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UP Election 2022: पश्चिम से पूर्वांचल और अवध से बुंदेलखंड तक...कहां किसका पलड़ा भारी, समझें यूपी चुनाव का पूरा सियासी समीकरण

UP Election 2022: पश्चिम से पूर्वांचल और अवध से बुंदेलखंड तक...कहां किसका पलड़ा भारी, समझें यूपी चुनाव का पूरा सियासी समीकरण

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का सियासी समीकरण क्षेत्रवार समझें

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का सियासी समीकरण क्षेत्रवार समझें

UP Assembly Election 2022: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2022) के पहले और दूसरे चरण की अधिसूचना जारी हो चुकी है. सभी पार्टियां पश्चिमी उत्तर प्रदेश (UP Election) से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक और अवध से लेकर बुंदेलखंड तक चुनावी बिसात बिछा रही हैं. चूंकि भाजपा ने चारों क्षेत्रों से जीत हासिल कर प्रचंड बहुमत पाई थी, इसलिए वह दोबारा से उसी तरह की जीत दोहराना चाह रही है. वहीं सपा, बसपा और कांग्रेस भी चारों क्षेत्रों में अपना जनाधार बढ़ाकर सत्ता पाना चाह रही हैं. आइये जानते हैं उत्तर प्रदेश के सभी क्षेत्रों के सियासी समीकरणों का पूरा हाल.

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2022) के पहले और दूसरे चरण की अधिसूचना जारी हो चुकी है. सभी पार्टियां पश्चिमी उत्तर प्रदेश (UP Election) से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक और अवध से लेकर बुंदेलखंड तक चुनावी बिसात बिछा रही हैं. चूंकि भाजपा ने चारों क्षेत्रों से जीत हासिल कर प्रचंड बहुमत पाई थी, इसलिए वह दोबारा से उसी तरह की जीत दोहराना चाह रही है. वहीं सपा, बसपा और कांग्रेस भी चारों क्षेत्रों में अपना जनाधार बढ़ाकर सत्ता  पाना चाह रही हैं. आइये जानते हैं उत्तर प्रदेश के सभी क्षेत्रों के सियासी समीकरणों का पूरा हाल.

प्रदेश में जातिगत आंकड़े
उत्तर प्रदेश में 40 फीसदी ओबीसी वोट है, जिसमें 10 फीसदी यादव, 10 अन्‍य ओबीसी जातियां और 20 फीसदी मौर्या, शाक्‍य, लोधी, काछी, कुशवाहा जैसी जातियां शामिल हैं. 21 सामान्‍य वर्ग के वोट हैं, जिसमें 10 से 11 ब्राह्मण, चार फीसदी ठाकुर, चार फीसदी वैश्‍य व दो फीसदी अन्‍य सवर्ण जातियां हैं. इसके अलावा 20 फीसदी दलित हैं, जिसमें 11 फीसदी जाटव और 9 फीसदी अन्‍य हैं. वहीं करीब 19 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं.

पार्टियों की सोशल इंजीनियरिंग
भाजपा 11 फीसदी जाटव, 10 फीसदी यादव और 19 फीसदी मुस्लिम को हटाकर उत्तर  प्रदेश में राजनीतिक समीकरण बैठाती है. वहीं, सपा ओबीसी, मुस्लिम को लेकर राजनीतिक समीकरण तय करती है. बसपा दलित, मुस्लिम और सवर्ण जाति को लेकर सियासी बिसात बिछाती है. 2007 में इसी सोशल इंजीनियरिंग के जरिए बसपा और 2012 में सपा उत्तर प्रदेश की सत्ता में काबिज हुई थी. सभी पार्टियों के लिए पूर्वांचल से लेकर पश्चिम उत्‍तर प्रदेश और अवध से लेकर बुंदेलखंड क्षेत्र खास मायने रखते हैं. इसलिए सभी पार्टियां चारों क्षेत्रों में संतुलन बनाकर चुनावी सीमकरण बैठाती हैं. वर्ष 2017 में किस पार्टी ने कितनी सीटें किस क्षेत्र में जीतीं और इस बार क्षेत्रों में हॉट सीटें कौन-कौन सी होंगी, जिन पर सभी की नजरें होंगी, चलिए जानते हैं सबकुछ.

