12 महीने की योगी सरकार में मानवाधिकार उल्लंघन के 14 नोटिस!

पिछले साल भर में गाजियाबाद फर्जी इनकाउंटर, नोएडा फर्जी एनकाउंटर, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत से लेकर एनटीपीसी हादसे और झांसी मेडिकल कॉलेज में कटे पैर को तकिया बनाने मामले में एनएचआरसी ने यूपी सरकार को नोटिस दिया है.

Ajayendra Rajan | News18Hindi
Updated: March 20, 2018, 12:44 PM IST
12 महीने की योगी सरकार में मानवाधिकार उल्लंघन के 14 नोटिस!
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Ajayendra Rajan
Ajayendra Rajan | News18Hindi
Updated: March 20, 2018, 12:44 PM IST
एक साल पूरे कर चुकी योगी सरकार ने भले ही कई मोर्चों पर बेहतरीन प्रदर्शन की बात कह रही हो लेकिन मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में सरकार का प्रदर्शन बेहतर नहीं कहा जा सकता. स्थिति ये है कि औसतन हर महीने मानवाधिकार उल्लंघन की एक नोटिस सरकार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग थमा दे रहा है. पिछले 12 महीने में नोटिसों की ये संख्या 14 तक पहुंच गई है. इनमें फर्जी एनकाउंटर से लेकर अस्पतालों में अव्यवस्था और पुलिस के मानवीय मूल्यों को ताक पर रखने के कई किस्से शामिल हैं.

हालांकि फर्जी एनकाउंटर के विषय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि प्रदेश में कोई एक भी एनकाउंटर फर्जी साबित नहीं कर सकता. एक साल में 1250 से अधिक एनकाउंटर हुए हैं. सीएम ने कहा कि कोई अपराधी गोली चलाएगा, तो पुलिस हाथ बांधकर बैठी नहीं रहेगी. पुलिस को गोली का जवाब गोली से देने का अधिकार है. सीएम योगी का दावा है कि कानून व्यवस्था के मामले में मार्च 2017 से पहले की स्थिति और मार्च 2018 के हालात में काफी अंतर आया है.

पिछले तकरीबन साल भर में गाजियाबाद फर्जी इनकाउंटर, नोएडा फर्जी एनकाउंटर, बीएचयू छेड़छाड़, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत से लेकर रायबरेली में एनटीपीसी हादसे, उन्नाव में टॉर्च की रोशनी में आंख के आॅपरेशन और झांसी मेडिकल कॉलेज में कटे पैर को तकिया बनाने मामले में एनएचआरसी ने यूपी सरकार को नोटिस दिया है. बलरामपुर के एक मामले में तो आयोग ने पुलिस को नवविवाहित जोड़े पर बेवजह उत्पीड़न और बलात्कार तक का दोषी पाया है.



इन नोटिसों का क्या असर होता है. इस पर जानकार कहते हैं कि सरकार मानवाधिकार आयोग की नोटिसों को गंभीरता से नहीं लेती. बस निलंबन और जांच कमेटी बिठाने की कार्रवाई दिखाकर खानापूर्ति कर देती हैं. सरकार को इस पर गंभीर विचार करने की जरूरत है क्योंकि मानवाधिकार आयोग की नोटिसें कहीं न कहीं बेहतर समाज बनाने की कोशिश हैं.

मानवता को शर्मसार करती एक घटना इसी साल जनवरी में घटी. सहारनपुर में दो नाबालिगों की बाइक अनियंत्रित होकर नाले में जा गिरी थी. जिसके बाद मौके पर मौजूद लोगों ने दोनों युवकों को नाले से निकाला. दोनों के सिर में चोट थी और खून बह रहा था. लोगों ने मौके पर मौजूद यूपी 100 के सिपाहियों से घायलों को अस्पताल पहुंचाने की विनती की, लेकिन उन्होंने गाड़ी गंदी होने का हवाला देते हुए अस्पताल ले जाने से इनकार कर दिया. लोग गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन सिपाहियों का दिल नहीं पसीजा और वे युवकों को अस्पताल नहीं ले गए. इसके बाद स्थानीय लोगों ने दोनों को टैम्पो से अस्पताल पहुंचाया. लेकिन अस्पताल पहुंचने में हुई देरी से दोनों युवकों ने दम तोड़ दिया. पुलिसकर्मियों पर गाज जरूर गिरी. लेकिन इस घटना ने उजागर कर दिया कि सड़क पर मातहत किस तरह का बर्ताव एक आम इंसान के साथ कर रहे हैं.

उधर बलरामपुर के एक मामले में आयोग ने जांच में पाया कि बलरामपुर में एक युवा जोड़े ने मुंबई भागकर शादी की. ​लड़की के पिता ने मामले में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद नवविवाहित जोड़े को बलरामपुर की मथुरा पुलिस चौकी पर लाया गया. 12 से 13 अगस्त तक बिना किसी कानून का पालन किए दोनों को अलग-अलग लॉकअप में बंद रखा गया. दरोगा ने लड़की के साथ बलात्कार किया. जब लड़की ने इसकी शिकायत की तो भी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई.

पुलिस मामले में नाबालिग की शादी के तहत मामले की जांच करती रही, बावजूद इसके कि जिला अदालत ने दोनों को बालिग पाया और उसे अपने पति के साथ रहने का हक दिया. यही नहीं पुलिस ने लड़के पर बलात्कार का मुकदमा भी कायम कर दिया और उसके पिता को बेवजह फंसाया. यही नहीं लड़की पर गलत आरोप लगाने के लिए दबाव बनाया.
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उधर मानवाधिकार आयोग की नोटिसों पर बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कहते हैं कि जहां तक एनकाउंटर पर नोटिसों की बात है तो यह एक रूटीन प्रक्रिया है. किसी भी एनकाउंटर पर सवाल उठते हैं तो मानवाधिकार आयोग का ​का दायित्व होता है कि वह नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट करने को कहे. यूपी सरकार ने हर नोटिस पर विधि पूर्वक जवाब दिया है.

