मिशन चंद्रयान-2 के पीछे लखनऊ की इस साइंटिस्ट की अहम भूमिका

News18Hindi
Updated: July 14, 2019, 9:50 PM IST
मिशन चंद्रयान-2 के पीछे लखनऊ की इस साइंटिस्ट की अहम भूमिका
ISRO की सीनियर साइंटिस्ट रितु करिधाल श्रीवास्तव.

रोहित कहते हैं कि रितु ने लखनऊ विश्वविद्यालय से फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया. वहीं गेट पास करने के बाद मास्टर्स डिग्री के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंसेज जॉइन किया.

  • Share this:
लखनऊ को यूं ही नहीं आक्सफोर्ड ऑफ ईस्ट कहा जाता हैं. क्योकि लखनऊ के लिए कई मायने में खास होगा वह पल जब सोमवार तड़के सुबह चंद्रयान चांद की कक्षा में प्रवेश करेगा.  इस मिशन की डायरेक्टर हैं लखनऊ की बेटी और ISRO की सीनियर साइंटिस्ट रितु करिधाल श्रीवास्तव. रितु लखनऊ में राजाजीपुरम की रहने वाली हैं. ISRO की सीनियर साइंटिस्ट रितु के भाई रोहित ने बताया कि हमें नाज है अपनी बहन पर. लेकिन इसके पीछे सैकड़ों वैज्ञानिकों की टीम की मेहनत भी है. उन्होंने कहा कि हम देश के इस मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना करें. बता दें कि रितु करिधाल के माता-पिता का निधन हो चुका है. रितु के दो बच्चे भी हैं जिनका वह अच्छी तरह ध्यान रखती हैं.

रोहित कहते हैं कि रितु ने लखनऊ विश्वविद्यालय से फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया. वहीं गेट पास करने के बाद मास्टर्स डिग्री के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंसेज ज्वाइन किया. यहां से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में डिग्री ली. उन्होंने बताया कि रितु साल 1997 से ISRO से जुड़ी. इससे पहले वो मंगलयान में डिप्टी ऑपरेशन डायरेक्टर रहीं और अब चंद्रयान-2 में मिशन डायरेक्टर हैं.

रितु करिधाल श्रीवास्तव का परिवार


IIT कानपुर ने दी तकनीक

चंद्रयान-2 में आईआईटी कानपुर ने किया अहम योगदान दिया हैं. चंद्रयान-2 से मानव रहित रोवर चांद में जाकर पानी की खोज करेगा. आईआईटी कानुपर ने रोवर के लिए मैप जनरेशन और पाथ जनरेशन के लिए तकनीक देने में अहम भूमिका निभाई है. आपको बता दें कि चन्द्रयान-2 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरीकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 15 जुलाई, 2019 को लॉन्च किया जाएगा.

इस मिशन की ख़ास बात ये है कि ये चंद्रयान उस जगह पर जाएगा जहां अब तक कोई देश नहीं गया है. चंद्रयान चांद के दक्षिणी धुव्र पर उतरेगा. इस इलाक़े से जुड़े जोखिमों के कारण कोई भी अंतरिक्ष एजेंसी वहां नहीं उतरी है. अधिकांश मिशन भूमध्यरेखीय क्षेत्र में गए हैं जहां दक्षिण धुव्र की तुलना में सपाट जमीन है. वहीं, दक्षिणी ध्रुव ज्वालमुखियों और उबड़-खाबड़ जमीन से भरा हुआ है और यहां उतरना जोखिम भरा है.

ये भी पढ़ें:
Loading...

योगी आदित्यनाथ ने मुजफ्फरनगर में 20 करोड़ की योजनाओं का किया शिलान्यास

यूपी में 'जय श्रीराम' न बोलने पर मौलाना को पीटा

मालिनी अवस्थी ने दी नसीहत, बोलीं- जीवन साथी चुनिए किन्तु...

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए लखनऊ से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 14, 2019, 9:41 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...