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Ayodhya Verdict: फैसला पढ़ रहे हैं CJI रंजन गोगोई, बोले- ज़मीन अधिग्रहण होने तक मुस्लिम पढ़ते थे नमाज

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने कहा कि कोर्ट के लिए धर्मशास्त्र में जाना उचित नहीं.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने कहा कि कोर्ट के लिए धर्मशास्त्र में जाना उचित नहीं.

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच अपना फैसला सुनाएगी. इसके मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या समेत पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है.

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    अयोध्‍या. सुप्रीम कोर्ट अब से थोड़ी देर बाद अयोध्‍या विवाद मामले (Ayodhya Land Dispute) में अपना फैसला सुनाएगा. फैसला सुनाने के लिए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और पांच जजों की गठित बेंच के अन्य चार जज भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं. वहीं उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आने वाले फैसले के मद्देनजर अयोध्या समेत पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. अयोध्या में राम जन्मभूमि (Ram Janmbhoomi) जाने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया गया है. टेढ़ी बाजार से दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है. सघन चेकिंग के बाद ही श्रद्धालुओं और आम लोगों को जाने दिया जा रहा है. इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से अपील की है कि इस फैसले को जीत-हार के साथ जोड़कर न देखा जाए.



    सूत्रों के अनुसार फैसले के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) की सुरक्षा बढ़ाकर जेड-प्लस (Z Plus Security) कर दी गयी है. रंजन गोगोई इस मामले के पांच सदस्यीय संविधान पीठ का नेतृत्व कर रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के पांचों जजों, जो इस केस पर शनिवार को फैसला सुनाएंगे, उनकी भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है.



    प्रधानमंत्री मोदी ने भी की शांति बनाए रखने की अपील
    उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की है. पीएम मोदी ने फैसले की पूर्व संध्या ट्वीट कर कहा, 'अयोध्या पर कल (शनिवार) सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आ रहा है. पिछले कुछ महीनों से सुप्रीम कोर्ट में निरंतर इस विषय पर सुनवाई हो रही थी, पूरा देश उत्सुकता से देख रहा था. इस दौरान समाज के सभी वर्गों की तरफ से सद्भावना का वातावरण बनाए रखने के लिए किए गए प्रयास बहुत सराहनीय हैं.'







    देश की न्यायपालिका के मान-सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए समाज के सभी पक्षों ने, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने, सभी पक्षकारों ने बीते दिनों सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए जो प्रयास किए, वो स्वागत योग्य हैं. कोर्ट के निर्णय के बाद भी हम सबको मिलकर सौहार्द बनाए रखना है. अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, वो किसी की हार-जीत नहीं होगा. देशवासियों से मेरी अपील है कि हम सब की यह प्राथमिकता रहे कि ये फैसला भारत की शांति, एकता और सद्भावना की महान परंपरा को और बल दे.

    सीएम योगी आदित्यनाथ बोले- फैसले में जीत-हार न तलाशें
    वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी एक अपील जारी कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. योगी ने कहा कि इस फैसले को जीत-हार से जोड़कर न देखा जाए. योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश शासन लोगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. कोई भी व्यक्ति कानून के साथ खिलवाड़ करेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा.



    बता दें कि अयोध्या विवाद पर लगातार 40 दिन तक सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चली थी. इसके बाद कोर्ट ने 16 अक्टूबर को इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस बहुप्रतीक्षित फैसले के मद्देनजर किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश में लगभग चार हजार अर्धसैनिक बल के जवान तैनात किए गए हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अयोध्‍या मामले के फैसले के मद्देनजर सभी राज्‍यों को सतर्क रहने की हिदायत दी है.



    अयोध्‍या में अर्धसैनिक बलों के 4,000 जवान तैनात
    केंद्र (Central Government) ने फैसले के मद्देनजर सभी राज्यों से अलर्ट (Alert) रहने और संवेदनशील क्षेत्रों (Sensitive Areas) में सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है. गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने उत्तर प्रदेश और खासतौर पर अयोध्या में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों (CPMF) के चार हजार जवानों को भेजा है. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवायजरी जारी की गई है, जिसमें सभी संवेदनशील इलाकों में पर्याप्त संख्या में सुरक्षाबलों (Security Forces) को तैनात करने को कहा गया है. साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि देश में कहीं भी कोई अप्रिय घटना न हो. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने भी नेताओं और मंत्रियों से अयोध्या विवाद पर बयानबाजी नहीं करने की सलाह दी है.

     

    रेलवे पुलिस ने रद्द कर दी हैं सभी कर्मियों की छुट्टियां
    रेलवे पुलिस (Railway Police) ने भी अपने सभी कर्मियों की छुट्टियां (Leaves) रद्द कर दी हैं. उन्हें ट्रेनों (Trains) की सुरक्षा में तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं. प्लेटफॉर्म, रेलवे स्टेशनों, यार्ड, पार्किंग स्थल, पुलों और सुरंगों के साथ-साथ उत्पादन इकाइयों और कार्यशालाओं में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. दिल्ली (Delhi), महाराष्ट्र (Maharashtra) और उत्तर प्रदेश (UP) के स्टेशनों समेत 78 प्रमुख स्टेशनों की पहचान की गई है, जहां अधिक संख्या में यात्री आते हैं. यहां आरपीएफ (RPF) कर्मियों की मौजूदगी बढ़ाई गई है. परामर्श में पूर्व के उस आदेश को भी रद्द किया गया है, जिसमें स्टेशनों को बिजली बचाने के लिए करीब 30 प्रतिशत रोशनी कम रखने की अनुमति दी गई थी.

    2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया था फैसला
    बता दें कि वर्ष 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की खंडपीठ- जस्टिस एस यू खान, जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस डी वी शर्मा ने 2:1 के बहुमत (मेजॉरिटी) से फैसला सुनाया. हाईकोर्ट ने 2.77 एकड़ की विवादित जमीन में रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और UP सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, तीनों का मालिकाना हक माना. इन तीनों के बीच जमीन का बंटवारा करने का निर्देश दिया. एक तिहाई रामलला को, एक तिहाई निर्मोही अखाड़ा को और एक तिहाई मुस्लिम पक्ष को. जहां बाबरी मस्जिद का बीच वाला गुंबद हुआ करता था, वो जगह रामलला को मिली. राम चबूतरा और सीता रसोई निर्मोही अखाड़ा को दी गई. सभी पक्षों ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की और इसपर स्टे लग गया.

    2017 में सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई सुनवाई
    सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हुई. उस समय चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा थे. दीपक मिश्रा के रिटायरमेंट के बाद रंजन गोगोई चीफ जस्टिस बने. आठ जनवरी, 2019 को रंजन गोगोई ने ये मामला पांच जजों की एक खंडपीठ के सुपुर्द किया. आठ मार्च, 2019 को अदालत ने सभी मुख्य पक्षों को आठ हफ्ते का समय देते हुए कहा कि वो आपसी बातचीत से मध्यस्थता की कोशिश करें. 13 मार्च को मध्यस्थता की कार्रवाई शुरू हुई. मई में कोर्ट ने इसका समय बढ़ाकर 15 अगस्त तक कर दिया. मगर मध्यस्थता की कोशिशें कामयाब नहीं हुईं. बीते छह अगस्त से कोर्ट ने फाइनल दलीलें सुननी शुरू कीं थी. सुनवाई पूरी होने के बाद 16 अक्टूबर को अदालत ने इस पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था.

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