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UP में ब्राह्मणों को रिझाने में जुटे सभी दल, जानिए आखिर किसकी तरफ जाएगा निर्णायक 13 फीसदी वोट!

UP Assembly Election: चुनाव से पहले सभी दलों की निगाहें ब्राह्मण वोट बैंक पर

UP Assembly Election: चुनाव से पहले सभी दलों की निगाहें ब्राह्मण वोट बैंक पर

UP Political News: यूपी की राजनीति में कहा जाता है कि करीब 13 फीसदी ब्राह्मण वोट है जो बहुत ही सोच-समझकर मतदान करता है. इतना ही नहीं पूर्वांचल व मध्य यूपी के कई जिलों में उसका दबदबा भी है. यह भी कहा जाता है कि ब्राह्मण वोटर जिधर गया उसकी सरकार बननी तय है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में माहौल चुनाव का हो और जातिवाद की बात न हो ऐसा संभव नहीं. 2022 के चुनाव (UP Assembly Electionइ2022) से पहले ही ऐसी कुछ तस्वीर बनती दिख रही है. ब्राह्मण सम्मेलन के जरिए जहां एक ओर बसपा (BSP) ने सवर्ण-दलित गठजोड़ के सहारे सत्ता में वापसी की कोशिश करती नजर आ रही हैं, तो वहीं समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) भी ब्राह्मणों को साधने में जुट गई है. यही वजह है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी ब्राह्मण सम्मेलन कर इस 13 फीसदी निर्णायक माने जाने वाले वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी में जुट गए हैं. अब सत्ताधारी बीजेपी की बात करें तो उसका दावा है कि पूरा ब्राह्मण वोट उनके पाले में हैं. ऐसे में इस बार चुनाव बिसात में ब्राह्मण वोट दांव पर ही नहीं बल्कि सभी सियासी गुना-गणित की कुंजी भी अपने पास संजोए हुए हैं.

दरअसल, 2007 में सोशल इंजीनियरिंग के प्रयोग से सत्ता पर काबिज होने वाली मायावती ने इस बार भी ब्राह्मण सम्मेलन का आगाज कर स्थिति साफ कर दी है कि इस बार भी उनका दांव सवर्ण और दलित वोट पर हैं. यही वजह है कि बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा पूर्वांचल के जिलों में ताबड़तोड़ प्रबुद्धजान सम्मेलन कर सवर्णों को साधने में जुटे हैं. हालांकि बीजेपी का कहना है कि इस बार के चुनाव में जातिवाद नहीं चलेगा.



ब्राह्मण बीजेपी के साथ
लखनऊ के मोहनलालगंज से सांसद और हाल ही में केंद्रीय कौशल किशोर ने कहा कि ब्राह्मण ने शंख बजा दिया है और हाथी जंगल में चला गया है. उन्होंने कहा कि ब्राह्मण वोट बीजेपी का है और मायावती के कहने पर वह नहीं जाएगा. मायावती जिस तरह से ब्राह्मण वोट को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही हैं, उससे लगता है कि उन्हें दलितों का वोट नहीं चाहिए.

इसलिए अहम ब्राह्मण वोट
दरअसल, यूपी की राजनीति में कहा जाता है कि करीब 13 फीसदी ब्राह्मण वोट है जो बहुत ही सोच-समझकर मतदान करता है. इतना ही नहीं पूर्वांचल व मध्य यूपी के कई जिलों में उसका दबदबा भी है. यह भी कहा जाता है कि ब्राह्मण वोटर जिधर गया उसकी सरकार बननी तय है. 2007 में मायावती को पूर्ण बहुमत ब्राह्मण और दलित गठजोड़ की वजह से ही हासिल हुआ. जबकि 2012 में ब्राह्मण और पिछड़ा वर्ग का वोट पाकर समाजवादी पार्टी में सत्ता में आई. यही वजह है कि एक बार फिर सभी दाल ब्राह्मण वोट बैंक पर डोरे डालने लगे हैं.

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