UP Byelection: बीजेपी के साथ विपक्ष की किस्मत भी दांव पर, माना जा रहा 2022 से पहले का सेमिफाइनल
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UP Byelection: बीजेपी के साथ विपक्ष की किस्मत भी दांव पर, माना जा रहा 2022 से पहले का सेमिफाइनल
यूपी उप चुनाव केलिए बढ़ी सरगर्मियां (प्रतीकात्मक तस्वीर)

UP Byelection 2020: उपचुनाव की तारीखों की सुगबुगाहट के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी भी तेज होने की उम्मीद है. यूपी की जिन आठ सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उसमें से छह बीजेपी और दो समाजवादी पार्टी के कब्जे वाली हैं.

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  • Last Updated: September 8, 2020, 2:18 PM IST
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लखनऊ. उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) में उपचुनाव (UP Byelection) की तैयारियां शुरु हो गई हैं. 15 सितंबर के बाद नोटिफिकेशन जारी होने की उलटी गिनती शुरु हो जाएगी. सत्ताधारी दल बीजेपी (BJP) को अपनी सीटों को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है. वहीं विपक्ष को अपना वर्चस्व साबित करने के लिए एक मौका है. उपचुनाव की तारीखों की सुगबुगाहट  के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी भी तेज होने की उम्मीद है. यूपी की जिन आठ सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उसमें से छह बीजेपी और दो समाजवादी पार्टी के कब्जे वाली हैं. कहा जा रहा है कि इन आठ सीटों के नतीजों से विधानसभा में बहुमत पर तो कोई विशेष असर नहीं पड़ेगा, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश जरूर होगा. इन उपचुनावों को सेमिफिनल के तौर पर भी देखा जा रहा है.

यूपी विधानसभा में पांच विधायकों के निधन से रिक्त हुई सीटें हैं. वहीं दो विधायकों की सदस्यता खत्म हो गई है. तीसरी सीट पर मामला कोर्ट मे होने के कारण समय पर उपचुनाव नही हो पाया था. उत्तर प्रदेश विधानसभा में रिक्त हुई आठ विधानसभा सीटों में फिरोजाबाद जिले की टुण्डला, उन्नाव में बांगरमऊ, रामपुर में स्वार, बुलंदशहर जिले में बुलंदशहर सदर, जौनपुर में मल्हनी, कानपुर नगर में घाटमपुर और अमरोहा में नौगावां सादात और देवरिया मे देवरिया सदर सीट शामिल हैं. इनमें टूंडला बीजेपी के एसपी बघेल द्वारा त्यागपत्र देने से, जबकि बांगरमऊ व स्वार सीटें कोर्ट के हस्तक्षेप से रिक्त हुईं. इनके अलावा मल्हनी, बुलंदशहर, घाटमपुर, नौगावां सादात और देवरिया सदर निर्वाचित विधायकों के निधन से रिक्त हुई हैं.

अमरोहा जिले की नौगावां सीट बीजेपी के चेतन चौहान के निधन के चलते रिक्त हुई है. 2017 में चौहान सपा के जावेद आब्दी को करारी मात देकर योगी सरकार के कैबिनेट का अहम हिस्सा बने थे. ऐसे ही बीजेपी के विधायक वीरेंद्र सिंह सिरोही के निधन के चलते अब बुलंदशहर विधानसभा सीट रिक्त हो गई है. 2017 में वीरेंद्र सिरोही ने बसपा के हाजी अलीम खान को 32 हजार मतों से हराया था. बीजेपी ने कई चुनाव के बाद इस सीट पर वापसी की थी. अभी बीजेपी की संगठनात्मक गतिविधियां लगातार जारी हैं और पार्टी उपचुनाव के लिए तैयार है.



कानपुर की घाटमपुर विधानसभा सीट बीजेपी की विधायक रहीं कमल रानी वरुण के कोरोना से निधन हो जाने के चलते खाली हुई है. कमल रानी ने 2017 के चुनाव में बसपा की सरोज कुरील को हराया था. बीजेपी ने सपा से यह सीट छीनी थी. ऐसे ही जौनपुर की मल्हनी विधानसभा सीट सपा के विधायक रहे परसनाथ यादव के निधन के खाली हुई है. 2017 में बीजेपी की लहर के बावजूद परसनाथ ने निषाद पार्टी के बाहुबली नेता धनंजय सिंह को मात दी थी. देवरिया सदर से जन्मेजय सिंह ने सपा के जेपी जायसवाल को बड़े अंतर से हराया था. वैसे विपक्ष के लिए कोरोना काल में उपचुनाव किसी चुनौती से कम नहीं है.
कुलदीप सेंगर की बांगरमऊ सीट खाली है 
उन्नाव में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म मामले में सजायाफ्ता बांगरमऊ से विधायक रहे कुलदीप सिंह सेंगर की विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई है. इसके चलते बांगरमऊ विधानसभा सीट खाली हो गई है. इस सीट पर उपचुनाव होगा, लेकिन अभी उपचुनाव का ऐलान नहीं हुआ है. सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली की अदालत ने 20 दिसंबर 2019 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके चलते उनकी सदस्यता रद्द की गई है.

आजम खान के बेटे की स्वार सीट रिक्त
रामपुर से समाजवादी पार्टी सांसद आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई है. विधानसभा चुनाव के दौरान गलत दस्तावेज मुहैया करवाने के चलते हाई कोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को अब्दुल्ला आजम के निर्वाचन को रद्द कर दिया था, जिसके चलते विधानसभा से उनकी सदस्यता रद्द की गई है.

बघेल के सांसद चुने जाने से टुण्डला सीट खाली
फिरोजाबाद जिले की टुण्डला विधानसभा सीट 2017 के चुनाव में भाजपा के एसपी सिंह बघेल ने जीत दर्ज की थी, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में सांसद बन जाने के बाद उन्होंने विधायकी से इस्तीफा दे दिया था. यह सीट खाली हुए करीब एक साल से ज्यादा हो गया है, लेकिन हाईकोर्ट में इस सीट की चुनाव याचिका विचाराधीन है. इस नाते निर्धारित समयावधि के भीतर इस रिक्त सीट पर उपचुनाव नहीं हो पाया था. अब इंतजार नोटिफिकेशन का है। ये माना जा रहा है 29 नवंंबर से पहले निर्वाचन करा लेना है ऐसे में 17 सितंबर के बाद कभी भी नोटिफिकेशन आ सकता है/
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