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सपा बसपा गठबंधन: याद आए अखिलेश और माया के बीच चले जुबानी तीर
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News18 Uttar Pradesh
Updated: January 14, 2019, 12:32 PM IST
सपा बसपा गठबंधन: याद आए अखिलेश और माया के बीच चले जुबानी तीर
File Photo

यूपी विधानसभा चुनावों में अखिलेश यादव ने बसपा सुप्रीमो मायावती को बुआ कहकर संबोधित करना शुरू किया और जवाब में मायावती ने उन्हें बबुआ की संज्ञा दी. इसके बाद दोनों तरफ से जमकर तीर छोड़े गए.

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लोकसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन का ऐलान किया है. देश की राजनीति में इस घटना को ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि करीब 25 साल से ये दोनों दल एक दूसरे के धुर विरोधी रहे. इस ​धुर विरोध के गवाह 2017 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव भी रहे. चुनावों में अखिलेश यादव ने बसपा सुप्रीमो मायावती को बुआ कहकर संबोधित करना शुरू किया और जवाब में मायावती ने उन्हें बबुआ की संज्ञा दी. इसके बाद दोनों तरफ से जमकर तीर छोड़े गए.

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कुछ प्रमुख जुबानी हमलों की बात करें तो 26 मई 2016 को अखिलेश यादव ने भदोही में कहा कि 9 साल गुजर गए, मगर (पार्क में) खड़े हाथी खड़े हैं और बैठे हाथी बैठे हैं. पहुंचे कहीं नहीं. बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने यूपी को बर्बाद किया है.



इसके बाद 10 अक्टूबर को अखिलेश यादव ने लखनऊ में कहा कि मुस्लिम भाई जानते हैं कि समाजवादी पार्टी उनके कितने करीब है. हम लोग भूले नहीं हैं अभी. वह रक्षाबंधन वाला त्यौहार कोई नहीं भूला है कि किसने किसको राखी बांधी थी. वह गुजरात वाली बातें नहीं भूले हैं कि कौन जाकर किसके लिए वोट मांगकर आया था.



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यही नहीं अखिलेश यादव ने इसके बाद कहा कि लोग (मायावती के लिए) योजनाओं की नहीं नकदी की बात कर रहे हैं. पहले जन्मदिन के मौके पर वसूली होती थी. मैं तो उन्हें सम्मान से बुआ कहता था, लेकिन उन्हें इस पर एतराज था तो मैंने उन्हें बुआ कहना छोड़ दिया है. उधर अखिलेश के बुआ कहने पर मायावती ने साफ किया था कि उनका किसी से भाई, बहन या बुआ भतीजे का रिश्ता नहीं है.

2016 में आंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर मायावती ने अखिलेश और समाजवादी पार्टी पर हमला किया. उन्होंने कहा कि सपा सरकार केवल परिवार के मनोरंजन के लिए अपने गृह जनपद में सैफई महोत्सव मनाने पर गरीब जनता का करोड़ों रुपया बहा देती है. दरअसल यही फिजूलखर्ची होती है. सपा सरकार के मुखिया अपने हर छोटे से छोटे कार्यक्रम में स्मारकों और पार्कों में हाथियों की बात करना कभी नहीं भूलते हैं. हो सकता है कि यह हाथी उन्हें सपने में भी परेशान करते हो.

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इसके बाद मायावती ने लखनऊ में अखिलेश द्वारा बुआ कहे जाने का जवाब देते हुए कहा कि सपा सरकार के मुखिया छह दिसंबर को पुण्यतिथि की छुट्टी कभी रद्द कर देते हैं. कभी बहाल कर देते हैं. ऐसे रवैये से यह स्पष्ट है कि सपा सरकार का मुखिया वास्तव में ही ‘बबुआ’ है.

इसके बाद मायावती ने दिसंबर 2016 में कहा कि अखिलेश यादव जल्दबाजी में आधी-अधूरी योजनाओं का लोकार्पण करके वाहवाही बटोरना चाहते हैं. प्रदेश में हमारी पार्टी की सरकार बनी तो इन योजनाओं की जांच होगी.

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First published: January 14, 2019, 12:32 PM IST
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