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UP Board Results 2019: छात्र न ले टेंशन, बच्चों को डिप्रेशन से ऐसे रखें दूर

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

UP Board Result 2019: कई बार उम्मीदों पर खरा न उतर पाने के कारण मां-बाप भी बच्चों पर दबाव बनाते हैं, तनाव बच्चों के मस्तिष्क के लिए खतरनाक हो सकता है.

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यूपी बोर्ड का रिजल्ट (UP Board Results 2019) 20 से 21 अप्रैल के बीच घोषित होने वाला है. ऐसे में जहां कुछ छात्रों में उत्सुकता है तो वहीं कई छात्र व उनके पेरेंट्स रिजल्ट में मार्क्स को लेकर परेशान हैं. दरअसल, परीक्षा और रिजल्ट आने से पहले का तनाव छात्रों और उनके पेरेंट्स के लिए हमेशा चुनौती रही है. कई बार तो छात्र डिप्रेशन का शिकार भी हो जाते हैं.

कई बार उम्मीदों पर खरा न उतर पाने के कारण मां-बाप भी बच्चों पर दबाव बनाते हैं, तनाव बच्चों के मस्तिष्क के लिए खतरनाक हो सकता है. पिछले कुछ वर्षों में यह देखा जा रहा है कि छात्र, परीक्षा के नतीजे आने से पहले या बाद में असफलता के डर से अपनी जिन्‍दगी खत्‍म कर देते हैं. राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े भी कुछ ऐसा ही बताते हैं.

एनसीआरबी की रिपोर्ट की मानें तो सिर्फ साल 2014 में 18 वर्ष से कम उम्र के 1284 छात्रों ने परीक्षा में असफल होने पर अपनी जिन्‍दगी खत्‍म कर ली. इसमें 14 साल के 163 छात्र भी शामिल थे. साल 2015 में ये आंकड़ा और बढ़ गया. साल 2015 में करीब 9 हजार छात्रों ने आत्‍महत्‍या की थी. ऐसे में बच्चे खुद किस तरह तनाव से दूर रह सकते हैं और मां-बाप उनकी किस तरह मदद कर सकते हैं, आइए आपको बताते हैं.



मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कहते हैं कि रिजल्ट से पहले कई पेरेंट्स उनके पास आते हैं. उनकी शिकायत रहती है कि बच्चा गुमसुम रहता है, खाना पिन्ना छोड़ दिया है. अकेले में रहना चाहता है. यह समस्या गंभीर है. ऐसे में मां-बाप की जिम्मेदारी बढ़ जाती है. उनका कहना था कि बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें. रिजल्ट वाले दिन बच्चे को रिलैक्स रहने को कहें और उनके साथ प्यार से पेश आएं. बच्चों का कॉन्फिडेंस बढ़ाएं ताकि बच्चा मुश्किल हालातों का सामना कर सके. बच्चों को मारना-पीटना गलत है.
उन्होंने कहा कि बच्चे अक्सर रिजल्ट आने के 3-4 दिन पहले से ही रिजल्ट के बारे में सोचने लगते हैं, जिससे वो तनाव का शिकार हो जाते हैं. रिजल्ट आने से पहले अपने दिमाग को शांत रखें. जब आपको परिणाम पता चल जाएंगे, तो आगे के रास्ते भी उसे के अनुसार नजर आने लगेंगे. अगर किसी विषय में आपके नंबर खराब भी आए हैं, तो रिचेकिंग या रिएग्जाम के द्वारा आप अपने नंबर्स ठीक कर सकते हैं.

इन टिप्स को आजमाएं

-परीक्षा का रिजल्ट आने वाले दिन तनाव लेने के बजाय अपना मनपसंद काम करें. मसलन गाने सुनना, मूवी देखना, गेम खेलना या खाना खाना आदि.

-यदि आप तनाव से बचना चाहते हैं, तो बेहतर होगा कि अपने पेरेंट्स के साथ रिजल्ट देखें. ऐसा करने से आपका अच्छा या खराब रिजल्ट पेरेंट्स के सामने होता है, जिससे आप बाद में उनका सामना करने से परेशान नहीं होते हैं.

-बच्चों और मां-बाप दोनों को यह समझना चाहिए कि किसी भी परीक्षा में कम नंबर या खराब रिजल्ट इस बात का दावा नहीं होते कि बच्चे का करियर खराब होगा. परिणाम खराब होने पर बच्चों को अगली परीक्षा में ज्यादा मेहनत करने और बेहतर रिजल्ट लाने के लिए प्रेरित करना चाहिए, न कि उन्हें डांटना या मारना चाहिए.

-मां-बाप बच्चों से रिजल्ट के बारे में जितना ज्यादा बातें करेंगे, बच्चों का तनाव उतना ज्यादा बढ़ेगा. ऐसे में मां-बाप को कोशिश करनी चाहिए कि रिजल्ट आने से पहले इस बारे में बच्चे से कोई बातचीत न करें.

-पेरेंट्स पहले से किसी ऐसे रिजल्ट की आशा न करें, जो बच्चा आसानी से पूरा नहीं कर सकता है. दुनिया का हर बच्चा स्कूल टॉपर या जिला टॉपर नहीं हो सकता है. बच्चा अगर पढ़ाई में मेहनत नहीं करता है, तो उसे आप समझाएं और जरूरत हो तो थोड़ा सख्ती से समझाएं. मगर रिजल्ट आने के बाद उसपर किसी तरह का दबाव न डालें, क्योंकि बच्चा डांट खाकर रिजल्ट नहीं बदल सकता है.

-कई मां-बाप बच्चों को नंबरों को अपनी इज्जत और मान-मर्यादा से जोड़ने लगते हैं. ध्यान दें परीक्षा में बच्चों के नंबर्स से न तो आपकी सोशल वैल्यू कम हो जाएगी और न ही बढ़ जाएगी.

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