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UP Chunav में प्रियंका गांधी का आधी आबादी पर दांव होगा कितना कारगर, जानें पश्चिम बंगाल और ओडिशा में कितना सफल रहा प्रयोग

UP Chunav में प्रियंका गांधी का आधी आबादी पर दांव होगा कितना कारगर, जानें पश्चिम बंगाल और ओडिशा में कितना सफल रहा प्रयोग

UP Assembly Elections: प्रियंका गांधी के दांव से कांग्रेस को कितना होगा फायदा?

UP Assembly Elections: प्रियंका गांधी के दांव से कांग्रेस को कितना होगा फायदा?

Uttar Pradesh Vidhan Sabha: चुनावी समर के आगाज के साथ ही कांग्रेस ने आधी आबादी पर अपना मुख्य फोकस रखते हुए महिला घोषणा पत्र जारी किया. जिसमें महिलाओं के स्वाबलंबन, स्वाभिमान, शिक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य और सेहत से जुड़े कई बड़े ऐलान किए गए. इसी के साथ ही कांग्रेस ने महिलाओं को यूपी विधानसभा चुनाव में 40 फ़ीसदी टिकट देने का वादा भी किया और प्रत्याशियों की जो पहली लिस्ट जारी हुई, उसमें 125 उम्मीदवारों में से 50 महिला प्रत्याशियों को टिकट भी दिया.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Vidhan Sabha Chunav) को लेकर राजनीतिक पार्टियां जोर शोर से तैयारियों में जुट गयी हैं. चुनाव के नजदीक आते ही किस प्रत्याशी पर दांव लगाया जाए और किसका टिकट काटा जाए इस पर सभी ही पार्टियां अपनी रणनीति बनाने में लगी हुई हैं. कुछ के तो प्रत्याशी भी घोषित कर दिए गए हैं, तो वही कुछ पार्टियां चरणबद्ध तरीके से प्रत्याशियों के नाम पर मुहर लगा रही हैं. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी (Congress) की कमान इस बार प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) के हाथों में है. कांग्रेस पार्टी भले ही इस प्रतिस्पर्धा में प्रबल दावेदार ना हो, पर जोर पूरा लगा रही है, और काफी हद तक सही दिशा में भी है. जिससे इस चुनाव में कुछ सीटें वो अपने नाम करने में कामयाब हो सकती है.

चुनावी समर के आगाज के साथ ही कांग्रेस ने आधी आबादी पर अपना मुख्य फोकस रखते हुए महिला घोषणा पत्र जारी किया. जिसमें महिलाओं के स्वाबलंबन, स्वाभिमान, शिक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य और सेहत से जुड़े कई बड़े ऐलान किए गए. इसी के साथ ही कांग्रेस ने महिलाओं को यूपी विधानसभा चुनाव में 40 फ़ीसदी टिकट देने का वादा भी किया और प्रत्याशियों की जो पहली लिस्ट जारी हुई, उसमें 125 उम्मीदवारों में से 50 महिला प्रत्याशियों को टिकट भी दिया. नि:संदेह यह एक महत्वपूर्ण प्रयोग है और महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के किसी भी प्रयास की प्रशंसा की जानी चाहिए, लेकिन इसके संभावित राजनैतिक प्रभाव को देखना भी आवश्यक है.

पश्चिम बंगाल और ओडिशा में हो चुका है प्रयोग
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की टीएमसी ने भी पश्चिम बंगाल में कुछ ऐसी ही घोषणा की थी कि वह 40 फ़ीसदी टिकट महिलाओं को देंगी. और पार्टी ने पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 17 महिला उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा, जिनमें से 9 विजई हुई. यानी कि जीत का आंकड़ा 50 फ़ीसदी से ज्यादा हुआ. तो वहीं नवीन पटनायक की बीजेडी ने ओडिशा की 21 लोकसभा सीटों में से 7 महिलाओं को टिकट दिया, जिनमें 5 महिला उम्मीदवारों ने जीत हासिल की और इन दोनों ही पार्टियों के प्रयोग काफी हद तक सफल दिखाई दिए.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए कितना लाभदायी ? 
उत्तर प्रदेश, ओडिशा और बंगाल में राजनीतिक और सांस्कृतिक तौर पर कई अंतर है. पर उत्तर प्रदेश में भी आधी आबादी चुनावी नतीजों को बदलने का दम जरूर रखती हैं. कांग्रेस के परिपेक्ष्य में देखा जाए, तो प्रभाव बहुत ज्यादा तो नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उत्तर प्रदेश में चुनावी रण सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच नजर आ रहा है. लेकिन महिलाओं को 40% आरक्षण देने से कांग्रेस को मामूली बढ़त जरूर मिल सकती है. और कहीं न कहीं पार्टी खुद इस बात से वाकिफ भी है. लखनऊ में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रियंका गांधी ने भी खुद कहा था कि इस कदम से महिलाएं अपनी ताकत पहचानेंगी और भविष्य के चुनाव में एक मजबूत वोटिंग ब्लॉक के रूप में उभरेंगी. यानी कि पार्टी की तरफ से यह स्पष्ट संकेत दिया गया कि कांग्रेस के लिए महिलाओं का प्रतिनिधित्व सिद्धांतों का मामला है ना कि वोट जुटाने का. अब यूपी विधानसभा चुनाव में यह प्रयोग किस हद तक राजनीतिक प्रभाव डालता है यह देखना दिलचस्प होगा.

(रिपोर्ट: नीतिका दीक्षित)

Tags: Congress, Priyanka gandhi, UP Assembly Elections, Uttar Pradesh Assembly Elections

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