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पिता को साइकिल पर बिठा कर तय किया 1200 KM का सफर, अब अखिलेश यादव ने इस बेटी को 1 लाख देने का किया ऐलान
Darbhanga News in Hindi

News18Hindi
Updated: May 22, 2020, 9:56 AM IST
पिता को साइकिल पर बिठा कर तय किया 1200 KM का सफर, अब अखिलेश यादव ने इस बेटी को 1 लाख देने का किया ऐलान
पिता को साइकिल पर बिठाकर गुड़गांव से दरभंगा लाने वाली ज्योति कुमारी.

दरभंगा (Darbhanga) की 15 साल की ज्योति ने एक हजार किलोमीटर से ज्यादा की दूरी सात दिन में तय कर बीमार पिता को घर तक पहुंचाया था.

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लखनऊ. कोरोना संकट (COVID-19) के दौर में देश भर से प्रवासी मजदूरों और कामगारों का अपने-अपने घरों को लौटने का सिलसिला जारी है. लॉकडाउन (Lockdown) में मजदूरों के पैदल ही सैकड़ों-हजारों किलोमीटर का सफर करने की तमाम तस्वीरें सामने आ रही हैं. इसी कड़ी में दरभंगा की ज्योति पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बिठा कर हरियाणा के गुरुग्राम (गुड़गांव) से अपने घर बिहार के दरभंगा पहुंचीं. ज्योति की इस हिम्मत की पूरी देश में सराहना हो रही है. कई संगठनों ने उन्‍हें सम्मानित करने का ऐलान किया है. अब इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का नाम भी जुड़ गया है. उन्‍होंने ज्योति को एक लाख रुपए की मदद का ऐलान किया है.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट किया है, 'सरकार से हारकर एक 15 वर्षीय लड़की निकल पड़ी अपने घायल पिता को लेकर सैकड़ों मील के सफ़र पर. दिल्ली से दरभंगा. आज देश की हर नारी और हम सब उनके साथ हैं. हम उनके साहस का अभिनंदन करते हुए उन तक 1 लाख रुपये की मदद पहुंचाएंगे.'

15 साल की उम्र, 1200 किलोमीटर साइकिल का सफर
बता दें 15 साल की ज्योति ने तकरीबन 1200 किलोमीटर की दूरी सात दिन में तय की. वो एक दिन में 100 से 150 किलोमीटर अपने पिता को पीछे बिठा कर साइकिल चलाती थी. जब कहीं ज्यादा थकान होती तो सड़क किनारे बैठ कर ही थोड़ा आराम कर लेती थी.






ई-रिक्शा चलाकर गुजर-बसर
ज्योति के पिता गुरुग्राम में किराए पर ई-रिक्शा चलाने का काम करते थे, लेकिन कुछ महीने पहले उनका एक्सिडेंट हो गया था. इसी बीच कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन की घोषणा हो गई. ऐसे में ज्योति के पिता का काम ठप हो गया, ऊपर से ई-रिक्शा के मालिक का पैसों को लगातार दबाब बन रहा था. ज्योति के पिता के पास न पेट भरने को पैसे थे, न ही रिक्शा के मालिक को देने के.

ऐसे में ज्योति ने फैसला किया कि यहां भूखे मरने से अच्छा है कि वो किसी तरह अपने गांव पहुंच जाए. लॉकडाउन में यातायात के साधन नहीं होने की वजह से ज्योति ने दरभंगा तक की लंबी दूरी का सफर अपनी साइकिल से ही पूरी करने की ठानी. हालांकि ज्योति के पिता इसके लिए तैयार नहीं थे लेकिन गरीबी की मजबूरी ऐसी थी की पिता को बेटी के निर्णय पर सहमति जतानी पड़ी. इसके बाद दोनों कठिन परिस्थितियों का मुकाबला करते हए 7 दिन में अपने गांव पहुंच गए.

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First published: May 22, 2020, 9:09 AM IST
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