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जेल में बंद डॉ. कफील खान की बढ़ीं मुश्किलें, तीन महीने के लिए बढ़ाया गया NSA

एनएसए के तहत अब कफील खान 13 फरवरी से कुल 9 महीने तक जेल में रहेंगे.

एनएसए के तहत अब कफील खान 13 फरवरी से कुल 9 महीने तक जेल में रहेंगे.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में सीएए के खिलाफ धरना प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोप में डॉ. कफील खान को गिरफ्तार किया गया था. 13 फरवरी से जेल में बंद खान पर यूपी सरकार ने एनएसए (NSA) लगा रखा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 17, 2020, 12:54 AM IST
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लखनऊ. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (Aligarh Muslim University) में नागरिकता संशोधित कानून (CAA) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित रूप से भड़काऊ बयान देने के आरोप में एनएसए (NSA) के तहत जेल में बंद डॉ. कफील खान (Dr Kafeel Khan) की मुश्किलें बढ़ गई हैं. फिलहाल उन पर लगे एनएसए की अवधि में 3 महीने का इजाफा कर दिया गया है.

आपको बता दें कि डॉ. कफील खान पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान 10 दिसंबर 2019 को भड़काऊ बयान देने का आरोप है. जबकि एडवाइजरी बोर्ड और अलीगढ़ के डीएम की रिपोर्ट पर 13 फरवरी 2020 को कफील खान को 6 महीने के लिए एनएसए के तहत बंद किया गया था. वहीं, एक आर फिर अब जेल में रखे जाने की अवधि को एडवाइजरी बोर्ड की अनुशंसा पर बढ़ाया गया है.

तीसरी बार बढ़ी एनएसए की अवधि
यूपी सरकार के गृह विभाग के 4 अगस्‍त 2020 के ऑर्डर के मुताबिक, डॉ. कफील खान के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई 13 फरवरी 2020 को अलीगढ़ डीएम की सिफारिश पर हुई थी. तब से वह जेल में हैं. साफ है कि वह करीब 9 महीने तक जेल में रहेंगे. आपको बता दें कि डॉ. कफील के खिलाफ एनएसए की अवधि तीसरी बार बढ़ाई गई है. जबकि इस मामले में एडवाइजरी बोर्ड का कहना है कि खान को एनएसए के तहत जेल में रखने के पर्याप्‍त कारण हैं.
2017 में आए थे चर्चा में


बता दें कि डॉक्टर कफील खान साल 2017 में तब चर्चा में आए थे जब गोरखपुर के राजकीय बीआरडी अस्पताल में दो दिन के अंदर 30 बच्चों की मौत हो गई थी. गौरतलब है कि डॉक्टर कफील खान को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कथित रूप से ऑक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौत के मामले में आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया था. घटना के वक्त वह एईएस वार्ड के नोडल अधिकारी थे. बाद में शासन ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था. वे लगभग 7 महीने तक जेल में बंद रहे. अप्रैल 2018 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी. वहीं, डॉ. कफील ने अपने निलंबन को लेकर चल रही जांच को कोर्ट में चुनौती दी थी.
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