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सरकारी खजाने से नहीं, अब सीएम-मंत्री खुद भरेंगे अपना आयकर! 1981 के एक्ट में संशोधन की तैयारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली अहम बैठक में कई प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है. (फाइल फोटो)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली अहम बैठक में कई प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है. (फाइल फोटो)

योगी आदित्‍यनाथ कैबिनेट (Yogi Adityanath Cabinet) की आज महत्‍वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें मुख्‍यमंत्री और मंत्रियों के आयकर से जुड़े कानून में संशोधन के फैसले पर मुहर लग सकती है.

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    लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में मुख्यमंत्री (Chief Minister) और उनके मंत्रियों का आयकर (Income Tax) भुगतान सरकारी खजाने (Treasury) से नहीं किया जाएगा. मंगलवार को लखनऊ के लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में इस प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है. दरअसल, अभी तक वित्त विभाग मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वेतन पर देय आयकर का भुगतान सरकारी खजाने से करता आ रहा था. यूपी में यह व्यवस्था वर्ष 1981 से लागू है. अब योगी सरकार वेतन, भत्ता और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम में संशोधन करेगी.

    उत्तर प्रदेश में चार दशक पुराने कानून की वजह से राज्य के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों का इनकम टैक्स सरकारी खजाने से भरा जाता है. कानून में कहा गया है कि राज्य के सीएम और मंत्री कम वेतन के कारण इनकम टैक्स नहीं भर सकते और वे गरीब हैं. लेकिन, चुनाव के दौरान दिए गए राज्य के मंत्रियों के हलफनामे कोई और ही कहानी बयां करते हैं. राज्य में ऐसे कई मंत्री हैं, जिन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में बताया है कि उनके पास करोड़ों की चल और अचल संपत्ति है. इसके साथ ही वह महंगी गाड़ियों में घूमने के शौकीन हैं. मुख्यमंत्री और मंत्रियों का टैक्स भरने वाले उत्तर प्रदेश की गिनती देश के सबसे गरीब राज्यों में होती है.

    कानून लागू होने के बाद राज्य में 19 सीएम बन चुके हैं


    उत्तर प्रदेश मिनिस्टर्स सैलरीज, अलाउंसेस एंड मिसलेनियस एक्ट, 1981 में अमल में आया था, तब विश्वनाथ प्रताप सिंह राज्य के मुख्यमंत्री थे. उस वक्‍त से राज्य में अलग-अलग पार्टियों से उत्‍तर प्रदेश में 19 मुख्यमंत्री बन चुके हैं, जिसमें समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी से मायावती, कांग्रेस से नारायण दत्त तिवारी, बीजेपी से कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह और अब योगी आदित्यनाथ शामिल हैं. इतना ही नहीं कानून लागू होने के बाद से राज्य में लगभग एक हजार मंत्री भी बन चुके हैं.

    कैबिनेट में इन प्रस्तावों पर भी लग सकती है मुहर

    लोकभवन में सुबह 11 बजे होने वाली बैठक में 15 से अधिक महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी. इनमें यूपी दुकान और वाणिज्य अधिनियम में संशोधन, उपनिदेशक सेवायोजना राजीव कुमार यादव के खिलाफ सजा का निर्धारण, जौनपुर मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए सोसायटी का गठन, यूपी सचिवालय विधायी विभाग अधिकारी सेवा नियमावली में संशोधन, विकलांग कल्याण विभाग में राजपत्रित अधिकारी सेवा नियमावली में संशोधन, मक्का क्रय नीति, जेवर एयरपोर्ट के बिड डॉक्यूमेंट में संशोधन, हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज व उनके आश्रितों की चिकित्सा सुविधाओं में संशोधन जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है.

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