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UP Chunav: अखिलेश ने दिया स्वामी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को झटका, जानें बेटे को ऊंचाहार से टिकट न मिलने का कारण?

UP Chunav: अखिलेश ने दिया स्वामी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को झटका, जानें बेटे को ऊंचाहार से टिकट न मिलने का कारण?

अखिलेश यादव ने बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे को रायबरेली की ऊंचाहार सीट से टिकट नहीं दिया. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी)

अखिलेश यादव ने बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे को रायबरेली की ऊंचाहार सीट से टिकट नहीं दिया. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी)

UP Assembly Elections: अखिलेश यादव ने बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे को रायबरेली की ऊंचाहार सीट से टिकट नहीं दिया. स्वामी यहां से अपने बेटे उत्कृष्ट मौर्य के लिए पैरवी कर रहे थे, लेकिन यहां अखिलेश ने विधायक मनोज पांडेय पर ही भरोसा जताया है. इसे स्वामी प्रसाद की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को झटका माना जा रहा है.

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लखनऊ. समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Elections) के लिए अपने 159 और उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है. सपा की ओर से जारी उम्मीदवारों की लिस्ट की सबसे खास बात ये है कि हाल ही में बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे को सपा से टिकट नहीं दिया गया है. स्वामी रायबरेली की ऊंचाहार सीट से अपने बेटे उत्कृष्ट मौर्य के लिए टिकट की पैरवी कर रहे थे, लेकिन यहां अखिलेश ने विधायक मनोज पांडेय को ही टिकट दिया है. इसे स्वामी प्रसाद की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को झटका माना जा रहा है.

पिछले दिनों जब पिछड़ा वर्ग के नेता माने जाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य ने योगी कैबिनेट से इस्तीफा देकर साइकिल की सवारी की थी तो यूपी की सियासत में हलचल मच गई थी. स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी पर पिछड़ा और दलितों की उपेक्षा का आरोप लगाया था, लेकिन अचानक पाला बदलने के पीछे उनकी कुछ और ही राजनीतिक महत्वाकांक्षा नजर आ रही थी. पार्टी छोड़ने के बाद बीजेपी की ओर से भी यही प्रतिक्रिया सामने आई कि वह अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे थे.

सपा में आने के बाद खुद स्वामी प्रसाद मौर्य की तरफ से ऊंचाहार सीट से बेटे उत्कृष्ट मौर्य की राजनीतिक शुरुआत कराने की बात सामने आई थी, लेकिन सपा में भी ये आसान नहीं था. जिस सीट से स्वामी प्रसाद अपने बेटे की पैरवी कर रहे थे वहां से सपा से ही मनोज पांडेय चुनाव जीते हैं. ऐसे में उनकी राह आसान नहीं थी. मनोज पांडेय को भी अखिलेश का करीबी माना जाता रहा है. उनका का टिकट काटना एक तरह से ब्राह्मण वोटर्स के लिए सही नहीं था. शायद यही कारण है कि अखिलेश ने इस सीट पर टिकट काटकर जोखिम उठाना उचित नहीं समझा.

क्या है ऊंचाहार सीट का जातीय गणित
रायबरेली से लगभग 40 किमी दूर स्थित ऊंचाहार सीट का जातीय गणित भी बेहद महत्व रखता है. इस सीट पर दलित मतदाता सबसे अधिक हैं. यहां पर यादव, मौर्या, ब्राह्मण, राजपूत, मुस्लिम, एससी, लोध, कुर्मी समेत ओबीसी मतदाताओं की संख्या भी अच्छी खासी है. 2017 में भाजपा ने स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे उत्कृष्ट मौर्य को टिकट दिया था, लेकिन वह सपा के मनोज पांडे से हार गए थे. मनोज पांडेय की इस इलाके में पंडित मतदाताओं के साथ अन्य जातियों में भी पकड़ मजबूत मानी जाती है. यही कारण है कि अखिलेश ने उन पर दोबारा भरोसा जताया है.

बेटी के बाद बेटे को नेता बनाने के लिए परेशान हैं मौर्य
स्‍वामी प्रसाद मौर्य की पुत्री संघमित्रा मौर्य बदायूं से भारतीय जनता पार्टी की सांसद हैं. पिता के भाजपा छोड़कर सपा में चले जाने के बाद भी संघमित्रा मौर्य भाजपा में ही हैं. पार्टी छोड़ने की वजह भी स्वामी प्रसाद के बेटे को बीजेपी का टिकट नहीं मिलना बताया गया. उन्होंने सपा ज्वाइन की तो माना जाने लगा कि अखिलेश उनकी मांग को मानकर मनोज पांडेय का टिकट काट देंगे. फिलहाल ऊंचाहार सीट से स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे का पत्ता कट गया है. चर्चा है कि सपा उनके बेटे को कहीं और से ​मैदान में उतार सकती है.

Tags: Akhilesh yadav, Swami prasad maurya, Utkrisht Maurya, Uttar Pradesh Assembly Elections

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