सियासी पारा पश्चिमी यूपी चढ़ाता है

राजधानी दिल्‍ली के करीब होने की वजह से पूर्वी उत्तर प्रदेश सभी चुनाव में खास रहता है. विधानसभा चुनाव के पहले चरण की शुरुआत भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हो रही है. किसान आंदोलन का एक केन्‍द्र यह क्षेत्र भी रहा है. यहां पर नामांकन की अंतिम तिथि भी निकल चुकी है. लगभग सभी पार्टियों ने उम्‍मीदवार घोषित कर दिए हैं. आरएलडी का वोट बैंक यहीं है. इस बार आरएलडी और सपा मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. इस पूरे क्षेत्र में 136 सीटें आती हैं. 2017 के चुनाव में यहां पर 136 में से 109 सीटों के साथ भाजपा ने प्रचंड जीत दर्ज की थी. 27 सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा था. दूसरे नंबर पर रहने वाली सपा को 21 सीटें मिली थीं. इसके अलावा बसपा को 3, कांग्रेस को 2 और अजीत सिंह की आरएलडी को एक सीट मिली थीं. हालांकि, आरएलडी का विधायक बाद में भाजपा में शामिल हो गया था.

इस क्षेत्र की पांच हॉट सीटें
1. शामली की कैराना विधानसभा सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रमुख सीटों में एक है. यहां पर भाजपा द्वारा 2017 चुनाव से पहले पलायन का मुद्दा खूब उछाला गया था. यह मुद्दा पश्चिमी भाजपा के लिए तुरुप का इक्का साबित हुआ है और भाजपा सत्ता में आ गयी लेकिन कैराना सीट उसके हाथों से फिसल गई. इस बार भी यह सीट खास रहेगी. गृहमंत्री अमित शाह यहीं से चुनाव अभियान शुरुआत कर रहे हैं.
2. मेरठ की सरधना सीट भी महत्‍वपूर्ण है. यहां से भाजपा के फायर ब्रांड नेता संगीत सोम मैदान में हैं. उनकी छवि हिन्‍दूवादी नेता के रूप में है. पिछली बार भी जीत दर्ज की थी.
3. बागपत की छपरौली सीट हमेशा से आरएलडी के पास रही है. पिछली बार भी यहां से आरएलडी का उम्‍मीदवार जीता था लेकिन बाद में उसने भाजपा ज्‍वाइन कर ली थी.
4.मेरठ की हस्तिनापुर सीट भी खास रहेगी. यहां से कांग्रेस ने मॉडल अर्चना गौतम को चुनाव मैदान पर उतारा है.
5.दिल्‍ली बार्डर से जुड़ी नोएडा की सीट भी खास होगी, यहां से भाजपा के वरिष्‍ठ नेता और रक्षामंत्री के बेटे पंकज सिंह चुनाव मैदान पर हैं. पिछली बार जीत दर्ज की थी.

पूर्वांचल यानी सत्ता का प्रवेश द्वार

पूर्वांचल को सत्ता का प्रवेश द्वार माना जाता है. पूर्वांचल फतह करने के बाद ही यूपी की सत्ता पर कोई पार्टी काबिज हो सकती है, क्योंकि सूबे की करीब 30 फीसदी यानी 156 सीटें यहीं से आती हैं. यूपी को जीतने के लिए पूर्वांचल में जीत का परचम फहराना जरूरी माना जाता है. इसी फॉर्मूले से लगातार 2014 और 2019 लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें हासिल करने वाली बीजेपी मिशन-2022 के लिए जुट गई है. पीएम मोदी से लेकर सीएम योगी तक ने पूर्वांचल पर खास फोकस कर रखा है. पूर्वांचल के कुछ जिलों में सपा का भी अच्छा खासा असर है और कुछ सीटों पर बीएसपी का वोट भी अच्छा है. पूर्वांचल ही यूपी की छोटी पार्टियों की भी प्रयोगशाला है और इनमें अपना दल (एस), निषाद पार्टी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और जनवादी पार्टी शामिल हैं. भाजपा 2022 में बीजेपी पूर्वांचल में पूरी ताकत झोंकना चाहती है, इसलिए केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में इस बार पूर्वी यूपी से 2 चेहरों अनुप्रिया पटेल और पंकज चौधरी को जगह दी गई, जबकि पूर्वी यूपी से महेंद्रनाथ पाण्डेय, स्मृति ईरानी और राजनाथ सिंह केंद्र सरकार में पहले से मंत्री हैं. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी पूर्वांचल के गोरखपुर से आते हैं और पीएम मोदी भी पूर्वांचल के वाराणसी से सांसद हैं. पूर्वांचल में विधानसभा की 156 सीटें हैं. अगर 2017 के विधान सभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो भाजपा ने 106 सीटों पर कब्जा किया था. वहीं, सपा को 18, बसपा को 12, अपना दल को 8, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को 4, कांग्रेस को 4 और निषाद पार्टी को 1 सीट पर जीत मिली थी, जबकि 3 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी.

