Budget 2019: कांग्रेस ने कहा- यह बजट कम, भाजपा का 2019 का मेनिफेस्टो ज्यादा है

यूपी कांग्रेस के प्रवक्ता अंशु अवस्थी (फाइल फोटो).
यूपी कांग्रेस के प्रवक्ता अंशु अवस्थी (फाइल फोटो).

कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार को किसानों से कोई मतलब नहीं है. नौजवानों से कोई मतलब नहीं है. महिलाओं के सशक्तिकरण से कोई मतलब नहीं है. सिर्फ और सिर्फ उद्योगपति कैसे लाभान्वित हो इसी की चिंता मोदी को है, लेकिन लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन है.

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यूपी कांग्रेस के प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने कहा कि यह बजट कम, भाजपा का 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए मेनिफेस्टो ज्यादा है और उसमें भी सच्चाई निकल कर आ रही है कि मोदी सरकार को किसानों से कोई मतलब नहीं है. नौजवानों से कोई मतलब नहीं है. महिलाओं के सशक्तिकरण से कोई मतलब नहीं है. सिर्फ और सिर्फ उद्योगपति कैसे लाभान्वित हो इसी की चिंता मोदी को है, लेकिन लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन है. इस सरकार के पास 80-90 दिन की गिनी-चुनी सांसें बची हैं. जनता आने वाले चुनाव में BJP को ठिकाने लगाने जा रही है, जिसकी शुरुआत 5 राज्यों के सेमीफाइनल चुनाव में कांग्रेस की जीत से शुरू हो चुकी है.

अंशु अवस्थी ने कहा कि बीजेपी सरकार ने 2019 का बजट पेश करके यह साबित कर दिया है कि उनके पास देश के लिए कोई ठोस ब्लूप्रिंट ना था और ना ही वे 5 साल में विकास की कोई ठोस रणनीति बना पाए. 2019 का बजट लोकलुभावन और प्रथम दृष्टया तो सुंदर है लेकिन अंदर से खोखला है. 45 साल में बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा है. स्किल इंडिया. स्टैंड अप इंडिया. मेक इन इंडिया जैसे नारे सिर्फ कागजी ही रह गए.


कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार अपनी उपलब्धियों के दावे तो करती है, आंकड़े भी देती है लेकिन जब नौजवानों के रोजगार के बारे में बात की जाती है तो उस बारे में कोई आंकड़े नहीं देती. बजट के समय जो आंकड़े निकल कर सामने आए हैं वे बहुत ही दुखद हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने किसानों को लेकर हमेशा सरकार से मांग की है कि किसान कर्ज में डूबा है, उसका कर्ज माफ करो. केंद्र सरकार ने 6000 रुपए हर साल किसानों को दिए हैं. उसका मतलब यह है कि यदि परिवार में 5 सदस्य हैं तो प्रत्येक व्यक्ति के हिस्से में रोज 3:33 रुपए आएंगे, यह बहुत ही बड़ा धोखा है.



अंशु अवस्थी ने कहा कि हम अपने वचन को लेकर प्रतिबद्ध हैं कि 2019 में कांग्रेस की सरकार बनने पर 10 दिन के अंदर किसानों का पूरा कर्ज माफ होगा. इस बजट में सरकार ने यह साबित कर दिया कि वह आम आदमी के साथ नहीं बल्कि उद्योगपतियों के साथ है. आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 5 लाख की गई है लेकिन रोजगार और आय के सवाल पर सरकार बैकफुट पर है.

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