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11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव से जुड़े ये हैं 11 रोचक तथ्य, जानकर रह जाएंगे हैरान

Mukesh Kumar | News18 Uttar Pradesh
Updated: October 21, 2019, 8:48 AM IST
11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव से जुड़े ये हैं 11 रोचक तथ्य, जानकर रह जाएंगे हैरान
यूपी के उपचुनाव में सभी दलों की प्रतिष्ठा दांव पर है. (फाइल फोटो)

विधानसभा उपचुनाव (Assembly By Election) में पहली बार बसपा (BSP) मैदान में है, लेकिन पार्टी मुखिया मायावती (Mayawati) एक भी सीट पर प्रचार करने नहीं गईं.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की जिन 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव (By Election) हो रहा है, उनसे जुड़े कई तथ्य ऐसे हैं जो चौंकाने वाले हैं. सात साल पहले यूपी की सबसे ताकतवर बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ही नहीं, बल्कि सत्ताधारी भाजपा (BJP) से जुड़ी ये बातें आपको हैरान कर देंगी.

बसपा से जुड़ा रोचक तथ्य

विधानसभा उपचुनाव में पहली बार बसपा मैदान में है, लेकिन बसपा मुखिया मायावती एक भी सीट पर प्रचार करने नहीं गईं. गौर करने वाली बात यह कि बसपा पहली बार उपचुनाव लड़ रही है. हालांकि, महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में मायावती ने कई रैलियों को सम्बोधित किया और विपक्ष पर जमकर हमला भी किया, लेकिन यूपी में बसपा का जोश ठंडा ही नजर आया.

अखिलेश का जोश ठंडा

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी उपचुनाव के प्रचार में सोशल मीडिया से ही काम चलाया. अखिलेश ने रामपुर का किला बचाने के लिए एक मात्र जनसभा यहां के ऐतिहासिक किला मैदान में की. सांसद आजम खान की पत्नी और राज्यसभा सांसद तजीन फातमा के लिए अखिलेश ने प्रचार किया.

सपा को करारा झटका

मऊ जिले की घोषी सीट पर सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह पर्चा खारिज होने से चुनाव नहीं लड़ सके. अब निर्दलीय प्रत्याशी को सपा ने समर्थन दिया है. वहीं, दूसरी ओर अलीगढ़ की इगलास सीट पर भी सपा-रालोद प्रत्याशी का नामांकन रद्द हो गया.
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पदाधिकारी भाजपा से और सिम्बल अपना दल (एस) का

उपचुनाव में प्रतापगढ़ सीट पर रोचक तथ्य यह है कि अपना दल (एस) के सिम्बल पर चुनाव लड़ रहे राज कुमार पाल भारतीय जनता पार्टी के जिला मंत्री रहे हैं. भाजपा ने लोकसभा चुनाव के दौरान अपना दल (एस) के विधायक रहे संगम लाल गुप्ता को टिकट दिया था. उनके जीतने के बाद ये सीट खाली हुई है.

आक्रामक तेवर में दिखे सीएम योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मानिकपुर से लेकर गंगोह तक आक्रामक नजर आए. पूर्वांचल से लेकर सपा के गढ़ रामपुर में भी आजम का किला ढहाने के लिए मुख्यमंत्री ने रैलियों के जरिए विपक्ष को आड़े हाथ लिया. महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव के साथ यूपी विधानसभा उपचुनाव में भी सीएम योगी ने आक्रामक रूप से प्रचार किया.

सरकार और संगठन का प्लान ऑफ एक्शन

11 सीटों पर उपचुनाव जीतने के लिए सिर्फ सीएम योगी ही प्रचार करते नजर नहीं आए, बल्कि हर सीट पर संगठन के लिहाज से भी भाजपा ने फुलप्रूफ प्लान तैयार किया और हर सीट पर मंत्रियों की ड्यूटी भी लगाई गई. खासतौर पर रामपुर और जलालपुर सीट पर ज्यादा फोकस किया.

गठबंधन से जुड़े कई पहलू भी बिगाड़ रहे समीकरण

वर्ष 2017 में जब विधानसभा चुनाव हुआ था तब समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन था. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन था, अब बसपा ने हाथ झटक लिया है. भाजपा के लिए कई सीटों पर ओमप्रकाश राजभर की पार्टी भी वोट कटवा का काम कर रही है.

उपचुनाव के नतीजे सरकार के लिए छमाही परीक्षा का रिजल्ट

विधानसभा उपचुनाव में 11 सीटों के नतीजे योगी सरकार के लिए साल 2022 का रोडमैप देने का काम करेंगे. 11 में से 9 सीटें फिलहाल भाजपा गठबंधन के खाते वाली हैं. हाल ही में योगी सरकार के ढाई साल पूरे हुए हैं, ऐसे में नतीजे बताएंगे क्या है योगी सरकार के आधे कार्यकाल का परिणाम...जो किसी अर्धवार्षिक परीक्षा से कम नहीं है.

परिवारवाद vs कामकाज को तवज्जो

उपचुनाव में भाजपा ने पुराने कार्यकर्ताओं और संगठन से जुड़े लोगों को प्रत्याशी बनाने में तरजीह दी है, जबकि कांग्रेस ने गंगोह में चर्चित नेता इमरान मसूद के भाई नोमान मसूद और बसपा ने जलालपुर में लालजी वर्मा की बेटी छाया वर्मा को मैदान में उतारा.रामपुर में सपा प्रत्याशी तजीन फातिमा और बाराबंकी की जैदपुर सीट पर पीएल पुनिया के बेटे तनुज पुनिया को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया है.

समीकरण नहीं बिगाड़ेंगे शिवपाल यादव

लोकसभा चुनाव के दौरान सपा-बसपा गठबंधन के समीकरण बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाने वाली शिवपाल यादव की पार्टी पीएसपी(एल) उपचुनाव के मैदान में नहीं है. हालांकि, पिछले कुछ दिनों से शिवपाल यादव परिवार में फूट के बयानों पर नरमी बरत रहे हैं.

मानिकपुर की 'शेरनी' की भी खूब हो रही है चर्चा

चित्रकूट जिले की मानिकपुर सीट पर एक बड़ी ही रोचक जानकारी सामने आई है. बहुजन मूवमेंट चलाने वाली रामलली यहां सपा के लिए वोट मांग रही हैं. ददुआ के गैंग से पंगा लेकर रामलली चर्चा में आयी थीं और उन्हें शेरनी की संज्ञा दी जाती है. फिलहाल ये तमाम तथ्य विधानसभा उपचुनाव को रोचक मोड़ पर लेकर जा चुके हैं अब 24 अक्टूबर को ईवीएम का पिटारा खुलेगा और पता चलेगा कि कौन है मुकद्दर का सिकंदर.

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First published: October 21, 2019, 7:36 AM IST
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