आजादी के बाद से अब तक सबसे अधिक फांसी यूपी में दी गई, पढ़कर जानिए कितनों को मिली यह सजा
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आजादी के बाद से अब तक सबसे अधिक फांसी यूपी में दी गई, पढ़कर जानिए कितनों को मिली यह सजा
देश में लंबे समय बाद फांसी की सज़ा हुई है. पूरे देश में यूपी (UP) ऐसा राज्य है जहां अभी तक सबसे ज्यादा फांसियां दी गईं हैं.

हालांकि निर्भया कांड (Nirbhaya Case) का यूपी (UP) से कोई लेना-देना नहीं है. फिर भी यह मौका है यह जानने का कि यूपी में फांसी की सज़ा का क्या इतिहास रहा है. पूरे देश में जितने लोगों को आजादी के बाद से अभी तक फांसी दी गई है, उसमें सबसे पहला नंबर यूपी का ही है.

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लखनऊ. निर्भया के दोषियों को फांसी दे दी गई है. देश में लंबे समय बाद फांसी की सज़ा हुई है. पूरे देश में यूपी (UP) ऐसा राज्य है जहां अभी तक सबसे ज्यादा फांसियां दी गईं हैं. देश को आजादी मिलने के बाद से अभी तक यूपी में कुल 390 गुनहगारों को फांसी (Hanging) दी गई है. ये आंकड़ा पूरे देश में सबसे ज्यादा है. हालांकि निर्भया कांड का यूपी से कोई लेना-देना नहीं है. फिर भी यह मौका है यह जानने का कि यूपी में फांसी की सज़ा का क्या इतिहास रहा है. पूरे देश में जितने लोगों को आजादी के बाद से अभी तक फांसी दी गई है, उसमें सबसे पहला नंबर यूपी का ही है.

29 साल पहले यूपी में हुई थी आखिरी फांसी
आज से 29 साल पहले यूपी में किसी गुनहगार को आखिरी बार फांसी दी गई थी. आगरा की जिला जेल में बुलंदशहर के रहने वाले जुम्मन को 2 फरवरी 1991 को फांसी दी गयी थी. जुम्मन रोजी-रोटी की तलाश में बुलंदशहर से फिरोजाबाद आ गया था. वह फिरोज़ाबाद में रिक्शा चलाता था. उसने एक अबोध बच्ची का बलात्कार करने के बाद हत्या कर दी थी. उसकी दया याचिका को सुप्रीम कोर्ट और तत्कालीन राष्ट्रपति आर वेंकट रमण ने खारिज कर दी थी.

आजादी के बाद से यूपी में 390 लोगों को दी जा चुकी है फांसी
1945 में देश को आजादी मिलने के बाद से अभी तक यूपी में कुल 390 गुनहगारों को फांसी दी गई है. यह आंकड़ा पूरे देश में सबसे ज्यादा है. ज्यादातर राज्यों में दी गई फांसी का आंकड़ा सैकड़ों में नहीं बल्कि दहाई में ही है. यूपी और हरियाणा में ही यह दहाई में है. हरियाणा में अब तक 103 अपराधियों को फांसी दी गई है.



यूपी की सिर्फ 8 जेलों में है फांसी के इंतजाम
ये तथ्य भी अपने आप में अनोखा है. अमूमन यह माना जाता है कि सभी जेलों में फांसी की सज़ा दी जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है. यूपी के 75 जिलों में सिर्फ 8 ही ऐसी जेले हैं, जहां फांसी की सजा दी जा सकती है. ये जेले हैं - प्रयागराज नैनी सेंट्रल जेल, फैजाबाद, आगरा, गोण्डा, गोरखपुर, बरेली, फतेहगढ़ और मेरठ. इन्हीं जेलों में फांसी घर बनाए गए हैं. इनमें से मेरठ की जेल का फांसी घर ही दुरुस्त है, क्योंकि वहां निठारी कांड के दोषी सुरेन्द्र कोली को फांसी दी जानी थी. बाकी फांसी घर बेहद जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़े हैं.

सिर्फ मथुरा की जेल में महिलाओं को फांसी देने की व्यवस्था
पूरे यूपी में सिर्फ मथुरा की जेल ही ऐसी है, जहां किसी महिला गुनहगार को फांसी दी जा सकती है. हालांकि आजादी के बाद से अभी तक यूपी में ऐसी कोई वारदात नहीं हुई है, जिसमें किसी महिला को फांसी देनी पड़ी हो. अमरोहा की शबनम को सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा हो चुकी है लेकिन उसने इसे रद्द करने के लिए पुनर्विचार याचिका डाली है. इस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना बाकी है. यदि फांसी की सजा बरकरार रहती है और फांसी देने की नौबत आती है तो शबनम को मथुरा की जेल ही लाया जाएगा. शबनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के 7 लोगों की हत्या कर दी थी.

इन सनसनीखेज घटनाओं में मिल चुकी है फांसी
मुजफ्फरनगर के खतौली में 16 दिसम्बर 1975 को सेंट्रल बैंक में डकैती डाली गई थी. 7 लाख रुपए हथियारों के दम पर लूटे गये थे. इस केस में 4 दोषियों धर्मपाल, उत्तम, महिपाल और नरपत को 1983 में फांसी दी गयी थी. इसके अलावा रायबरेली के बाल हत्याकांड वाले मामले में भी फांसी की सजा सुनाई गई थी. एक जेल अधिकारी ने अपने स्मृति के आधार पर बताया कि 3 सगे भाइयों ने मिलकर सात बच्चों की हत्या कर दी थी. तीनों भाइयों को 1989 में प्रयागराज की नैनी जेल में फांसी की सजा दी गई थी.

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