KGMU: ऑक्सीजन सप्लाई में मिली जानलेवा गड़बड़ी, शासन ने पुष्पा सेल्स कंपनी को किया ब्लैक लिस्ट
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KGMU: ऑक्सीजन सप्लाई में मिली जानलेवा गड़बड़ी, शासन ने पुष्पा सेल्स कंपनी को किया ब्लैक लिस्ट
केजीएमयू (File Photo)

उत्तर प्रदेश शासन में विशेष सचिव आलोक कुमार पांडेय की तरफ से जारी आदेश में मेसर्स पुष्पा सेल्स कंपनी को ऑक्सीजन सप्लाई के थर्ड पार्टी ऑडिट में गंभीर अनियिमतता का दोषी मानते हुए ब्लैकलिस्ट (Blacklist) कर दिया गया है.

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लखनऊ. किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के शताब्दी फेज-दो में ऑक्सीजन सप्लाई (Oxygen Supply) के लिए पाइपलाइन बिछाने में थर्ड पार्टी ऑडिट में सामने आई खामियों के चलते कंपनी मैसर्स पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड (M/S Pushpa Sales Pvt Ltd.) को ब्लैक लिस्ट (Black List) कर दिया गया है. विशेष सचिव आलोक कुमार पांडेय की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक थर्ड पार्टी ऑडिट में कई ऐसी गड़बड़ियां मिलीं, जो मरीजों में वके लिए जानलेवा हो सकती थीं. आदेश में कंपनी द्वारा 2017 में बीआरडी, गोरखपुर में ऑक्सीजन सप्लाई में गड़बड़ी के चलते बच्चों की मौत का जिक्र भी किया गया है. जिस मामले में भी पुष्पा सेल्स के खिलाफ एफआईआर कराई गई थी.

ऑडिट में एयर रिसीवर टैंक भी काम नहीं करता मिला

थर्ड पार्टी ऑडिट में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं. ऑडिट के वक्त कॉपर पाइप लाइन का ज्यादातर हिस्सा फाल्स सीलिंग से ढका था, लिहाजा जांच नहीं हो सकी. इसके अलावा एयर रिसीवर टैंक भी काम करता नहीं मिला था. पाइपलाइन की वेल्डिंग पर भी सवाल उठे. ऑक्सीजन प्लांट रूम और वार्डों में पाइपलाइन के साथ लगने वाले सैडल डैमेज मिले थे. सर्जिकल ऑनकोलॉजी में पाइप काफी कम ऊंचाई पर लगा था.



जून में जारी हुआ था थर्ड पार्टी ऑडिट का आदेश
केजीएमयू के शताब्दी फेज-2 में ऑक्सीजन सप्लाई का काम वर्ष 2018 में पूरा करके पुष्पा सेल्स ने इसे केजीएमयू को हैंडओवर कर दिया था. इस साल जून में गड़बड़ियों की शिकायत के बाद थर्ड पार्टी ऑडिट कराने का आदेश 27 जून को हुआ था. इससे पहले गड़बड़ियों का मुद्दा उठा था, जिसमें पाइपलाइन में ऑक्सीजन की मात्रा, प्रेशर, नमी और एयर ड्रायर के मानकों पर गंभीर सवाल उठाए थे. यही नहीं पाइपलाइन में ऑक्सीजन है या नहीं? इसकी चेतावनी के लिए अलार्म सिस्टम तक काम करते हुए नहीं मिले.

आला अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे थे सवाल

कंपनी पुष्पा सेल्स की तमाम गड़बड़ियों के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे चिकित्सा शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं. यही नहीं गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में मासूमों की मौत में आरोपित इसी कंपनी को मेरठ मेडिकल कॉलेज में भी ऑक्सीजन सप्लाई का टेंडर दे दिया गया था. न्यूज 18 ने चिकित्सा शिक्षा विभाग की इस लापरवाही और कंपनी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कई खुलासे किए थे, जिसके बाद शासन ने टेंडर निरस्त कर दिया था और डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ एके त्रिपाठी को भी हटाया गया.

KGMU Oxygen
केजीएमयू में ऑक्सीजन सप्लाई मामले में विशेष सचिव का आदेश


निर्माण निगम के अफसरों पर भी सवाल

शासन की तरफ से ब्लैक लिस्ट करने के आदेश में निर्माण निगम के स्थानीय अफसरों और इंजीनियरों कि भूमिका पर भी सवाल उठाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी से मिलीभगत कर आधे-अधूरे और मानकों से घटिया काम के बावजूद केजीएमयू का ऑक्सीजन प्लांट हैंडोवर ले लिया गया. ऐसी ही गड़बड़ी गोरखपुर के मामले में भी सामने आई थी. माना जा रहा है कि अब निर्माण निगम के ऐसे अफसरों कि पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी है.
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