यूपी सरकार के यमुना एक्सप्रेसवे का केंद्र से कोई लेना-देना नहीं: नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ बस हादसा दुर्भाग्यपूर्ण है. इस हाइवे का निर्माण यूपी सरकार ने कराया है और इस हाइवे का भारत सरकार से कोई लेना-देना नहीं है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 8, 2019, 7:58 PM IST
यूपी सरकार के यमुना एक्सप्रेसवे का केंद्र से कोई लेना-देना नहीं: नितिन गडकरी
यूपी सरकार के यमुना एक्सप्रेसवे का केंद्र से कोई लेना-देना नहीं: नितिन गडकरी. (फाइल फोटो)
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Updated: July 8, 2019, 7:58 PM IST
यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए सड़क हादसे में 29 लोगों की मौत हो चुकी है. मरने वालों में एक बच्चा और एक महिला भी शामिल है. बताया जा रहा है कि ड्राइवर को झपकी आने के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ है. घटना के बाद बात सामने आ रही है कि अगर रोडवेज के अधिकारी रविवार की रात ज़रा भी चौंकन्ने होते तो 29 लोगों की जान नहीं जाती. सब जानते हुए भी लखनऊ से ही बस में एक ड्राइवर भेजा गया था. जबकि नियमानुसार एक ड्राइवर एक दिन में सिर्फ 400 किमी ही बस चला सकता है. इसी बात को दुर्घटना का बड़ा कारण माना जा रहा है.

उधर इस हादसे पर केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ बस हादसा दुर्भाग्यपूर्ण है. इस हाइवे का निर्माण यूपी सरकार ने कराया है और इस हाइवे का भारत सरकार से कोई लेना-देना नहीं है. इस हाइवे का नियंत्रण नोएडा प्राधिकरण के पास है. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुर्घटना की जांच कराने के लिए एक टीम का गठन कर दिया है.



टायर के मानकों के बारे में जागरूक नहीं हैं

नितिन गडकरी ने आगे कहा कि हम भारत में बने टायर के मानकों के बारे में जागरूक नहीं हैं. अमेरिका और पश्चिमी देशों में जिस रबड़ से टायर बनाई जाता है, उसमें सिलिकॉन भरी जाती है. टायर में नाइट्रोजन भी भरी जाती है जिससे टायर ठंडा रहे. हम इन मानकों को अनिवार्य करने के बारे में विचार कर रहे हैं.



400 किमी पूरे होते ही दूसरे ड्राइवर को दे दी जाती है बस
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यूपी रोडवेज में सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक रहे रिटायर्ड ओपी मिश्रा का इस बारे में कहना है, “दिन हो या रात एक ड्राइवर 400 किमी ही बस चलाएगा. 400 किमी पूरे होते ही दूसरे ड्राइवर को बस दे दी जाएगी. लेकिन इस बस में एक ही ड्राइवर बताया जा रहा है. जबकि लखनऊ से आनन्द विहार, दिल्ली की दूरी 500 किमी से अधिक है. बावजूद इसके डिपो से बस पर एक ही ड्राइवर भेजा गया.”

बाद में नियम लागू हुआ कि बस में दो ड्राइवर जाएंगे
यूपी रोडवेज में ड्राइवर रहे रिटायर्ड महबूब अली बताते हैं, “लगभग वर्ष 1982 तक लम्बी दूरी की बसों में ड्राइवर और कंडक्टर रास्ते में ही बदले जाते थे. जैसे ही ड्राइवर अपनी दूरी पूरी कर लेता था तो रास्ते में ही दूसरा ड्राइवर उसकी जगह पर बस संभाल लेता था. लेकिन इस व्यवस्था को बंद कर दिया गया. बाद में यह नियम लागू हुआ कि बस में दो ड्राइवर जाएंगे. एक सोएगा और दूसरा बस चलाएगा. लेकिन इससे ड्राइवर की नींद तो पूरी हो जाती थी, लेकिन सफर की थकान नहीं मिटती थी. तो हालत ज्यों की त्यों रहती थी, लेकिन ये व्यवस्था भी बंद कर दी गई.”

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First published: July 8, 2019, 6:53 PM IST
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