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UP: आज से घर-घर जाकर TB की जांच, शुरू हुआ 1 महीने का खोजी अभियान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (File Photo)
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (File Photo)

Fight against TB: कोरोना काल में टीबी मरीजों (TB Patients) के इलाज में लगा पूरा तंत्र COVID-19 की रोकथाम में लगा दिया गया था. यही वजह रही कि इस साल नए टीबी मरीजों की खोज प्रभावित हुई है. यह अभियान मुख्य रूप से टीबी के मरीजों की खोज के लिए शुरू किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 26, 2020, 10:16 AM IST
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा लोगों की स्वास्थ्य जांच के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Government) ने 1 महीने का अभियान लॉन्च किया है. इसके तहत लोगों की टीबी (Tuberculosis) की जांच की जाएगी. बता दें 1993 में भारत सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से पाई गई कमियों की पूर्ति कर राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम गठित किया गया. संशोधित कार्यक्रम के अंतर्गत डॉट्स पद्धति से क्षय रोगियों का उपचार कर क्षय रोग के प्रसार को रोकना है.

यह अभियान मुख्य रूप से टीबी के मरीजों की खोज के लिए शुरू किया गया है. अभियान 26 दिसंबर से लेकर 25 जनवरी तक चलाया जाएगा. 3 चरणों में बांटे गए इस अभियान को सही तरीके से अंजाम दिया गया तो सोसाइटी का एक भी सेक्टर ऐसा नहीं होगा, जिसकी सघनता से जांच नहीं हो जाएगी. किसी भी संभावित टीबी मरीज के इस अभियान में छूटने की आशंका को खत्म करने की कोशिश की गई है.

बता दें कि कोरोना काल में टीबी मरीजों के इलाज में कुछ बाधा आई थी. टीबी पेशेंट के इलाज में लगा पूरा तंत्र कोरोना में लगा दिया गया था. यही वजह रही कि इस साल नए टीबी मरीजों की खोज प्रभावित हुई है.



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 सभी डीएम को भेजी गई चिट्ठी

अब इस भयानक जानलेवा संक्रामक बीमारी के प्रति राज्य सरकार ने बहुत गंभीर प्रयास शुरू किए हैं. अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने सभी जिलाधिकारियों को चिट्ठी लिखी है कि 1 महीने का सघन अभियान चलाकर टीबी मरीजों की खोज की जाए. खास बात यह है कि टीबी के साथ-साथ कोरोना की भी जांच की जाएगी.

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यूपी में घर-घर जाकर ढूंढ़े जाएंगे टीबी के मरीज


इस तरह चरणबद्ध तरीके से होगी मरीजों की खोज
10 दिनों का पहला चरण का अभियान 26 दिसंबर से 1 जनवरी तक चलाया जाएगा. इसके तहत अनाथालय, वृद्ध आश्रम, नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, नवोदय विद्यालय, मदरसा और जेल में रह रहे व्यक्तियों और बच्चों की जांच की जाएगी. इन जगहों पर रह रहे लोगों की टीबी और कोरोना की जांच की जाएगी.

अभियान का दूसरा चरण 2 से 12 जनवरी तक चलाया जाएगा. इसके तहत शहरी और ग्रामीण मलिन बस्ती के लोगों की जांच की जाएगी. टीबी के लिए ऐसी बस्तियां बहुत ही सेंसिटिव हुआ करती हैं. ऐसी बस्तियों में प्रदेश की 20 फीसदी आबादी रहती है. स्वास्थ्यकर्मी यहां रह रहे लोगों की सघनता से टीबी की जांच करेंगे. इसी चरण में जिले के सभी एड्स और शुगर के मरीजों की भी टीबी की जांच की जाएगी. ऐसे लोग शहर या गांव कहीं भी रह रहे होंगे, इनकी टीबी की स्क्रीनिंग भी की जाएगी. प्रदेश में ऐसा पहली बार किया जा रहा है.

अभियान का तीसरा चरण 13 से 25 जनवरी तक चलाया जाएगा. इस अभियान में भी बड़े पैमाने पर टीबी मरीजों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है. इस अभियान के तहत शहर के प्राइवेट डॉक्टरों से स्वास्थ्य कर्मी संपर्क बनाएंगे और उनसे जानकारी लेंगे. बता दें कि बड़े पैमाने पर लोग सरकारी अस्पतालों के अलावा प्राइवेट डॉक्टरों के यहां टीबी का इलाज करा रहे होते हैं. इन सबकी जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में नहीं रहती.

देश में सबसे ज्यादा यूपी में टीबी के मरीज
इससे पहले भी राज्य सरकार ने टीबी मरीजों की खोज के लिए एक अभियान लांच किया था. बता दें कि सभी संक्रामक बीमारियों में टीबी ऐसी बीमारी है, जिससे सबसे ज्यादा लोग मरते हैं. पूरे देश में जितने टीबी मरीज हैं, उसका पांचवा हिस्सा अकेले यूपी में हैं. ऐसे में इस बीमारी की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है. कोरोना काल में भले ही टीबी मरीजों की खोज और उनके इलाज में थोड़ी समस्या आई हो लेकिन अब राज्य सरकार ने पुरजोर तरीके से इस लड़ाई में जुटने का फैसला किया है.
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