उन्नाव रेप कांड: पीड़िता को वेंटिलेटर से हटाया तो हालत बिगड़ी, फिर लगाया

पीड़िता की हालत नाजुक है एक बार वेटिलेटर से हटाया गया था लेकिन फिर वेंटिलेटर पर रख दिया गया है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 1, 2019, 6:21 PM IST
उन्नाव रेप कांड: पीड़िता को वेंटिलेटर से हटाया तो हालत बिगड़ी, फिर लगाया
पीड़िता के इलाज के लिए पीजीआई और डॉक्टर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों से भी सलाह ली जा रही है.
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Updated: August 1, 2019, 6:21 PM IST
उन्नाव मामले में ट्रामा सेंटर में भर्ती दोनों मरीजों की हालत स्थिर है. पीड़िता के वकील को तीन से चार बार वेंटिलेटर से हटाकर देखा गया है, उनका इलाज किया जा रहा है. वहीं पीड़िता की हालत नाजुक है एक बार वेंटिलेटर से हटाया गया था लेकिन फिर वेंटिलेटर पर रख दिया गया है. दोनों मरीज कल से बेहोशी हालत में हैं.

दूसरे अस्पताल के डॉक्टरों की भी मदद
पीजीआई और डॉक्टर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों से सलाह ली जा रही है. इन अस्पतालों के डॉक्टर भी मरीज को देख रहे हैं. केजीएमयू के डॉ. संदीप तिवारी ने यह बात बताई है. उन्होंने कहा कि हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें ठीक किया जाए. सीबीआई भी आई थी उन्होंने भी देखा है, हमारे पास सुविधाएं हैं हम इलाज कर रहे हैं. हालांकि वहां मौजूद डॉक्टरों का साफ तौर पर कहना है कि हालत नाजुक है. लगातार मेडिकल बुलेटिन जारी किए जा रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उन्नाव रेप कांड मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को कड़ी फटकार लगाई. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले से जुड़े सभी केस को दिल्ली ट्रांसफर करने का निर्देश दिया. साथ ही कहा कि पीड़िता को सरकार 25 लाख मुआवजा भी दी. इतना ही नहीं पीड़िता की सुरक्षा में सीआरपीएफ को लगाने का भी आदेश दिया.

मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने इस केस की सुनवाई 45 दिनों में पूरी करने का भी निर्देश दिया. बेंच ने निचली अदालत के जज को आदेश दिया कि इस मामले कि सुनवाई रोजाना की जाए और 45 दिन में पूरी की जाए. साथ ही कहा कि इस केस की सुनवाई एक ही जज के द्वारा की जाए. साथ ही शुक्रवार तक पीड़िता को 25 लाख रुपए का मुआवजा भी दिया जाए.

यूपी पुलिस के बार-बार विफल रहने पर CRPF सुरक्षा देने का आदेश
सीजेआई की बेंच ने फटकार लगाते हुए कहा कि यूपी पुलिस की बार-बार विफल हो रही है. पीड़िता, परिवार, गवाह और वकील को सीआरपीएफ की सुरक्षा दी जाए. कोर्ट ने सीबीआई को भी मामले की जांच 7 दिन के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया. साथ ही कहा कि पीड़िता की हालत अब कैसी है? क्या उसे दिल्ली लाया जा सकता है? अगर हां, तो हम आदेश देते हैं कि उसे तुरंत दिल्ली लाया जाए. इसके बाद सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि पीड़िता को शिफ्ट करने की जरूरत नहीं है.
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First published: August 1, 2019, 5:30 PM IST
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