डॉ पीके सिंह को गोरखपुर मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल पद का अतिरिक्त कार्यभार

News18Hindi
Updated: August 13, 2017, 12:55 PM IST
डॉ पीके सिंह को गोरखपुर मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल पद का अतिरिक्त कार्यभार
आरडी मेडिकल कॉलेज में दौरे के समय सीएम योगी (File)
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Updated: August 13, 2017, 12:55 PM IST
योगी सरकार ने राजकीय मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक प्रधानाचार्य डॉ पीके सिंह को गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज का भी अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया है.

अपर मुख्य सचिव अनीता भटनागर जैन द्वारा जारी आदेश के अनुसार डॉ पीके सिंह को इस दौरान कोई अतिरिक्त वेतन भत्ता आदि देय नहीं होगा. उन्हें निर्देश दिया जाता है कि वह तत्काल प्रभाव से कार्यभार ग्रहण कर लें.

इससे पहले गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत मामले में सरकार ने शनिवार को प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और मामले की जांच के लिए प्रमुख सचिव चिकित्सा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी भी गठित कर दी है. कमेटी जल्द ही अपनी जांच रिपोर्ट देगी जिसके बाद दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.

गोरखपुर पहुंचे प्राविधिक एवं चिकित्सा मंत्री आशुतोष टंडन और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने पूरे मामले में बारीकी से जांच की. जांच के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए टंडन ने बताया कि ऑक्सीजन आपूर्ति ठप होने की बात सामने आई है. डीलर ने 1 अगस्त को डीलर ने पेमेंट के लिए पत्र लिखा था. जिसे 5 अगस्त को डीजी चिकित्सा को प्रेषित कर दिया गया. वहां से 7 अगस्त को पैसा प्रिंसिपल को मिला, लेकिन भुगतान 11 अगस्त को हुआ. ऐसा क्यों हुआ इसकी जांच हो रही है.

मंत्री ने कहा कि ऑक्सीजन एक जीवन रक्षक रसायन है, उसकी आपूर्ति क्यों ठप हुई, इसकी जांच के लिए कमेटी बना दी गई है. फिलहाल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

प्रेस वार्ता की शुरुआत करते हुए मंत्री और सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा मुख्यमंत्री 9 जुलाई और 9 अगस्त को बीआरडी मेडिकल कॉलेज आए थे. इस दौरान ने उन्होंने हर मुद्दे पर बात की थी, लेकिन ऑक्सीजन सप्लाई का मुद्दा किसी ने भी नहीं रखा.

उन्होंने कहा कि जांच में पता चला कि 10 अगस्त की शाम 7.30 बजे लिक्विड ऑक्सीजन प्रेशर कम होने लगा तो रिज़र्व 52 ऑक्सीजन सिलिंडर लगाकर काम चलाया गया.

इसके बाद रात डेढ़ बजे तक काम चला और फिर डॉक्टरों ने एम्बु पंप से काम चलाया. इस दौरान सिर्फ सात बच्चों की मौत हुई वो भी ऑक्सीजन की कमी की वजह से नहीं.
First published: August 13, 2017
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