विशेष अभियान : उत्तर प्रदेश में 24 मार्च तक बनवा सकते हैं अपना आयुष्मान भारत कार्ड

यूपी में कुल 1 करोड़ 26 लाख परिवार इस कार्ड के पात्र हैं.

यूपी में कुल 1 करोड़ 26 लाख परिवार इस कार्ड के पात्र हैं.

20 लाख परिवारों का आयुष्मान भारत कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है. भारत सरकार की स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत आने वाले इस कार्ड से 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 18, 2021, 3:55 PM IST
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में आयुष्मान भारत कार्ड (Ayushman Bharat card) बनाने का अभियान इन दिनों व्यापक तौर पर चल रहा है. 15 दिनों का यह अभियान 10 मार्च से शुरू हो चुका है और 24 मार्च तक चलेगा. इसके तहत 20 लाख परिवारों का आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है. भारत सरकार (Government of India) की स्वास्थ्य बीमा योजना (Health Insurance Scheme) के तहत आने वाले इस आयुष्मान भारत कार्ड से 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त कराने की सहूलियत मिलती है.

यूपी में 1 करोड़ 26 लाख परिवार हैं इस कार्ड के हकदार

बता दें कि यूपी में कुल 1 करोड़ 26 लाख परिवार इस कार्ड के पात्र हैं. इस अभियान से पहले महज 40 फीसदी परिवार ही कार्ड बनवा पाए थे. इसी कमी को पूरा करने के लिए 15 दिनों का यह विशेष अभियान चलाया गया है. अभियान के तहत लोगों को उनके गांव में ही गोल्डेन कार्ड बनवाने की सुविधा दी गयी है. इसके लिए अब उन्हें जन सेवा केन्द्र या ब्लॉक या शहर तक के चक्कर नहीं लगाने होंगे.

आशा वर्कर पहुंचा रही हैं पर्ची
इस प्रक्रिया के तहत आशा वर्कर एक दिन पहले ही लाभार्थी को पर्ची पहुंचा दे रही हैं. इसके जरिये लाभार्थी परिवार को यह पता चल जा रहा है कि उन्हें किस तारीख को और किस कैम्प में कार्ड बनवाने के लिए पहुंचना है.

कैम्प में इन कागजात की होगी जरूरत

यदि आप गोल्डेन कार्ड बनवाने के लिए कैम्प में जा रहे हैं, तो आपको तीन कागज लेकर जाने होंगे. आशा वर्कर की दी हुई पर्ची, राशन कार्ड और आधार कार्ड. यदि आशा वर्कर की दी हुई पर्ची नहीं है और आपको पता है कि आप लाभार्थी हैं तो सिर्फ राशन कार्ड और आधार कार्ड से गोल्डेन कार्ड बन जाएगा. इसके साथ ही प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की आई चिट्ठी दिखाकर भी गोल्डेन कार्ड बनवाया जा सकता है.



घर आएगा स्मार्ट कार्ड

कैम्प में कार्ड बनवाने की प्रक्रिया पूरी करने के कुछ दिनों बाद आपके घर एक स्मार्ट कार्ड आएगा. इसे दिखाकर अस्पतालों में 5 लाख तक का मुफ्त इलाज करवाया जा सकेगा. हालांकि मुफ्त इलाज के लिए कार्ड का होना जरूरी नहीं है. यदि लाभार्थियों की सूची में आपका नाम दर्ज है तो बिना कार्ड भी आपको इलाज मिलेगा. कार्ड से थोड़ी सहूलियत हो जाएगी.

कौन हैं लाभार्थी

भारत सरकार ने 2011 में सामाजिक और आर्थिक आधार पर एक सर्वे कराया था. इस सर्वे के अंतर्गत इस सूची में जो परिवार शामिल हुए थे वे ही इस योजना के लाभार्थी हैं. इन्हें ही गोल्डेन कार्ड जारी किया जाएगा. इस सूची के अनुसार यूपी में 1 करोड़ 18 लाख परिवार लाभार्थी थे. हालांकि 2019 में यूपी सरकार ने एक अलग से भी सर्वे कराया था. इसके बाद 8 लाख 43 हजार परिवारों को और इसमें शामिल किया गया. ऐसे सभी परिवारों को गोल्डन कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है.

ऐसे जानें कि आपका लाभार्थी हैं या नहीं

इसको जानने के तीन तरीके हैं. पहला तो ये कि भारत सरकार की वेबसाइट mera.pmjay.gov.in पर जाकर इसमें अपना मोबाइल नंबर डालें. फिर मोबाइल पर आया ओटीपी डालें. इसके बाद वेबसाइट पर खुद-ब-खुद बताया जाएगा कि आगे कैसे करना है. इससे पता चल जाएगा कि आप लाभार्थी हैं या नहीं. दूसरा तरीका और भी आसान है. इस योजना के लाभार्थियों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की ओर से चिट्ठी भेजी गई थी. तीसरा तरीका ये है कि 1800-1800-4444 पर फोन करके पता किया जा सकता है कि आप लाभार्थी हैं या नहीं. कॉल करने के बाद राशन कार्ड का नंबर या फिर आधार कार्ड का नंबर बताना होगा. इससे कॉलसेंटर से जुड़ा व्यक्ति आपको बता देगा कि आप लाभार्थी हैं या नहीं.

कार्ड के लिए कोई शुल्क नहीं देनी है

इस अभियान का एक फायदा यह भी है कि पहले तो गोल्डेन कार्ड बनाने के तीस रुपये देने पड़ते थे अब वह नहीं देने होंगे. सरकार लाभार्थियों को गोल्डेन कार्ड मुफ्त में ही बनाकर दे रही है.
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