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बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए केंद्र में कर्नाटक मॉडल दोहराने की तैयारी?

लखनऊ में अखिलेश से मिले चंद्रबाबू नायडू

लखनऊ में अखिलेश से मिले चंद्रबाबू नायडू

दरअसल गैर-बीजेपी मोर्चे के गठन के लिए सक्रिय हुए चंद्रबाबू नायडू कर्नाटक मॉडल की तर्ज पर केंद्र में नई सरकार बनाने की कवायद में जुटे हैं.

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आखिरी चरण के मतदान और लोकसभा चुनाव के परिणाम आने से पहले जोड़-तोड़ की कवायद शुरू हो गई है. केंद्र में बीजेपी को सत्ता से दूर रखने और गठबंधन की सरकार बनाने की अगुवाई आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू कर रहे हैं. इसी क्रम में चंद्रबाबू नायडू ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मिलने के बाद रविवार शाम लखनऊ में बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की. इतना ही नहीं उन्होंने 23 मई को यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से दिल्ली में आयोजित बैठक में शामिल होने का न्योता भी दिया.

दरअसल गैर-बीजेपी मोर्चे के गठन के लिए सक्रिय हुए चंद्रबाबू नायडू कर्नाटक मॉडल की तर्ज पर केंद्र में नई सरकार बनाने की कवायद में जुटे हैं. अगर 23 मई को आने वाले लोकसभा चुनाव परिणाम में ऐसी स्थिति बनती है कि किसी को भी पूर्ण बहुमत नहीं मिलता तो गठबंधन की सरकार बनाई जाए. इसके लिए कर्नाटक के मॉडल को भी अपनाया जा सकता है, जहां बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, लेकिन कांग्रेस ने तीसरे नंबर की पार्टी जेडीएस को मुख्यमंत्री पद का ऑफर देकर सरकार बना ली.

न्यूज18 के एग्जीक्यूटिव एडिटर अमिताभ अग्निहोत्री कहते हैं कि चंद्रबाबू नायडू इस खेल में माहिर हैं. वे अटल बिहारी वाजपेयी के लिए भी इस तरह की गठजोड़ कर चुके हैं. 1996 में 13 दिन की सरकार से लेकर 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की पूर्णकालिक सरकार के लिए वह यह काम कर चुके हैं. दूसरी ख़ास बात यह है कि चंद्रबाबू नायडू खुद के लिए कोई शर्त नहीं रखते. लिहाजा वे सभी दलों को एक साथ लाने के लिए एक अहम कड़ी हो सकते हैं.

अगर त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति बनती है तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि कोई क्षेत्रीय दल का नेता प्रधानमंत्री पद का दावेदार हो और कांग्रेस समेत सभी अन्य विपक्षी दल उसे समर्थन दे दें. इसी जोड़-तोड़ में चंद्रबाबू नायडू लगे हुए हैं.यही वजह है कि वे एक दिन में कई दलों के नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं. इतना ही नहीं सोनिया द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल होने के लिए वे अखिलेश और माया को मनाने भी लखनऊ पहुंचे थे. गौरतलब है कि 23 को दिल्ली में बुलाई गई बैठक में शामिल होने से अखिलेश और मायावती इनकार कर चुके हैं.

उधर कांग्रेस ने भी दूसरे दलों के नेताओं से बातचीत करने के लिए अपने पांच वरिष्ठ नेताओं का कोर ग्रुप बनाया है. इस ग्रुप में पीचिदंबरम, गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, कमलनाथ और अशोक गहलोत को शामिल किया गया है. सभी को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है. अशोक गहलोत और अहमद पटेल की जिम्मेदारी पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को मानाने की है. डीएमके अध्यक्ष स्टालिन और वाईएसआर कांग्रेस के जगनमोहन रेड्डी के मानाने की जिम्मेदारी पी चिदंबरम के पास है. ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को साधने के लिए उनके स्कूल में मित्र रहे कमलनाथ को लगाया गया है. कमलनाथ ही तेलंगाना के मुख्यमंत्री चद्रशेखर राव से बात करेंगे.

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