उन्नाव रेप पीड़िता का एक्सीडेंट: परिवार ने लगाए विधायक पर गंभीर आरोप, सीबीआई जांच की मांग

सड़क हादसे के बाद जहां एक ओर विपक्षी पार्टियां प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा कर रही हैं, वहीं पीड़िता के परिजन भी इसे हादसा नहीं मानते.

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 29, 2019, 5:05 PM IST
उन्नाव रेप पीड़िता का एक्सीडेंट: परिवार ने लगाए विधायक पर गंभीर आरोप, सीबीआई जांच की मांग
माखी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की फाइल फोटो
Amit Tiwari
Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 29, 2019, 5:05 PM IST
रायबरेली सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल उन्नाव रेप पीड़िता का मामला एक बार फिर से सुर्ख़ियों में है. उन्नाव के माखी से बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर जो इस केस में मुख्य आरोपी भी हैं पर रेप पीड़िता का जानलेवा एक्सीडेंट कराने जैसे गंभीर आरोप लग रहे हैं. सड़क हादसे के बाद जहां एक ओर विपक्षी पार्टियां प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा कर रही हैं, वहीं पीड़िता के परिजन भी इसे हादसा नहीं मानते. उनका आरोप है कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के इशारे पर ही इस घटना को अंजाम दिया गया है.

'विधायक की साजिश- पीड़िता और गवाह की हत्या'

पीड़िता की बहन का कहना है कि उनके परिवार को लगातार धमकियां मिल रही थीं. उनके ऊपर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था. विधायक की साजिश थी कि पीड़िता और गवाह की हत्या कर मामले को ही खत्म कर दिया जाए. उनकी मांग है कि मामले की जांच सीबीआई से हो. इस बीच रायबरेली जेल में बंद पीड़िता के चाचा ने लिखित तहरीर देते हुए इस मामले को भी मुख्य मामले के साथ जोड़कर सीबीआई को जांच सौंप दी जाए. हालांकि इस मामले में अभी तक विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके परिवारवालों की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन इस सड़क हादसे के बाद सीतापुर जेल में बंद विधायक कुलदीप सिंह सेंगर फिर चर्चा के केंद्र में हैं.

कौन हैं कुलदीप सिंह सेंगर?

मूल रूप से फतेहपुर जिले के रहने वाले बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की माखी गांव में तूती बोलती है. वे उन्नाव के अलग-अलग विधानसभा सीटों से चार बार से लगातार विधायक बने हैं. उन्नाव के माखी थाना क्षेत्र के सराय थोक पर उनका ननिहाल है. वह यहीं आकर बस गए. कुलदीप सेंगर ने यूथ कांग्रेस से राजनीति की शुरूआत की और 2002 में भगवंतनगर से बीएसपी के टिकट पर विधायक बने. इसके बाद 2007 और 2012 में सपा के टिकट पर चुने गए. इसके बाद 2017 में बांगरमऊ से बीजेपी के टिकट पर चुनकर विधानसभा पहुंचे.

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बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर


यूपी की सियासी हवा को भांपने में हैं माहिर
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कुलदीप सिंह सेंगर के बारे में कहा जाता है कि वे यूपी की सियासत की हवा का रुख भांप लेते हैं. 1996 के चुनावों में 10 हजार वोटों से हारी हुई उन्नाव सदर की सीट से मायावती ने कुलदीप को उम्मीदवार बना दिया. इस चुनाव में कुलदीप ने कांग्रेस के प्रत्याशी शिव पाल को करीब चार हजार वोट से मात दे दी. इसके बाद से ही कुलदीप की छवि बाहुबली की बननी शुरू हो गई थी. इसके बाद 2007 में सपा के साथ हो लिए. सपा के टिकट पर वे 2012 में भी चुनाव जीत गए. लेकिन सपा का माहौल खराब हुआ तो 2017 में बीजेपी का झंडा पकड़ विधायक बन गए.

राजा भैया के हैं करीबी

सेंगर को निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भईया का बेहद करीबी माना जाता है. ये दलबदलू नेता के नाम से भी चर्चित हैं. कुलदीप की पत्नी संगीता सेंगर से लेकर भाईयों तक, सभी में किसी न किसी पद पर रहने का जुनून रहा है. कुलदीप की पत्नी संगीता सेंगर को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया गया, भाई मनोज सेंगर ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं. खुद लोकसभा के लिए अपनी पिच तैयार कर रहे हैं. कुलदीप के तीसरे भाई अतुल सिंह राजनीतिक साम्राज्य का कामकाज संभालते हैं.

लगे हैं कई आरोप

कुलदीप सिंग सेंगर पर अवैध खनन और अवैध तरीके से टोल लगाकर वसूली करने का भी आरोप लग चुका है. उन्नाव में एक चैनल के रिपोर्टर ने आरोपी विधायक के खिलाफ अवैध खनन की खबर दिखाई, जिस पर रिपोर्टर के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज कराये गए. इतना ही नहीं ये भी कहा जाता है कि उन्नाव का कोई भी ठेका बिना कुलदीप सेंगर की मर्जी के किसी को नहीं मिल सकता है. साइकिल के ठेके से लेकर अवैध होटल चलाने और ऑटो स्टैंड से लेकर गाड़ियों से अवैध वसूली तक के कारोबार में विधायक का परिवार शामिल है.

ठेके कुलदीप सेंगर के भाई अतुल सेंगर उर्फ जगदीप चलाते हैं. जबकि होटल का कारोबार उनके भाई मनोज सेंगर के पास है. चौदह साल पहले उन्नाव में किसी बात को लेकर विधायक पक्ष से एक पत्रकार की कहा-सुनी हो गई थी. इसे रोकने के लिए जब पुलिस पहुंची तो विधायक के भाई अतुल सेंगर ने पुलिस पर फायरिंग कर दी थी, जिसमें डिप्टी एसपी को पेट में गोली लग गई थी.

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First published: July 29, 2019, 3:28 PM IST
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