उन्नाव रेप कांड की पूरी कहानी: विधायक से 18 साल की रंजिश में पीड़िता ने अब तक चार को खोया

अब इस परिवार में मर्द के नाम पर पीड़िता का एक छोटा भाई और चाचा का एक बेटा है. चाचा खुद जेल में बंद हैं. पीड़िता हॉस्पिटल में हैं. घर में मां, दो बहनें और दो भाई ही हैं.

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 1, 2019, 1:12 PM IST
उन्नाव रेप कांड की पूरी कहानी: विधायक से 18 साल की रंजिश में पीड़िता ने अब तक चार को खोया
उन्नाव रेप पीड़िता को न्याय के लिए प्रदर्शन करते लोग
Amit Tiwari
Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 1, 2019, 1:12 PM IST
लखनऊ के ट्रामा सेंटर में जिंदगी के लिए जंग लड़ रही उन्नाव रेप पीड़िता ने अपने न्याय की लड़ाई में अब तक काफी बड़ी कीमत चुकाई है. आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से 18 साल पुरानी रंजिश में इस परिवार में अब तक कुल चार मौतें हो चुकी हैं. आलम ये है कि आज परिवार में मर्द के नाम पर सिर्फ दो बच्चे हैं. विधायक के डर से अन्य रिश्तेदार भी परिवार से दूरी बनाए हुए हैं.

पड़ोसी हैं दोनों परिवार
पीड़िता के परिवार की विधायक से रंजिश और अब न्याय की इस लड़ाई को पूरी तरह समझने के लिए हमें 2002 में जाना होगा. दरअसल कहानी उन्नाव जिले के माखी गांव के सराय थोक मोहल्ला से शुरू होती है. यहीं पर विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और पीड़िता का परिवार अगल-बगल रहता है. 2002 तक इन दोनों परिवारों के बीच बहुत गहरा रिश्ता था. इतना ही नहीं कुलदीप सिंह सेंगर को पहली बार विधायक बनाने में पीड़िता के परिवार ने भी खूब साथ दिया था. आखिर इतनी गहरी दोस्ती अचानक गहरी दुश्मनी में कैसे तब्दील हो गई?

प्रधानी चुनाव में शुरू हुई रंजिश

दरअसल, सियासत में दोस्ती और दुश्मनी के कोई मायने नहीं है. अगर कुछ मायने रखता है तो वह है 'मौका'. उन्नाव के इस मामले में भी यही हुआ. 2002 के प्रधानी के चुनाव के दौरान इस दुश्मनी की नींव पड़ी. दरअसल पीड़िता के पिता तीन भाई थे. तीनों की इलाके में दबंग की छवि थी. लेकिन कुलदीप सिंह सेंगर के विधायक बनने के बाद किसी बात को लेकर दोनों परिवारों में अनबन हुई और सेंगर ने तीनों भाइयों से किनारा कर लिया. इसी बात से नाराज तीनों भाइयों ने प्रधानी के चुनाव में विधायक को सबक सिखाने की ठानी.

प्रधानी के चुनाव में पीड़िता के ताऊ ने दी विधायक की मां को चुनौती
प्रधानी के चुनाव में पीड़िता के ताऊ खुद मैदान में उतरे. दूसरी तरफ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मां चुन्नी देवी प्रधान का चुनाव लड़ रही थीं. कहा जाता है कि विधायक ने उस वक्त गुड्डू सिंह के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों को हथियार बनाया और पीड़िता के ताऊ की उम्मीदवारी खारिज करवा दी. इसके बाद पीड़िता के ताऊ ने अपने करीबी दोस्त देवेंद्र सिंह (सड़क हादसे में घायल पीड़िता के वकील महेंद्र सिंह के भाई और रेप मामले में सीबीआई के गवाह) की मां को सामने खड़ा किया.
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परिवार में पहली हत्या ताऊ की
चुनाव प्रचार के दौरान ही पहली बार दोनों परिवारों के बीच हथियारों का इस्तेमाल हुआ. पीड़िता के चाचा और सेंगर के भाइयों के बीच झड़प हुई और गोलियां भी चलीं. इसमें कई लोग घायल हुए. विधायक की तरफ से पुलिस केस दर्ज करते हुए पीड़िता के चाचा के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हुआ. इसके बाद पीड़िता के परिवार में पहला क़त्ल हुआ. ताऊ की गांव में ही ईंट-पत्थरों से कूचकर हत्या हो गई. उस वक्त भी परिजनों ने हत्या का इल्जाम विधायक पर लगाया था. इस हत्या के बाद पीड़िता का चाचा फरार हो गया. करीब 17 साल बाद वह 2017 में दिल्ली से गिरफ्तार हुआ. अब हत्या के प्रयास में वह रायबरेली जेल में 10 साल की सजा काट रहा है.

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आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर


2017 से पीड़ित परिवार में तीन मौतें
4 जून 2017 को एक बार फिर इन परिवारों की रंजिश सामने आई. 17 वर्षीया पीड़िता ने आरोप लगाया कि विधायक सेंगर ने अपने घर में उसके साथ रेप किया. इस आरोप के बाद विधायक के भाई अतुल सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर पीड़िता के पिता की बुरी तरह पिटाई कर पुलिस को सौंप दिया. मामले में पुलिस ने भी विधायक का साथ दिया और पिता को आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया. जहां दो दिन बाद उनकी मौत हो गई. यह परिवार में दूसरी मौत थी. इसके बाद रायबरेली सड़क हादसे में चाची और मौसी की मौत हो गई. चाची रेप मामले में सीबीआई की गवाह भी थीं. हादसे में खुद पीड़िता गंभीर रूप से घायल है.

अब परिवार में मर्द के नाम पर बस बच्चे
अब इस परिवार में मर्द के नाम पर पीड़िता का एक छोटा भाई और चाचा का एक बेटा है. चाचा खुद जेल में बंद हैं. पीड़िता हॉस्पिटल में हैं. घर में मां, दो बहनें और दो भाई ही हैं. विधायक के डर से कोई रिश्तेदार भी साथ नहीं दे रहा है.

(इनपुट: अनुज गुप्ता)

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First published: August 1, 2019, 12:48 PM IST
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