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UP News: बीजेपी से ज्यादा तो SP-BSP की सरकारों में निर्विरोध जीते थे जिला पंचायत अध्यक्ष, देखें लिस्‍ट

UP News: बीजेपी से ज्यादा तो SP-BSP की सरकारों में निर्विरोध जीते थे जिला पंचायत अध्यक्ष, देखें लिस्‍ट

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में बीजेपी के 21 प्रत्याशी निर्विरोध जीते (फाइल फोटो)

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में बीजेपी के 21 प्रत्याशी निर्विरोध जीते (फाइल फोटो)

UP Zila Panchayat Adhyaksh Chunav: इस चुनाव से पहले 2016 में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव हुए थे. तब अखिलेश यादव की सरकार थी. जबकि 2010 में जब चुनाव हुए थे तब मायावती की सरकार थी. दोनों ही सरकारों में ऐसा ही कुछ हुआ था. सपा व बसपा के प्रत्याशी बड़ी संख्या में निर्विरोध चुने गए थे.

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लखनऊ. योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की सरकार में हो रहे जिला पंचायत अध्यक्ष (Zila Panchayat Adhyaksh) इस चुनाव को लेकर अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और मायावती (Mayawati) दोनों हमलावर हैं. मायावती ने चुनावों में धांधली का आरोप लगाकर इससे किनारा कर लिया. जबकि सपा का कहना है कि उनके कैंडिडेट को या तो पर्चा नहीं भरने दिया गया या फिर उनका पर्चा खारिज करा दिया गया. इटावा को छोड़कर बाकी 22 सीटों पर भाजपा कैण्डिडेट के निर्विरोध निर्वाचन को समाजवादी पार्टी जोर जबरदस्ती की जीत बता रही है. दरअसल, जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में जीत के लिए सभी हथकंडे इस्तेमाल होते हैं. जिसकी सरकार होती है उसका पड़ला हमेशा ही भारी रहता है.

इस चुनाव से पहले 2016 में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव हुए थे. तब अखिलेश यादव की सरकार थी. 2016 से पहले 2010 में जब चुनाव हुए थे तब मायावती की सरकार थी. दोनों ही सरकारों में ऐसा ही कुछ हुआ था. सपा व बसपा के प्रत्याशी बड़ी संख्या में निर्विरोध चुने गए थे. अब सवाल यह उठता है कि दोनों ही दलों को बीजेपी पर सवाल खड़े करने का कितना नैतिक अधिकार है?

अखिलेश सरकार में कितने जीते थे निर्विरोध
आइए एक नजर डालते हैं 2016 में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव पर. तब प्रदेश में अखिलेश यादव की सपा सरकार थी. 2016 के चुनाव में 74 में से 38 जिलों में जिला पंचायत के अध्यक्ष निर्विरोध चुनाव जीते थे. 75 वें जिले नोएडा में चुनाव नहीं हुआ था. जिन जिलों में निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव जीते थे वे जिले हैं - फैजाबाद, फिरोजाबाद, गोंडा, कानपुर देहात, कासगंज, भदोही, संत कबीर नगर, जालौन, बस्ती, अमरोहा, इटावा, बाराबंकी, श्रावस्ती, एटा, महोबा, देवरिया, कानपुर नगर, बलिया, गाजीपुर, सिद्धार्थ नगर, सहारनपुर, अमेठी, ललितपुर, मऊ, चित्रकूट, बदायूं, हरदोई, बागपत, हमीरपुर, झांसी, मैनपुरी, बहराइच, गाजियाबाद, लखनऊ, संभल, आजमगढ़, लखीमपुर खीरी और बुलंदशहर.

मायावती सरकार में 20 जीते थे निर्विरोध
साल 2010 में जब प्रदेश में बसपा की सरकार थी तब कितनी सीटों पर जिला पंचायत के अध्यक्ष निर्विरोध जीते थे. तब 72 में से 20 जिलों में जिला पंचायत के अध्यक्ष निर्विरोध चुनाव जीते थे. ये जिले हैं - मेरठ, नोएडा, बुलंदशहर, बिजनौर, अमरोहा, रामपुर, गाजियाबाद, कासगंज, महोबा, हमीरपुर, बांदा, कौशांबी, उन्नाव, लखनऊ, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, श्रावस्ती, बलरामपुर, चंदौली और वाराणसी.

योगी सरकार में कितने जीते निर्विरोध
सपा और बसपा की सरकारों में जो कुछ हुआ, अब वही इतिहास बीजेपी की सरकार में भी दोहराया गया है. 75 जिलों में से 22 जिलों में इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध विजयी घोषित किए गए हैं. जिन जिलों में ऐसा हुआ है वे जिले हैं - मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, अमरोहा, मुरादाबाद, आगरा, इटावा, ललितपुर, झांसी, बांदा, चित्रकूट, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, शाहजहांपुर, गोरखपुर, मऊ, वाराणसी, पीलीभीत, सहारनपुर और बहराइच.

सत्ताधारी दल के कैण्डिडेट ही जीतते हैं निर्विरोध
तीनों ही सरकारों में एक्का-दुक्का सीटों को छोड़कर बाकी सभी सीटों पर सत्ताधारी दल के ही लोग निर्विरोध चुनाव जीते. इस चुनाव में धांधली का आरोप लगाने वाली सपा की जब सरकार थी तब तो सबसे ज्यादा सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ था.

सपा-बसपा को सवाल उठाने का कितना नैतिक अधिकार

अब सवाल उठता है कि क्या सपा और बसपा को यह नैतिक अधिकार है कि वह मौजूदा बीजेपी सरकार पर चुनाव में जीत हासिल करने के लिए साम-दाम-दंड-भेद अपनाने का आरोप लगा सके. ये तो वही पुरानी बात हो गयी कि जिनके घर शीशे के होते हैं वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते. असल में सरकारों को जीत चाहिए, किसी भी कीमत पर.

Tags: BJP, BSP UP, District Panchayat President Election, Lucknow news, Samajwadi party

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