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सपा, कांग्रेस, रालोद महागठबंधन में फंसा पेंच, सीट बंटवारे पर नहीं बन रही बात

सपा, कांग्रेस, रालोद महागठबंधन में फंसा पेंच, सीट बंटवारे पर नहीं बन रही बात

सपा के साथ कांग्रेस और आरएलडी के गठबंधन को लेकर पेंच फंसता दिख रहा है. पूरी खींचतान कांग्रेस और रालोद के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर है.

सपा के साथ कांग्रेस और आरएलडी के गठबंधन को लेकर पेंच फंसता दिख रहा है. पूरी खींचतान कांग्रेस और रालोद के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर है.

सपा के साथ कांग्रेस और आरएलडी के गठबंधन को लेकर पेंच फंसता दिख रहा है. पूरी खींचतान कांग्रेस और रालोद के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर है.

सपा के साथ कांग्रेस और आरएलडी के गठबंधन को लेकर पेंच फंसता दिख रहा है. पूरी खींचतान कांग्रेस और रालोद के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर है. मामले में सपा ने पहले ही गठबंधन के लिए सिर्फ 100 सीटें कांग्रेस की तरफ बढ़ाई हैं और अब कांग्रेस को तय करना है कि वह अपने पास कितनी सीटें रखे और रालोद को कितनी सीटें दे.

गौर करने वाली बात ये है कि गठबंधन को लेकर सपा की तरफ से रालोद और जेडीयू से किसी प्रकार के तालमेल के प्रति उत्साह नहीं दिखाया गया है.

पता चला है कि गठबंधन में फंसे पेंच के कारण ही कांग्रेस के यूपी प्रभारी गुलाम नबी आजाद का गुरुवार को लखनऊ दौरा टल गया है.

सूत्रों के अनुसार समाजवादी पार्टी सिर्फ 100 सीटों पर पूरा गठबंधन चाहती है. उसके अनुसार ये कांग्रेस पर निर्भर करता है कि वह इन 100 सीटों में आरएलडी या अन्य किसी भी पार्टी को कितनी सीट दे. क्योंकि सपा बाकी की 303 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर चुकी है.

इस संंबंध में रामगोपाल यादव ने कांग्रेस नेताओं से साफ कर दिया है कि वे अपने ही खाते से रालोद को सीटें दें. रालोद के जुड़ने के बाद कांग्रेस इस संख्या को 120 के करीब पहुंचाने की कोशिश में है.

सबसे ज्यादा परेशानी से रालोद जूझ रही है. उसने पहले 36 सीटों की एक लिस्ट कांग्रेस को भेजी थी. लेकिन बात नहीं बनी तो संख्या घटकर 30 तक पहुंची. लेकिन समस्या ये फंस रही है कि कांग्रेस की तरफ से उसे अधिकतम 20 सीटों का ही आॅफर दिया जा रहा है, जिससे मामला खटाई में पड़ता दिख रहा है.

दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सीट बंटवारे को लेकर रालोद और कांग्रेस में खींचतान चल रही है. यहां रालोद के प्रभाव वाली कई सीटों पर कांग्रेस भी प्रत्याशी उतारना चाहती है. पता चला है कि बागपत से मथुरा तक करीब एक दर्जन सीटें ऐसी हैं. इन जिलों में रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी की भी सीटें हैं.

उत्तर प्रदेश में 11 फरवरी से 8 मार्च के बीच सात चरणों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी के अखिलेश धड़े के बीच गठबंधन के बावजूद बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा.

केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद जिस तरह से बीजेपी को दिल्ली और बिहार में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, वैसे में उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. मुख्यमंत्री चेहरे को सामने न लाकर एक बार फिर बीजेपी ने पीएम मोदी के चेहरे पर दांव खेला है. इसका कितना फायदा उसे इन चुनावों में मिलेगा वह 11 मार्च को सामने आ ही जाएगा.

इस बार उत्तर प्रदेश चुनावों में समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के अलावा प्रदेश की कानून व्यवस्था, सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी और विकास का मुद्दा प्रमुख रहने वाला है. जहां एक ओर बीजेपी और बसपा प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर अखिलेश सरकार को घेर रही हैं, वहीँ विपक्ष नोटबंदी के फैसले को भी चुनावी मुद्दा बना रहा है.

यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं. 2012 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने 224 सीट जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी. पिछले चुनावों में बसपा को 80, बीजेपी को 47, कांग्रेस को 28, रालोद को 9 और अन्य को 24 सीटें मिलीं थीं.

Tags: Ajit singh, Akhilesh yadav, Congress, Ghulam nabi azad, Rahul gandhi, Ram Gopal Yadav, Rld, Samajwadi party, लखनऊ

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