वहीं जहां तक स्वास्थ्य क्षेत्र की बात है तो उत्तर प्रदेश में काफी समय से इस स्वास्थ्य विभाग के हाल बदहाल रहे हैं. पहले इस विभाग को सिर्फ कमाई का जरिया बना लिया गया था. एनआरएचएम घोटाला, दो सीएमओ की हत्या इसका उदाहरण है. यूपी सरकार अब प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को तेजी से दुरुस्त करने में लगी है. आगे इस तरह की नोटिसें न आएं इस पर तेजी से प्रयास चल रहा है.

मानवाधिकार पर उठते सवाल

10 अप्रैल 2017

एनएचआरसी ने गौतमबुद्धनगर के डीएम और एसपी को नोटिस भेजा. आरोप था कि पुसि ने ग्रेटर नोएडा में एनएसजी सोसाइटी में पुलिस ने जांच के नाम पर झूठे आरोप में अफ्रीकी नागरिकों का उत्पीड़न किया.

14 अगस्त 2017

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कई बच्चों की मौत में एनएचआरसी ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया. नोटिस में आयोग ने मुख्य सचिव से मामले की डिटेल रिपोर्ट देने के साथ ही क्या—क्या उपाय किए गए इसकी भी जानकारी मांगी.

26 सितंबर 2017

बीएचयू में छेड़छाड़ के मामले में एनएचआरसी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए यूपी के मुख्य सचिव, डीजीपी, बीएचयू के वीसी को नोटिस जारी किया और उनसे डिटेल रिपोर्ट तलब की.

5 अक्टूबर 2017

गौतमबुद्धनगर के ग्रेटर नोएडा में गैंगस्टर सुमित गुर्जर का इनकाउंटर हुआ. मामले में यूपी पुलिस पर आरोप लगे कि ये इनकाउंटर फर्जी था, सुमित की हत्या की गई है. इसके बाद मानवाधिकार आयोग ने यूपी के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जलब तलब किया.

2 नवंबर 2017

एनटीपीसी के ऊंचाहर प्लांट में ब्वॉयलर फटा. इस दुर्घटना में कई लोगों की मौत हो गई व दर्जनों घायल हुए. मामले मे मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया.

22 नवंबर 2017

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपराधियों के इनकाउंटर पर दिए गए बयान पर सवाल उठाए. आयोग ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट में ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार कानून व्यवस्था में सुधार के लिए पुलिस से इनकाउंटर में हत्याओं को बढ़ावा दे रही है.

14 दिसंबर 2017

नोएडा के बाल सुधार गृह में अमानवीय उत्पीड़न मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया. आयोग ने इस संबंध में डीआईजी इन्वेस्टिगेशन की अगुवाई में एक टीम गठित करने का फैसला किया और मौके पर जाकर जांच कर आयोग के समक्ष रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया.

27 दिसंबर 2017

उन्नाव के एक अस्पताल में टॉर्च की रोशनी में आंख के दर्जनों आॅपरेशन करने का मामला सामने आया. मामले में आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया. इसमें मुख्य सचिव से 6 बिंदुओं पर जवाब तलब किया गया. जिसमें आॅपरेशन के बाद प्रत्येक व्यक्ति की आंख सही हुई या नहीं उसकी जानकारी भी तलब की गई.

29 दिसंबर 2017

बलरामपुर में एक शादी शुदा प्रेमी जोड़े पर अत्याचार के लिए मानवाधिकार आयोग ने पुलिस को अपनी जांच में दोषी पाया. इस संबंध में यूपी सरकार को नोटिस जारी किया.

3 जनवरी 2018

बाराबंकी में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को वॉर्ड ब्वॉय के सहारे चलाने के मामले में आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया. पता चला कि इस अस्पताल में वॉर्ड ब्वॉय डॉक्टर और फार्मासिस्ट दोनों का काम कर रहा है.

22 जनवरी 2018

सहारनपुर में हादसे में दो घायलों को यूपी-100 गाड़ी के सिपाहियों ने इसलिए अस्पताल नहीं पहुंचाया क्योंकि गाड़ी गंदी हो जाती. जिसकी वजह से समय पर इलाज नहीं मिलने से दोनों ही नाबालिगों की मौत हो गई. मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए योगी सरकार को नोटिस जारी किया.

5 फरवरी 2018

नोएडा में एक दरोगा ने फर्जी एनकाउंटर दिखाते हुए 25 साल के एक युवक को गोली मार दी. मामले में मीडिया में खबर आई तो आला अफसरों ने फौरन दरोगा को गिरफ्तार करने का फरमान जारी किया. पता चला कि व्यक्तिगत दुश्मनी में ये हमला किया गया. मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी सरकार को नोटिस जारी किया. आयोग ने कहा कि ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश में पुलिसकर्मी ताकत का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं.

7 मार्च, 2018

उत्तर प्रदेश की जेलों में बंदियों के एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए यूपी सरकार को नोटिस जारी किया.

12 मार्च, 2018

झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में मरीज का पैर काटकर उसके सिर के नीचे रखने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया. मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए आयोग ने यूपी के मुख्य सचिव से चार सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली है.
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