राम मंदिर सुलह को लेकर CM योगी से मिले श्रीश्री रविशंकर

News18Hindi
Updated: November 15, 2017, 12:07 PM IST
राम मंदिर सुलह को लेकर CM योगी से मिले श्रीश्री रविशंकर
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की.
News18Hindi
Updated: November 15, 2017, 12:07 PM IST
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास 5 कालिदास मार्ग पर मुलाकात की. माना जा रहा है कि श्रीश्री ने अयोध्या में राम मंदिर मुद्दे पर उनसे चर्चा की.

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद श्रीश्री पंडित अमरनाथ मिश्र के आवास पर मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे.

गुरुवार को श्रीश्री अयोध्या जाएंगे, जहां वे अयोध्या विवाद से जुड़े सभी पक्षकारों से मिलकर सुलह का रोडमैप साझा करेंगे. इसके अलावा वे मुस्लिम समाज से भी मुलाकात करेंगे. वह मंत्री मोहसिन रज़ा से भी मुलाकात करेंगे.

इससे पहले मंगलवार को वृन्दावन में श्रीश्री ने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी मध्यस्थता सकारात्मक परिणाम तक पहुंचेगी. उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी पक्षकार आपसी सहमती से मंदिर मामले में निर्णायक हल तक पहुंचेंगे.

श्रीश्री रविशंकर की मध्यस्थता किसी भी हालत में स्वीकार नहीं : राम विलास वेदांती
श्रीश्री रविशंकर की इस कवायद को राम मंदिर के पक्षकार राजनीति से प्रेरित मानते हैं. श्रीश्री रविशंकर पर हिंदू पक्षकार धर्मदास ने कहा कि अयोध्यावासी चाहते हैं कि अयोध्या में जल्द राम मंदिर बने. अब तो सुनवाई जल्द शुरू होने वाली है, अपने आप सामने निकल कर आ जाएगा कि कौन लोग इसमें राजनीति कर रहे हैं या कौन हैं जो राम मंदिर बनने देना नहीं चाह रहे हैं.

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे बीजेपी के पूर्व सांसद राम विलास वेदांती ने श्री श्री की मध्यस्थता को स्वीकार करने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि श्रीश्री रविशंकर की मध्यस्थता किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी. राम जन्मभूमि आंदोलन राम जन्मभूमि न्यास और विश्व हिंदू परिषद ने लड़ा है इसलिए वार्ता का अवसर भी इन दोनों संगठनों को मिलना चाहिए.

कोई साधु-महात्मा नहीं हैं श्रीश्री रविशंकर : महंत नरेंद्र गिरि
श्रीश्री रविशंकर की कवायद के बाद सुलह को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने भी अपने स्तर से कवायद शुरू कर दी है, लेकिन वह श्रीश्री की कवायद को दरकिनार कर देते हैं. वह कहते हैं कि जो पक्षकार हैं, वही वार्ता करेंगे, तभी मामला हल होगा.

जब पक्षकार मुकदमा हटाएगा, तभी तो मामला खत्म होगा. उन्होंने श्रीश्री रविशंकर के लिए कहा कि वह कोई साधु-महात्मा नहीं हैं. वह एनजीओ चलाते हैं. वह उनका काम है, वो वही करें. राम मंदिर निर्माण उनके बस के बाहर है. नरेंद्र गिरि ने कहा कि ऐसे लोग बड़े कलाकार होते हैं.

मामले में शिया वक्फ बोर्ड के वसीम रिजवी की एंट्री
इस बीच शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने मामले में नया ही एंगल जोड़ दिया है. वसीम रिजवी ने दावा किया है कि बाबरी मस्जिद शियाओं की है, इसलिए इस पर शिया वक्फ बोर्ड का ही हक बनता है. उन्होंने सुन्नी वक्फ बोर्ड के दावे को गलत बताया. उन्होंने कहा कि अयोध्या मंदिरों का शहर है. यहां किसी प्रकार की नई मस्जिद की जरूरत नहीं है. मस्जिद फैजाबाद व अयोध्या के बाहर ही बननी चाहिए, जिसका निर्माण मुस्लिम स्वयं कर लेंगे.

वसीम रिजवी ने अखाड़ा परिषद से मिलकर किया सुलह का ऐलान
वसीम रिजवी इस सिलसिले में अपना पक्ष श्रीश्री रविशंकर से मिलकर भी रख चुके हैं. वहीं पिछले दिनों उन्होंने राम मंदिर के पक्षकार और साधु संतों से भी अयोध्या में मुलाकात की. इसके बाद इलाहाबाद में उनकी अखाड़ा परिषद के साथ सोमवार को बैठक हुई. जिसके बाद अखाड़ा परिषद के महंत नरेंद्र गिरि और वसीम रिजवी ने ऐलान किया कि सुलह हो गई है. अयोध्या में राम मंदिर ही बनेगा. मस्जिद का निर्माण अयोध्या-फैजाबाद के बाहर किसी मुस्लिम आबादी वाले इलाके में किया जायेगा.

मुस्लिम पक्षकारों ने वसीम रिजवी का किया विरोध
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू ये है कि मामले में मुस्लिम पक्षकार वसीम रिजवी का पुरजोर विरोध शुरू कर चुके हैं. बाबरी मस्जिद के पक्षकार मोहम्मद इकबाल कहते हैं कि वसीम रिजवी जो बात कर रहे हैं, वह एकदम नाजायज है. वह राजनीतिक कर रहे हैं. वसीम रिजवी कह रहे हैं कि बाबरी मस्जिद में सब कुछ शिया का है, सुन्नी का कुछ नहीं है. ये एकदम जबरदस्ती की बात है.

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सुलह समझौता की वार्ता हम अपने यहां के साधु संतों से करेंगे. अपने पक्षकार भाइयों से बात करेंगे. किसी बाहरी और वसीम रिजवी जैसे इंसान के साथ बैठकर बात नहीं हो पाएगी क्योंकि अगर कहीं बात बन रही होगी तो बिगड़ जाएगी.

वसीम रिजवी हैं कौन? : मुद्दई हाजी महबूब
वहीं बाबरी मस्जिद के दूसरे मुद्दई हाजी महबूब भी वसीम रिजवी का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने वसीम रिजवी के लिए कहा कि वह हैं कौन? न वह पार्टी हैं, न प्रकार हैं. उनसे किस बात की सुलह समझौते की बात हो रही है? उनसे कैसी वार्ता?

महबूब कहते हैं कि इसमें 21 पक्षकार थे, जिसमें ज्यादातर लोगों का देहांत हो चुका है. चार-पांच लोग बचे हैं. वसीम रिजवी साहब यह ऐसा इसलिए कर रहे हैं, जिससे वह मीडिया में छा जाएं. वह अपनी पहचान बनाने के लिए इस तरीके के बयानबाजी कर रहे हैं.

दिलचस्प बात ये है कि ये पक्षकार नरेंद्र गिरि को भी बाहरी ही मानते हैं. हाजी महबूब कहते हैं कि नरेंद्र गिरि धर्म गुरु हैं और वह अपनी जगह हैं लेकिन समझौते के लिए कोई पक्षकार और पार्टी हो. तभी समझौता होगा. बिना पक्षकार के दोनों पार्टियों के बैठे समझौता संभव नहीं है.
First published: November 15, 2017
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर