपा ने बड़े स्‍तर पर संयुक्‍त रूप से चुनाव लड़ा था. मौका था उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का.

पच्चीस साल पहले, तत्कालीन पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव और कांशीराम ने एक साथ विधानसभा चुनाव लड़ा था. इसमें दोनों दलों ने साथ मिलकर पहली बार बीजेपी को कांटे की टक्‍कर दी थी.

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बता दें कि 1993 में उत्‍तर प्रदेश की 422 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव हुए थे. इनमें बसपा और सपा ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था. दोनों ने संयुक्‍त रूप से 420 सीटों पर अपने-अपने प्रत्‍याशी उतारे थे. दोनों दलों ने इन चुनावों में 176 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इनमें बसपा ने 164 प्रत्‍याशी उतारे थे, जिनमें से 67 प्रत्‍याशी जीते थे. वहीं सपा ने इन चुनावों में अपने 256 प्रत्‍याशी उतारे थे. इनमें से उसके 109 प्रत्‍याशी जीते थे.

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सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद बीजेपी ने सर्वाधिक 177 विधानसभा सीटें जीती थीं, लेकिन उस समय भी सपा और बसपा ने उत्‍तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार को बनने से रोकने के लिए अन्‍य दलों को साथ मिलाया था. नतीजों के बाद 4 दिसंबर 1993 को मुलायम सिंह यादव के नेतृत्‍व में सपा-बसपा की सरकार बन गई थी.

2017 के राज्य विधानसभा चुनावों से पहले, बसपा प्रमुख सपा के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार नहीं थीं क्योंकि मुलायम और उनके भाई शिवपाल यादव पार्टी की राजनीति में सक्रिय थे, लेकिन अखिलेश यादव के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद हालात बदल गए.
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अखिलेश के सत्ता में आने के बाद मायावती ने 1995 के गेस्ट हाउस की घटना को फिर से उठाया, जब उन्हें एसपी के गुंडों ने निशाना बनाया था और बीएसपी कार्यकर्ताओं पर हमला किया था, लेकिन यह अखिलेश ही थे, जिन्होंने सबसे पहले सार्वजनिक भाषणों में मायावती को 'बुआ' कहकर उनके प्रशंसकों को खुश करने की कोशिश की और आखिरकार दोनों ने शांति बना ली. गोरखपुर और कैराना उपचुनाव में बसपा-सपा के साथ आने के बाद परिणामों को देखते हुए पार्टियों ने अब एक साथ आने और लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन करने का फैसला किया है.

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सूत्रों के हवाले से खबर है कि सपा और बसपा 37-37 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करेंगे. वहीं 2 सीटों पर राष्ट्रीय लोकदल का प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा. गठबंधन के तहत राहुल गांधी के लिए अमेठी और सोनिया गांधी के लिए रायबरेली सीट छोड़ी जाएगी. इसी कड़ी में अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल की सीट पर भी गठबंधन प्रत्याशी नहीं उतारेगा. ओमप्रकाश राजभर के सुहेलदेव पार्टी के लिए भी एक सीट छोड़ी जाएगी.

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