यूपी छठा ऐसा राज्य जिसने 'वन नेशन, वन राशन कार्ड' सिस्टम रिफॉर्म्स को किया पूरा

उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के अलावा तेलंगाना, गोवा, कर्नाटक और त्रिपुरा ही वे राज्य हैं जिन्होंने यह मुकाम हासिल किया है.
उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के अलावा तेलंगाना, गोवा, कर्नाटक और त्रिपुरा ही वे राज्य हैं जिन्होंने यह मुकाम हासिल किया है.

यूपी ने 'वन नेशन, वन राशन कार्ड' सिस्टम को लागू करने संबंधी पीडीएस में सफलतापूर्वक सुधार किया है. इसकी वजह से यूपी 4,851 करोड़ रुपये ओपन मार्केट बोरोइंग से उधार लेने योग्य बन गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2020, 7:27 PM IST
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लखनऊ. देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) को ओपन मार्केट बोरोइंग से अतिरिक्त उधार लेने की अनुमति दे दी है. सार्वजनिक वितरण प्रणाली और इज ऑफ डूइंग बिजनेस में सफलतापूर्वक किए गए सुधार की वजह से केंद्र सरकार (central government) ने इन दो राज्यों को यह अनुमति दी है. ये दोनों राज्य अब अतिरिक्त 7,376 करोड़ रुपये अतिरिक्त उधार ले सकेंगे.

उत्तर प्रदेश को मिलेगा यह फायदा

उत्तर प्रदेश देश का ऐसा छठा राज्य बन गया है, जिसने 'वन नेशन, वन राशन कार्ड' सिस्टम को लागू करने संबंधी पीडीएस में सफलतापूर्वक सुधार किया है. इस कोशिश की वजह से उत्तर प्रदेश सरकार 4,851 करोड़ रुपये ओपन मार्केट बोरोइंग से उधार लेने योग्य बन गई है. योगी सरकार इस रकम का इस्तेमाल कोविड 19 संकट की परिस्थितियों से निपटने में इस्तेमाल कर सकती है.



आंध्र प्रदेश पहला ऐसा राज्य जिसने यह योग्यता हासिल की
आंध्र प्रदेश देश का पहला वह राज्य है जिसने इज ऑफ डूइंग बिजनेस में सफलतापूर्वक सुधार किया है. इस उल्लेखनीय कदम की वजह से आंध्र प्रदेश सरकार ओपन मार्केट बोरोइंग से 2,525 करोड़ रुपये का उधार ले सकेगी. इससे पहले 'वन नेशन, वन राशन कार्ड' को लागू करने के लिए पीडीएस में आंध्र प्रदेश ने सुधार कर लिया था. उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के अलावा तेलंगाना, गोवा, कर्नाटक और त्रिपुरा ही वे राज्य हैं जिन्होंने यह मुकाम हासिल किया है.



इन मापदंडों के आधार पर राज्यों को मिलती है यह सुविधा

'वन नेशन, वन राशन कार्ड' को लागू करने के लिए पीडीएस और इज ऑफ डूइंग बिजनेस क्षेत्र में सुधार के आधार पर राज्यों को केंद्रीय वित्त मंत्रालय ये सुविधा लेने की अनुमति प्रदान करता है. खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ही वह नोडल मंत्रालय है, जो राज्यों के पीडीएस सिस्टम में सुधार के दावों की पुष्टि करता है. जिसके आधार पर राज्यों को उनके स्टेट जीडीपी का 0.25 फीसदी लिमिट तक उधार लेने की अनुमति दी जाती है. राज्य पहले एसेसमेंट के तौर पर जिलास्तर पर बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान को पूरा करेगा. डीपीआईआईटी द्वारा सर्कुलेट किए गए नियमों के मुताबिक राज्य प्रमाणपत्रों का रेन्यूएबल, मंजूरी के साथ-साथ व्यवसाय करने संबंधी विभिन्न गतिविधियों के लिए अथॉरिटी से लाइसेंस लेने संबंधी प्रक्रिया को समाप्त करेगा. इसके लिए जरूरी फीस का भुगतान ऑनलाइन करने की व्यवस्था होगी. इसके अलावा राज्य कम्प्यूटराइज्ड सेंट्रल रैन्डम इंस्पेक्शन सिस्टम को लागू करेगा. कोई भी एक ही इंस्पेक्टर सालों भर मामले की जांच नहीं करेगा. कारोबार करने वाले व्यवसायियों को जांच करने से पहले नोटिस दिया जायेगा. 48 घंटे में जांच रिपोर्ट अपलोड करनी होगी.

कोविड 19 काल में केंद्र सरकार ने राज्यों की दी थी ये सुविधाएं

कोरोना महामारी को देखते हुए केंद्र सरकार ने मई 2020 में राज्यों को यह सुविधा दी थी कि वे साल 2020-21 के लिए अपने स्टेट जीडीपी का 2 फीसदी अतिरिक्त रकम का उधार उठा सकते हैं. इसके लिए केंद्र सरकार ने 4,27,302 करोड़ रुपये की रकम की व्यवस्था की थी. इसमें से 1 फीसदी की उधारी चार मापदंडों के आधार पर अनुमति देने का प्रावधान किया गया था. 1. 'वन नेशन, वन राशन कार्ड' सिस्टम को लागू करना. 2. इज ऑफ डूइंग बिजनेस रिफोर्म को लागू करना. 3. अर्बन लोकल बॉडी या यूटिलिटी रिफोर्म करना और 4. पॉवर सेक्टर में रिफॉर्म करना शामिल था.
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