महागठबंधन को लेकर कांग्रेस की बैठक में अखिलेश, माया के शामिल होने पर सस्पेंस
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महागठबंधन को लेकर कांग्रेस की बैठक में अखिलेश, माया के शामिल होने पर सस्पेंस
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फिलहाल यूपी में बीजेपी के खिलाफ गठबंधन की जो तस्वीर उभर कर सामने आ रही हैं, उसमें सपा और बसपा के साथ राष्ट्रीय लोकदल एकजुट हैं. वहीं कांग्रेस जो यूपी में चौथे नंबर की पार्टी है, उसे इन दोनों प्रमुख दलों की तरफ से कोई तरजीह मिलती नहीं दिख रही है.

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  • Last Updated: December 5, 2018, 2:44 PM IST
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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव समाप्त होने को हैं. सबकी नजर इन राज्यों के 11 दिसंबर को आने वाले रिजल्ट पर है. माना जा रहा है कि ये चुनाव परिणाम लोकसभा चुनाव में विपक्ष के रुख को दिशा देंगे. इसी क्रम में चुनाव परिणाम से एक दिन पहले 10 दिसंबर को कांग्रेस ने विपक्षी एकजुटता के लिए दिल्ली में अहम बैठक बुलाई है.

लेकिन महागठबंधन को लेकर कांग्रेस की इस पहल पर यूपी के दो दिग्गज दलों के नेता मायावती और अखिलेश यादव के शामिल होने पर सस्पेंस बरकरार है. दरअसल विधानसभा चुनावों के बाद बदली परिस्थितियों में सपा और बसपा बिना कांग्रेस के करीब आते दिख रहे हैं. दोनों ही नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस पर जमकर निशाना भी साधा.

बता दें 2019 के आम चुनावों को देखते हुए देश में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ महागठबंधन बनाने की कोशिश जोर पकड़ रही है. इन दलों को करीब लाने का जिम्मा आंध्र प्रदेश के सीएम और तेलुगू देशम पार्टी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने उठाया है. लिहाजा नायडू अलग-अलग नेताओं से मुलाकात भी करते रहे हैं.



एंटी-बीजेपी फ्रंट को मजबूत करने की कोशिशों के बीच चंद्रबाबू नायडू ने कुछ दिन पहले ही अमरावती में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत से मुलाकात की. इस मीटिंग में ये तय हुआ कि बीजेपी के खिलाफ विपक्ष के सभी बड़े दल की दिल्ली में एक मीटिंग की जाएगी.
उधर इस बैठक में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के शामिल होने पर संशय बरकरार है. हालांकि दोनों ही पार्टियों ने इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. लेकिन संशय इसलिए है क्योंकि मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में पहले मायावती फिर अखिलेश यादव ने कांग्रेस पर बेरुखी का आरोप लगाया और चुनाव प्रचार के दौरान लगातार कांग्रेस पर हमलावर रहे.

मध्यप्रदेश में तो कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन की चर्चाएं तेज थीं लेकिन अंतिम समय पर बसपा प्रमुख ने ऐलान किया कि बसपा एमपी में कांग्रेस से गठबंधन नहीं करेगी. उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह आरएसएस के एजेंट हैं. इसी क्रम में मायावती ने छत्तीसगढ़ में अजित जोगी की पार्टी के साथ गठंधन कर लिया. उधर अखिलेश यादव ने भी विधानसभा चुनावों में गठबंधन को लेकर कांग्रेस की बेरुखी पर नाराजगी जाहिर की थी.

अब इसका सीधा असर 2019 में होने वाले आम चुनावों में पड़ता दिख रहा है. उत्तर प्रदेश के सियासी जानकारों का मानना है कि फिलहाल यूपी में बीजेपी के खिलाफ गठबंधन की जो तस्वीर उभर कर सामने आ रही हैं, उसमें सपा और बसपा के साथ राष्ट्रीय लोकदल एकजुट हैं. वहीं कांग्रेस जो यूपी में चौथे नंबर की पार्टी है, उसे इन दोनों प्रमुख दलों की तरफ से कोई तरजीह मिलती नहीं दिख रही है.

ऐसे में अब महागठबंधन को लेकर कांग्रेस की बैठक में बसपा सुप्रीमो मायावती और अखिलेश के शामिल होने पर संशय ​खड़ा होता दिख रहा है. हालांकि दोनों ही पार्टियों के नेता इस विषय में कुछ भी कहने से बचते दिख रहे हैं. उनका बस यही कहना है कि इस विषय में पार्टी हाईकमान ही कोई निर्णय लेंगे.

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