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पर्दे के पीछे रहकर सुनील बंसल ने लिखी थी यूपी जीत की स्क्रिप्ट, अमित शाह भी मानते हैं लोहा!

पर्दे के पीछे रहकर सुनील बंसल ने लिखी थी यूपी जीत की स्क्रिप्ट, अमित शाह भी मानते हैं लोहा!

(Twitter)

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यूपी में बीजेपी ने 16 साल बाद पूर्ण बहुमत हासिल की है. इसका श्रेय प्रमुख रूप से पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह को दिया जा रहा है. लेकिन एक ऐसा शख्स भी है, जिसके नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है. वो हैं सुनील बंसल.

    यूपी में बीजेपी ने 16 साल बाद पूर्ण बहुमत हासिल किया है. इसका श्रेय प्रमुख रूप से पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह को दिया जा रहा है. लेकिन एक ऐसा शख्स भी है, जिसके नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है. वो हैं सुनील बंसल. सुनील ही वो शख्स हैं, जिन्होंने अमित शाह की तरकश के सभी तीर को सफल तरीके से टारगेट तक पहुंचाया. यूं कह लें कि जीत की असल स्क्रिप्ट उन्होंने ही लिखी.

    दिल्ली के रफी मार्ग पर स्थित कॉन्टिटयूशन क्लब में दो रूम सेट, वो भी बिना नमेप्लेट के, में रहने वाले सुनील बंसल ने ही अमित शाह और बीजेपी की जीत की स्क्रिप्ट लिखी और बीजेपी को जीत दिलाने में अहम रोल निभाया. राजस्थान में जन्मे सुनील एबीवीपी के धुरंधर नेताओं में से एक हैं. उन्होंने यूपी लोकसभा इलेक्शन में अमित शाह के डिप्टी के रूप में काम किया था. यहां भी पार्टी को बहुमत मिली थी. हालांकि 2015 में बिहार चुनाव में उनका अनुभव कुछ ज्यादा अच्छा नहीं रहा था.

    देखा जाए तो बिहार चुनाव से सुनील बंसल ने काफी कुछ सीखा. इसी वजह से यूपी में बीजेपी ने समाजवादी के वोटबैंक यादव को छोड़कर बाकी की ओबीसी जातियों को अपने पक्ष में लाने की सबसे पहले कोशिश की. जिनका यूपी में सबसे अधिक वोट बेस 30% है. इसके अलावा बीजेपी ने अति पिछड़े वर्ग को अपने साथ लाने की कोशिश की, जो कि सामान्यतः बीएसपी का वोटबैंक मानी जाती है. बस यहीं से खेल का रुख बदल गया. इस स्क्रिप्ट के सबसे बड़े मोहरा बने पार्टी प्रदेश अक्ष्यक्ष केशव मौर्य और मायावती की पार्टी को त्यागने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य.

    इसमें एक और वजह रहीं छोटी-छोटी​ पार्टियां- सुखदेव भारतीय समाज पार्टी और अपना दल, जिन्होंने सपा और बीएसपी के सबसे अधिक वोट काटे. पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों को अपनी ओर मोड़ने में कामयाब होने के बाद बीजेपी के सामने सबसे बड़ी समस्या थी टिकट बांटना. आखिर किसे दिया जाए? यहां भी बंसल का तजुर्बा ही काम आया. उनके पैनल ने अधिकतर कैंडिडेट्स के नाम तय कर दिए. इसमें अमित शाह और सुनील बंसल का बीजेपी के बड़े नेताओं के बेटे-बेटियों को भी टिकट देने का निर्णय भी सही साबित हुआ. बता दें कि बीजेपी 1991 में पहली बार बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी.

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