पूर्वांचल की पांच खास सीटें
1. सबसे खास सीट गोरखपुर सदर होगी. यहां से प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ चुनाव लड़ रहे हैं. वो यहीं से सांसद थे. यह सीट पूर्व में भाजपा के पास थी. इसलिए सबकी नजर इस सीट पर रहेंगी.
2.वाराणसी से प्रधानमंत्री चुनकर आते हैं, इसलिए शहर दक्षिणी सीट खास है, जहां काशी विश्‍वनाथ मंदिर है. यहां पर काशी कॉरिडोर का निर्माण किया गया है. इस इस सीट पर भी सब की नजर होंगी
3. पडरौना, कुशीनगर इस सीट पर भी सब की निगाहें रहेंगी. यहां से हाल में भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हुए स्‍वामी प्रसाद मौर्या चुनाव लड़ेंगे. उनकी राजीनीति का केन्‍द्र यही है. भाजपा में शामिल होने से पहले वो बसपा के प्रमुख नेताओं में एक थे.
4.गाजीपुर यह सीट भी महत्‍वपूर्ण हैं. यहां से स्‍वामी प्रसाद मौर्या के साथ भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हुए दारा सिंह चौहान चुनाव लड़ेंगे. वो भी पहले बसपा में थे फिर भाजपा में आए थे.
5. जहूराबाद, मऊ सीट खास रहेगी. यहां से शुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्‍यक्ष ओमप्रकाश राजभर चुनाव मैदान पर होंगे. वो पिछली बार भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़े थे, इस बार भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया है.

सत्‍ता की राजधानी अवध

सत्‍ता की राजधानी अवध क्षेत्र में है, प्रदेश की सत्‍ता के लिए अवध को जीतना भी जरूरी होता है, क्‍योंकि राजधानी लखनऊ इसी क्षेत्र में आता है. अवध क्षेत्र में भी भाजपा 2017 चुनाव में मजबूत रही है. वर्ष 2017 में 82 सीटों में से 67 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की है. हालांकि भाजपा छोड़कर सपा में गए कई विधायक अवध क्षेत्र से हैं. इस क्षेत्र में दूसरे नंबर पर सपा फिर बसपा रही है. अवध क्षेत्र की लखनऊ, मोहनलालगंज, मिश्रिख, सीतापुर, लखीमपुर, धौरहरा, श्रावस्ती, गोंडा, बाराबंकी, कैसरगंज, बहराइच, उन्‍नाव, रायबरेली, बलरामपुर, हरदोई, फैजाबाद और अंबेडकरनगर की 17 लोकसभा सीटों में 2019 में 16 में भाजपा ने जीत हासिल की थी, केवल रायबरेली सीट ऐसी थी जो भाजपा के खाते में नहीं आई थी. इन सीटों में ज्यादातर सीटों पर पासी, राजभर, बाल्मीकि, धोबी जैसे गैरजाटव अनुसूचित जाति व अति पिछड़े वर्ग की जातियों का बोलबाला है.

अवध की पांच हॉट सीट
1. क्षेत्र की हॉट सीटों में फैजाबाद जिले की अयोध्‍या है. राम मंदिर का भव्‍य निर्माण यहीं कराया जा रहा है. भाजपा सबसे पहले रामंदिर के सहारे सत्‍ता पर आयी थी. यहां 2017 में भाजपा जीत दर्ज की थी. सबकी नजर इस सीट पर रहेगी.
2. लखनऊ मध्‍य की क्षेत्र खास होगी. क्षेत्र में मुस्लिम वोटरों की संख्‍या अधिक है, इसके बावजूद ब्रजेश पाठक ने जीत दर्ज की है, जबकि इस इस बार भी ब्रजेश पाठक चुनाव मैदान पर है.
3. लखनऊ कैंट सीट भी खास रहेगी. यह इलाका पूर्व में कांग्रेस प्रदेश अध्‍यक्ष रीता बहुगुण जोशी का रहा है. अब वे प्रयागराज से सांसद हैं और बेटे को टिकट दिलाने की कोशिश कर रही है और टिकट के लिए सांसदी तक छोड़ने को तैयार हैं.
4. उन्‍नाव की भगवंत नगर क्षेत्र भी खास होगी. यह प्रदेश की सबसे बड़ी ब्राह्मण वोटों वाली विधानसभा सीट है. यहां से विधानसभा अध्‍यक्ष हृदय नारायण दीक्षित चुनाव जीते थे, उम्र अधिक होने की वजह से उनकी जगह किसी दूसरे ब्रह्मण उम्‍मीदवार को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी है.
5. बाराबंकी यह सीट भी अवध की खास सीट होगी. यहां क्षेत्र कांग्रेसी नेता पीएल पुनिया के प्रभाव वाला है. इसके अलावा सपा के बेनीप्रसाद वर्मा भी क्षेत्र है, जो लंबे समय तक केन्‍द्र में मंत्री रहे थे.

