...वो गेस्ट हाउस कांड जिसे 'भुलाकर' आज मंच साझा करेंगे माया-मुलायम

News18 Uttar Pradesh
Updated: April 19, 2019, 10:44 AM IST
...वो गेस्ट हाउस कांड जिसे 'भुलाकर' आज मंच साझा करेंगे माया-मुलायम
जानिए क्या है गेस्ट हाउस कांड

मायावती के जीवन पर लिखी गई अजय बोस की किताब में ‘गेस्ट हाउस कांड’ का तफ्तीश के साथ जिक्र किया गया है. बोस की किताब ‘बहनजी’ के मुताबिक उस दिन बसपा के विधायक मायावती को अकेला छोड़कर भाग गए थे, लेकिन बीजेपी विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने उनकी जान बचाई थी.

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लोकसभा चुनाव 2019 में दो चरण का मतदान खत्म हो गया है. इस बीच चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा संरक्षक मुलायम सिंह के मंच साझा करने को लेकर है. दरअसल आज (19 अप्रैल) दोनों सियासी सूरमा मैनपुरी में एक मंच पर आएंगे. उत्तर प्रदेश की राजनीति में ये मौका ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि 24 साल पहले स्टेट गेस्ट हाउस कांड के बाद दोनों नेताओं की दुश्मनी के चर्चे ही सियासत के केंद्र में रहे.

दरअसल, 2 जून 1995 को राजधानी लखनऊ के मीराबाई रोड स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में हुई घटना देश की राजनीति के लिए किसी कलंक से कम नहीं थी. उस दिन बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ न सिर्फ मारपीट हुई बल्कि उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए थे. मायावती के जीवन पर लिखी गई अजय बोस की किताब में ‘गेस्ट हाउस कांड’ का तफ्तीश के साथ जिक्र किया गया है. बोस की किताब ‘बहनजी’ के मुताबिक, उस दिन बसपा के विधायक मायावती को अकेला छोड़कर भाग गए थे, लेकिन बीजेपी विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने उनकी जान बचाई थी.

दरअसल, बाबरी विध्वंस के बाद 1993 में यूपी की सियासत में गठबंधन की नई पटकथा लिखी गई. सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और बसपा अध्यक्ष कांशीराम ने बीजेपी को रोकने के लिए गठबंधन किया. जनता ने बहुमत भी दिया. मुलायम सिंह के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनी. इसके बाद 2 जून 1995 को एक रैली में मायावती ने सपा से गठबंधन वापसी की घोषणा कर दी. अचानक हुई इस घोषणा से मुलायम सरकार अल्पमत में आ गई.



उसके बाद राज्य सरकार के गेस्ट हाउस में सपा कार्यकर्ताओं की उन्मादी भीड़ ने जो किया, वह यूपी के सियासी इतिहास में किसी बदनुमा दाग से कम नहीं था. किताब 'बहनजी' के मुताबिक भीड़ एक दलित महिला नेता को भद्दी-भद्दी गालियां दे रही थी. यह भीड़ उनकी आबरू लूटने पर आमादा थी. उस दिन गेस्ट हाउस में क्या हुआ था, यह आज भी लोगों के लिए कौतुहल का विषय है.

अजय बोस की किताब के मुताबिक, सरकार अल्पमत में आने के बाद सपा नेता बहुमत का जुगाड़ बैठाने में जुट गए. उस वक्त मायावती मीराबाई रोड स्थित गेस्ट हाउस के कमरा नंबर-1 में ठहरी हुई थीं. कहा जाता है कि बसपा विधायकों का जबरन समर्थन लेने के लिए सपा कार्यकर्ताओं की भीड़ ने गेस्ट हाउस पर हमला किया.


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किताब के मुताबिक गाली-गलौज करते और शोर मचाते सपा समर्थकों ने गेस्ट हाउस पर धावा बोल दिया. सपा नेताओं ने मायावती को कमरे में बंद कर उनके साथ मारपीट की. उनके कपड़े फाड़ दिए. इन सब के बीच वहां मौजूद बसपा विधायक और नेता मायावती को बचाने की जगह फरार हो गए. ऐसे में मायावती की जान बचाने के लिए बीजेपी विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी पहुंचे. द्विवेदी ने दरवाजा तोड़कर मायावती को सुरक्षित बाहर निकाला.

अजय बोस के मुताबिक सपा समर्थकों ने पांच बसपा विधायकों का अपहरण कर जबरन सादे कागज़ पर हस्ताक्षर करवाए. तत्कालीन एसएसपी और मौजूदा डीजीपी ओपी सिंह पर घटना के दौरान एक्शन न लेने का भी आरोप लगा था.



किताब के मुताबिक जिस समय बसपा विधायकों को दबोचा जा रहा था, उस वक्त कमरा नंबर-1 के बहार सपा समर्थक मायावती को जातिसूचक गालियां देते हुए मारने की धमकी दे रहे थे और दरवाजा पीट रहे थे. कुछ बसपा विधायकों का कहना था कि पूरे एक घंटे तक चले इस पागलपन के दौरान वहां मौजूद पुलिस और अधिकारी मूकदर्शक बने रहे.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमला के के ठीक बाद संदिग्ध परिस्थितियों में गेस्ट हाउस की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई. इस सबके बीच पुलिस अधीक्षक राजीव रंजन और तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट ने बहादुरी का परिचय देते हुए मोर्चा संभाला और गेस्ट हाउस से उन लोगों को बाहर किया जो विधायक नहीं थे. इसके लिए लाठीचार्ज का भी सहारा लेना पड़ा. हालांकि, सरकार की तरफ से विधायकों पर लाठीचार्ज के आदेश नहीं दिए गए थे.

राज्यपाल ऑफिस, केंद्र सरकार और बीजेपी विधायकों के दखल के बाद मामला काबू में आया. हालांकि सपा विधायकों पर लाठीचार्ज के लिए रात 11 बजे जिला मजिस्ट्रेट को ट्रान्सफर भी कर दिया गया.

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First published: April 19, 2019, 9:40 AM IST
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