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UP राज्य भंडारण निगम में 1197 श्रमिकों को फर्जी ढंग से नियमित कराने की कोशिश, सीतापुर, फतेहपुर में FIR

उत्तर प्रदेश् राज्य भंडारण निगम में फर्जीवाड़ा पकड़ में आया है.

उत्तर प्रदेश् राज्य भंडारण निगम में फर्जीवाड़ा पकड़ में आया है.

Lucknow News: उत्तर प्रदेश के सहाकारिता विभाग में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है. यहां यूपी राज्य भंडारण निगम में करीब 1200 मजदूरों को नियमित कराने की कोशिश में फर्जी लेटर का सहारा लिया गया. मामले में एफआईआर के आदेश हो गए हैं.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के सहकारिता विभाग (Cooperative Department) में घोटालों की कहानी समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है. सपा शासनकाल में 2012 से 2017 में 5127 पदों पर बड़ी तादाद में हुई भर्तियों की एसआईटी जांच के बीच अब उ.प्र. राज्य भंडारण निगम में फर्जी शासनादेश के जरिए बड़ी संख्या में श्रमिकों को नियमित कराने की कोशिश का मामला पकड़ में आया है. मामला तूल पकड़ता इससे पहले ही निगम ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ मुकदमे दर्ज करा दिए हैं. सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा और प्रबंध निदेशक श्रीकांत गोस्वामी ने इस पूरे प्रकरण की जानकारी दी है.

सहकारिता विभाग के अनु सचिव शैलेंद्र कुमार के नाम से जारी फर्जी शासकीय पत्र के हवाले से उ.प्र. राज्य भंडारण निगम के गोदामों पर 1197 श्रमिकों के नियमित कराने की कोशिश का बड़ा खेल पकड़ में आया है. अपर मुख्य सचिव (गृह) कै कैंप कार्यालय से यह पत्र मिलने के बाद सहकारिता विभाग की संस्था राज्य भंडारण निगम के अधिकारी हरकत में आए. इस मामले में सीतापुर और फतेहपुर जिले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है.

बीते 18 जनवरी को अपर मुख्य सचिव (गृह) के कैंप कार्यालय से भंडारण निगम के प्रबंध निदेशक श्रीकांत गोस्वामी के निजी सचिव को शासन का पत्र मिला. सहकारिता विभाग से जारी इस पत्र में एसके पांडेय राष्ट्रीय महामंत्री आल इंडिया वेयर हाउसिंग कारपोरेशन इंप्लाइज यूनियन लखनऊ के दो पत्रों के क्रम में जिलाधिकारी सीतापुर और फतेहपुर को भंडारण निगम में कार्यरत श्रमिकों को तत्काल नियमितिकरण करने का उल्लेख है. इसके बाद 19 जनवरी को निगम को एसके पांडेय के दोनों पत्र तथा शासन से जारी पत्र के साथ 1197 श्रमिकों की सूची संलग्न कर आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजा गया. इस सूची में फतेहपुर पक्का तालाब डिपो में 410, जहानाबाद में 67, रामकोट में 360 तथा तथा नेरीकला में 360 श्रमिकों के नाम हैं.



अनु सचिव और उप सचिव के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए
भंडारण निगम ने शासन के पत्र को जारी करने वाले अधिकारी सहकारिता अनुभाग एक के अनु सचिव शैलेंद्र कुमार के पूर्व में के पत्रों से हस्ताक्षर मिलाया गया तो हस्ताक्षर नहीं मिले. इसके बाद निगम को 27 जनवरी को शासन का एक और पत्र मिला. जिसमें जारीकर्ता अधिकारी शिवाजी सिंह उप सचिव सहकारिता अनुभाग एक का हस्ताक्षर था, इनके पूर्व के पत्रों से हस्ताक्षर मिलाया या तो यह भी नहीं मिला. फर्जीवाड़ा सामने आते ही निगम प्रबंधन ने सतर्कता दिखाई. क्षेत्रीय प्रबंधक लखनऊ और प्रयागराज को इस मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कराते हुए वैधानिक कार्यवाही के निर्देश दिए गए.

फर्जी पत्र का गिरोह सहकारिता विभाग में!

सूत्रों की माने तो सहकारिता विभाग में माननीयों और अधिकारियों के फ़र्ज़ी पत्रों को जारी कर बड़े स्तर पर धांधली की जा रही है. मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात ओएसडी आरएन सिंह ने अपर मुख्य सचिव सहकारिता एमवीएस रामी रेड्डी को 12 जनवरी को पत्र लिखकर उनके कार्यालय में तैनात बहादुर सिंह द्वारा सांसद मोहनलालगंज कौशल किशोर के फ़र्ज़ी हस्ताक्षर के पत्र को मुख्यमंत्री कार्यालय में प्राप्त कराया जाना बताया है. मामले में जांच कर 2 सप्ताह में आख्या भी मांगी गई है. मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जांच में दिनांक 2 दिसंबर 2020 के सांसद मोहनलालगंज के शिकायती पत्र को सही पाया गया है.

शिकायती पत्र में सांसद ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपर मुख्य सचिव सहकारिता द्वारा अपने अधीनस्थों के साथ मिलकर शासकीय धन का दुरुपयोग, व्यापक स्तर पर अनियमितता  कर भयंकर स्तर पर भ्रष्टाचार की 16 बिंदुओं पर साक्ष्य सहित शिकायत की गई है. सांसद द्वारा उच्च स्तरीय जांचोपरांत भ्रष्ट अधिकारियों को हटाते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करने की बात कही गई है.
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