बुंदेलखंड (कानपुर ) में भाजपा का दबदबा

इस पूरे क्षेत्र में पिछले चुनाव में भाजपा का दबदबा रहा है. अगर बात केवल बुंदेलखंड क्षेत्र के 7 जिलों की 19 सीटों की हो तो सभी 19 सीटें भाजपा के खाते में गई थीं. यानी पूरे बुंदेलखंड में भाजपा ने क्‍लीन स्विप किया था. कानपुर क्षेत्र में भी भाजपा ने बढ़त हासिल की थी. भाजपा दोबारा यही इतिहास दोहराना चाह रही है. वहीं, सपा और बसपा इन क्षेत्र से कुछ सीटों पर जीत हासिल कर सत्‍ता की सीढ़ी तक पहुंचाना चाह रही हैं. बुंदेलखंड में झांसी, ललितपुर, जालौन, महोबा,बांदा, हमीरपुर चित्रकूट आते है.

यहां की पांच हॉट सीटें
1. झांसी सीट प्रमुख है. इसे बुंदेलखंड की राजधानी के रूप में जाना जाता है. यह शिक्षा से लेकर उद्योग के लिए हब है. यहां से दो बार भाजपा से विधायक रहे रवि शर्मा को मैदान में उतारा है.
2. ललितपुरसीट भी एक है. यह मध्‍य प्रदेश से जुड़ी हुई है, इसलिए से प्रवेश द्वार माना जाता है. जातिगत संतुलन बनाने के लिए इस सीट को खास माना जाता है. यहां पर सबसे अधिक कुशवाहा वोट है. भाजपा और सपा दोनों ने कुशवाहा उम्‍मीदवार उतारा है.
3. बबीना भी यहां की हाई प्रोफाइल सीट है. सपा के राष्‍ट्रीय कोषाध्‍यक्ष और सपा सरकार में मिनी मुख्‍यमंत्री कहे जाने वाले चन्द्रपालसिंह यादव के बेटे यहां से चुनाव मैदान पर हैं. तो भाजपा से उमा भारती के करीबी राजीव सिंह यादव चुनाव मैदान पर हैं.
4.कानपुर क्षेत्र में मैनपुरी की करहल सीट अब हॉट सीट हो गई है. यहां से सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव चुनाव मैदान पर हैं. इस क्षेत्र में सपा का कब्‍जा रहा है और सपा के लिए पूरी तरह से सुरक्षित सीट मानी जा रही है.
5. कन्‍नौज सीट भी प्रमुख सीट में शामिल हो गई है. यहां पर लोकसभा में भाजपा का कब्‍जा है, अखिलेश की पत्‍नी डिंपल यादव यहां से चुनाव हारी चुकी हैं लेकिन विधानसभा में शहर सीट पर सपा का कब्‍जा बरकरार रहा है. इस बार भाजपा ने पूर्व आईपीएस अधिकारी अरुण असीम को चुनाव मैदान में उतारकर रोचक बना दिया है. उन्‍होंने वीआरएस लेकर भाजपा ज्‍वाइन किया है.

2017 चुनाव में पार्टियों को वोट शेयर
भाजपा- 40.6 फीसदी
बीएस -22.3 फीसदी
सपा -21.7 फीसदी
कांग्रेस -6 फीसदी
निर्दलीय- 2.3 फीसदी
आरएलडी -2.1 फीसदी
अपना- .9 फीसदी
निषाद पार्टी -.6 फीसदी
शोहेलदेव भारतीय समाजपार्टी- .2 फीसदी

Tags: Assembly elections, Uttar Pradesh Assembly Elections, ​​Uttar Pradesh News

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