उर्दू शिक्षक भर्ती मामला: हाईकोर्ट ने योगी सरकार की पुनर्विचार याचिका की खारिज

बेसिक स्कूलों में उर्दू शिक्षक भर्ती मामले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर की गई पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: March 25, 2019, 6:41 PM IST
उर्दू शिक्षक भर्ती मामला: हाईकोर्ट ने योगी सरकार की पुनर्विचार याचिका की खारिज
प्रतीकात्मक तस्वीर
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Updated: March 25, 2019, 6:41 PM IST
बेसिक स्कूलों में उर्दू शिक्षक भर्ती मामले में योगी सरकार को बड़ा झटका लगा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर की गई पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है. बता दें कि सपा सरकार में निकाली 4000 गई पदों पर उर्दू शिक्षकों की भर्ती को योगी सरकार ने निरस्त कर दिया था. इसके पीछे तर्क दिया गया कि पहले से ही उर्दू के शिक्षक मानक से अधिक हैं. ऐसे में अभी उर्दू के और शिक्षकों की जरूरत नहीं है.

सरकार के इस फैसले के खिलाफ उर्दू टीचर्स एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नियुक्ति देने का आदेश दिया था. जिसके बाद राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में पुर्नविचार याचिका दाखिल की गई. जिसे हाईकोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दिया.

क्या था पूरा मामला?
सपा सरकार ने 15 दिसंबर, 2016 को प्राथमिक विद्यालयों के लिए 16,460 पदों पर सहायक अध्यापकों की भर्ती निकाली थी. इनमें 4 हजार पद उर्दू सहायक अध्यापकों के लिए रखे गए थे. लेकिन भर्ती पूरी होने से पहले ही सरकार बदली और मार्च 2017 में योगी सरकार ने भर्तियों की समीक्षा की बात कहते हुए इस पर रोक लगा दी. इस मामले में जब अभ्यर्थी हाईकोर्ट गए तो कोर्ट ने सरकार को भर्ती पूरी करने के निर्देश दिए.

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मई 2018 में बेसिक शिक्षा विभाग ने 16,460 पदों की भर्ती में से 12,460 पदों पर नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए लेकिन 4 हजार उर्दू शिक्षकों की भर्ती पर फैसला नहीं हुआ. बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार इस समय प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में करीब 87,200 छात्र उर्दू पढ़ने वाले हैं. इन छात्रों को पढ़ाने के लिए पहले ही 15,800 के करीब उर्दू के शिक्षक हैं. यानी एक शिक्षक पर 6 छात्रों से भी कम का रेशियो आता है, जबकि शिक्षा का अधिकार एक्ट के तहत 30 छात्रों पर एक शिक्षक नियुक्त करने का मानक है.

(रिपोर्ट- सर्वेश दुबे)
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First published: March 25, 2019, 6:36 PM IST
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