यूपी: NDA में टूट पूर्वांचल में प्रियंका गांधी के लिए किसी तोहफे से कम नहीं!
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यूपी: NDA में टूट पूर्वांचल में प्रियंका गांधी के लिए किसी तोहफे से कम नहीं!
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की फाइल फोटो

कांग्रेस के साथ अगर अपना दल और सुभासपा का गठबंधन होता है तो पूर्वांचल की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा की पकड़ मजबूत होगी और इसका फायदा लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को मिल सकता है.

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उत्तर प्रदेश में एनडीए का कुनबा बिखराव के कगार पर है. बीजेपी के दो विश्वस्त सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) एनडीए को तलाक देने पर आमादा हैं. अपना दल संरक्षक और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने तो यहां तक कह दिया है कि उनकी पार्टी अब फैसला लेने के लिए स्वंतत्र है. उधर सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर भी ओबीसी आरक्षण में बंटवारे और सीटों में हिस्सेदारी को लेकर नाराज चल रहे हैं. माना जा रहा है कि अपना दल एनडीए से अलग होने का ऐलान 28 फरवरी को कर सकती है तो राजभर 26 को कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं.

अनुप्रिया पटेल ने की प्रियंका गांधी से मुलाकात, NDA छोड़ जा सकती हैं कांग्रेस के साथ

दोनों ही दलों का पूर्वांचल की दर्जन भर सीट पर अच्छी पकड़ मानी जाती है. दरअसल राजभर और पटेल वोटर इन सीटों पर निर्णायक भूमिका में हैं. वहीं दोनों ही दलों की कांग्रेस के साथ नजदीकी की भी चर्चाएं हैं. ऐसे में अगर कांग्रेस के साथ इन दोनों दलों का गठबंधन होता है तो पूर्वांचल की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा की पकड़ मजबूत होगी और इसका फायदा लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को मिल सकता है. जाहिर है, यूपी में हाशिए पर पहुंच चुकी कांग्रेस के लिए ये किसी तोहफे से कम नहीं होगा.



NDA में मचा घमासान, अनुप्रिया पटेल ने अलग चुनाव लड़ने के दिए संकेत
गौरतलब है कि गुरुवार को दिल्ली में प्रियंका के आवास पर अपना दल संरक्षक अनुप्रिया पटेल और अध्यक्ष आशीष पटेल के बीच 3 घंटे तक लंबी मुलाकात हुई. इस दौरान गठबंधन को लेकर चर्चा हुई. दूसरी तरफ राजभर भी सपा-बसपा गठबंधन में शामिल होना चाहते थे, लेकिन जब सपा-बसपा के बीच सीटों का बंटवारा हो चुका है तो ऐसे में राजभर के पास बेहतर विकल्प के तौर पर कांग्रेस सामने है. अगर 26 फरवरी को अमित शाह से मुलाकात के बाद बात नहीं बनती है तो वह कोई बड़ा फैसला लेने के लिए स्वतंत्र होंगे.

पूर्वांचल के इन सीटों पर अपना दल निर्णयक भूमिका में

बता दें पूर्वांचल में 9 से 10 सीटें ऐसी हैं, जहां अपना दल निर्णयक भूमिका में है. इन सीटों पर पटेल मतदाताओं की संख्या 5 फीसदी से ज्यादा है. ये सीटें हैं- वाराणसी, मिर्जापुर, भदोही, इलाहाबाद, फूलपुर, चंदौली, प्रतापगढ़, कौशाम्बी. कांग्रेस से गठबंधन होने पर इन सीटों पर वह चुनौती देने की पोजीशन में होगी.

पूर्वांचल में इन सीटों पर राजभर वोटर निर्णयक भूमिका में

कांशीराम के पुराने साथी रहे ओम प्रकाश राजभर ने बहुजन समाज पार्टी छोड़ने के बाद 2001 में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी बनाई थी. सुभासपा का बेस वोट राजभर हैं. जानकारों का कहना है कि बनारस से बहराइच तक 15 जिलों में राजभर वोटरों की अच्छी तादाद है. यूपी में 2 फीसदी से अधिक राजभर आबादी है.

बीजेपी से छिटक रहे उसके अपने लोग

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने अपना दल संरक्षक अनुप्रिया पटेल की प्रियंका गांधी से मुलाकात की बात स्वीकारी है. उन्होंने कहा कि बीजेपी की दो सांसद उमा भारती और सुषमा स्वराज ने चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया है. इसके अलावा महाराष्ट्र, बिहार और तमिलनाडु में बीजेपी झुककर गठबंधन कर रही है. वहीं यूपी में भी अपना दल और राजभर अलग होने की राह पर हैं.

गठबंधन एकजुट रहेगा: बीजेपी

उधर अपना दल के अलग होने की ख़बरों का खंडन करते हुए बीजेपी एमएलसी और महामंत्री विजय बहादुर पाठक ने कहा कि यूपी में गठबंधन एकजुट है. जो भी नाराजगी है उसे दूर कर लिया जाएगा.

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