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UP: गिरफ्तारी की ‘चाल’ से SP-BSP के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में कांग्रेस

UP: गिरफ्तारी की ‘चाल’ से SP-BSP के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में कांग्रेस

दशकों से उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजनीति में हासिए पर खड़ी कांग्रेस (Congress) ने सपा (SP) और बसपा (BSP) के वोटर्स पर सेंध लगाकर अपनी सियासी जमीन तैयार करना शुरू कर दी है.

दशकों से उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजनीति में हासिए पर खड़ी कांग्रेस (Congress) ने सपा (SP) और बसपा (BSP) के वोटर्स पर सेंध लगाकर अपनी सियासी जमीन तैयार करना शुरू कर दी है.

दशकों से उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजनीति में हासिए पर खड़ी कांग्रेस (Congress) ने सपा (SP) और बसपा (BSP) के वोटर्स पर सेंध लगाकर अपनी सियासी जमीन तैयार करना शुरू कर दी है.

उलखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजनीति में बीजेपी (BJP) को चुनौती देते हुए कांग्रेस (Congress) ने एक बार फिर अपनी सियासी जमीन तलाशना शुरू कर दी है. यहां सबसे अहम बात यह है कि कांग्रेस ने अपनी सियासी जमीन को पुख्ता करने के लिए बीजेपी की जगह समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के मतदाताओं पर सेंध लगाने की कोशिश कर रही है. वहीं, मतदाताओं तक अपनी बात को पुख्ता तौर पर पहुंचाने के लिए कांग्रेस अपने नेताओं की गिरफ्तारी को आधार बनाया है. वह मतदाताओं को यह बताने की कोशिश कर रही है कि उनकी जरूरत के वक्त सपा-बसपा नहीं, बल्कि कांग्रेस के नेता उनके साथ खड़े थे.

कांग्रेस ने अपनी इस रणनीति की शुरुआत कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की गिरफ्तारी से कर दी थी. वहीं, कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के चेयरमैन शाहनवाज आलम की गिरफ्तारी के बाद पार्टी ने सपा के मुस्लिम वोट बैंक पर सेंध लगाना शुरू कर दी. उल्लेखनीय है कि शाहनवाज आलम को यूपी पुलिस ने सोमवार की रात गिरफ्तार किया है. उन पर पिछले साल 19 दिसबंर को राजधानी लखनऊ में नागरिकता कानून को लेकर हिंसक प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप है. वहीं, कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों के बीच शाहनवाज आलम की गिरफ्तारी को मुद्दा बनाकर राजनीति को एक नई करवट दिलाने की कवायद शुरू कर दी है.

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विचारधारा से समाजवादी रहे वरिष्ठ पत्रकार के विक्रम राव कहते हैं कि समाजवादी पार्टी लोहिया के जेल और फावड़ा का सिद्धांत भूल गई है. वे कहते हैं कि लोहिया कहते थे कि सड़कें खामोश हो जाएंगी तो विधानसभा और संसद आवारा हो जाएगी. वे मानते हैं कि कांग्रेस की रणनीति से समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का वोटर कांग्रेस के तरफ खिसक सकता है. अपने संस्मरणों को उघेरते हुए के विक्रम राव कहते हैं कि कांग्रेस नेताओं ने जब-जब जेल का रुख किया है उसे फायदा मिला है. वे 1977 के दौर को याद करते हुए बताते हैं कि जब इंदिरा गांधी को एक दिन के चौधरी चरण सिंह ने अरेस्ट कर जेल भेजा था, तो कांग्रेसी दिग्गजों ने गिरफ्तारी दी थी. उन गिरफ्तारियों से इंदिरा गांधी को रिवाइव करने में काफी आसानी हुई थी.

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गौरतलब है कि बसपा शासनकाल में बीजेपी की नेता और तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी की गिरफ्तारी के बाद भी कांग्रेस को फायदा हुआ था. वे कहते हैं कि समाजवादियों के संघर्ष का सिद्धांत कांग्रेस ने हथिया लिया है. कांग्रेस के नेता सड़क पर हैं और समाजवादी सदमे में. अखिलेश यादव का शांत बैठना उनपर भारी पड़ जाएगा. के विक्रम राव कहते हैं कि केवल सपा पर ही भारी नहीं पड़ेगा, बल्कि बहुजन समाज पार्टी को समझ में नहीं आ रहा है, उनका वोटर भले ही बीजेपी की तरफ आकर्षित दिख रहा हो, लेकिन वो भी देर सवेर कांग्रेस के पास आ सकता है. क्योंकि, कांग्रेस अपने पुराने वोट बैंक को वापस लाने की रणनीति पर चल रही है और उसमें पूरी तौर पर सफल होती दिख रही है. कांग्रेस का पुराना वोटबैंक था दलित मुस्लिम और ब्राह्मण. गौरतलब है कि कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी बसपा नेत्री मायावती को बीजेपी की अघोषित प्रवक्ता के रुप में पेश कर रही हैं.

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