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Gomti River Front Scam में हुए अजब-गजब खेल, दंपति ने डाला अलग-अलग टेंडर, पत्नी को मिला 1.88 करोड़ का ठेका

Gomti River Front Scam में हुए अजब-गजब खेल, दंपति ने डाला अलग-अलग टेंडर, पत्नी को मिला 1.88 करोड़ का ठेका

सीबीआई जांच में रिवर फ्रंट घोटाले में अजब गजब खेल सामने आने लगे हैं.

सीबीआई जांच में रिवर फ्रंट घोटाले में अजब गजब खेल सामने आने लगे हैं.

UP News: गोमती नदी में 1.2 किलोमीटर की सिल्ट सफाई का ठेका सुनीता यादव की गलोबल कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया. सुनीता की ओर से सफाई दी गई कि उनका बिजनेस उनके पति त्रिशुनपाल सिंह देखते हैं. सीबीआई तब चौंकी जब जांच में पता चला कि इसी काम के लिए दूसरे नंबर पर एल-2 मेसर्स अवंतिका बिल्डर्स थी, जिसके प्रोपराइटर सुनीता के पति त्रिशुनपाल ही थे.

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लखनऊ. पूर्ववर्ती सपा सरकार में अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के ड्रीम प्रोजेक्ट गोमती रिवर फ्रंट में हुए घोटाले (Gomti River Front Scam) की जांच में अजब-गजब खेल सामने आ रहे हैं. दरअसल, घोटाले की गंगा में सब डुबकी लगा रहे थे. चाहे वह अधिकारी हों, इंजीनियर या फिर ठेकेदार. घोटाला करने और टेंडर लेने के लिए सारे पैंतरे अपनाए गए, लेकिन सीबीआई (CBI) की शुरुआती जांच में ही पकड़ लिए गए. ऐसे कई कारनामों का खुलासा सीबीआई ने अपनी प्रारंभिक जांच में किया है. गोमती नदी में 1.2 किलोमीटर की सिल्ट सफाई के एक ही काम को हथियाने के लिए पति-पत्नी दोनों ने अलग-अलग टेंडर डाले. एल-1 (लोएस्ट -1, सबसे कम रेट वाला) बनने के लिए ये किया गया था, क्योंकि अधिकारी तो टेंडर देने के लिए तैयार बैठे ही थे. इसमें पत्नी ने 1.88 करोड़ रुपये का ठेका हथिया लिया.

गोमती नदी में 1.2 किलोमीटर की सिल्ट सफाई का ठेका सुनीता यादव की गलोबल कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया. सुनीता की ओर से सफाई दी गई कि उनका बिजनेस उनके पति त्रिशुनपाल सिंह देखते हैं. सीबीआई तब चौंकी जब जांच में पता चला कि इसी काम के लिए दूसरे नंबर पर एल-2 मेसर्स अवंतिका बिल्डर्स थी, जिसके प्रोपराइटर सुनीता के पति त्रिशुनपाल ही थे. एक बात साफ हो गई कि एल-1 आने के लिए पति-पत्नी आपस में प्रतिस्‍पर्धा कर रहे थे. एक बात साफ हो गई कि अफसरों ने जिन्हें ठेका देना चाहा, उन्हें टेंडर प्रक्रिया में एल-1 बनाने के लिए खेल किया.

ऐसे किया गया बड़ा खेल
सीबीआई ने एफआईआर में कहा कि इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 1513 करोड़ रुपये आंकी गई थी. इसमें से 1437 करोड़ खर्च किए गए. 4 टेंडरों के माध्यम से 12 कामों के ठेके दिए गए, जिन पर 1031 करोड़ का खर्च हुआ. 407 करोड़ लागत के शेष 661 कार्यों को सीबीआई ने प्रारंभिक जांच में शामिल किया. यह परियोजना 2014-15 में शुरू होकर 31 मार्च 2017 तक चली थी, लेकिन विवादों में तब घिरी जब 90 फ़ीसदी बजट खर्च होने के बाद भी 60 फीसदी काम पूरा नहीं हुआ. मार्च 2017 में योगी सरकार बनने के बाद पहली जांच रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट पर ही बैठी, फिर न्यायिक जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद सीबीआई को जांच सौंपी गई.

Tags: CBI investigation, CBI Probe, Lucknow news

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