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UP Assembly Election 2022: इस बार चुनावी रण में जुमलों की बौछार, जानिए कौन-कौन से शब्द मचा रहे धूम

इस बार यूपी विधानसभा चुनाव में हो रही जुमलों की बौछार

इस बार यूपी विधानसभा चुनाव में हो रही जुमलों की बौछार

UP Political News: चुनावी बादल धीरे-धीरे घने होते जा रहे हैं. ऐसे में तीखे बयानों की बिजली कड़कनी शुरु हो गयी है. 2019 के अली, बजरंग बली और बजरंग अली की जगह 2022 में अब्बाजान, चचाजान, बुल्डोजर और एक - 47 ने अभी तक अपनी जगह बना ली है.

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लखनऊ. नेताओं की भाषा बताने लगी है चुनाव (UP Assembly Election 2022) किस ओर जा रहा है. बहुत पहले कुछ समाजशास्त्रियों ने चुनाव में ट्रिपल सी की बात कही थी. यानी कास्ट, कोरोना और कम्यूनलिज़्म. इन तीनों में से कम्यूनलिज्म फिर से सबसे तेजी से चढ़ता दिख रहा है. 2019 में हुए लोकसभा चुनाव का मंजर तो याद है न. तब अली, बजरंग बली और फिर बजरंग अली की चर्चा जोरों पर थीं. इस बार अभी तक अब्बाजान, चचाजान, बुल्डोजर और एके-47 जैसे शब्द चर्चा में आ चुके हैं. आगे जाने कौन-कौन से नये जुमले क्या क्या गुल खिलायेंगे.

चुनावी बादल धीरे-धीरे घने होते जा रहे हैं. ऐसे में तीखे बयानों की बिजली कड़कनी शुरु हो गयी है. 2019 के अली, बजरंग बली और बजरंग अली की जगह 2022 में अब्बाजान, चचाजान, बुल्डोजर और एक – 47 ने अभी तक अपनी जगह बना ली है. सीएम योगी ने अब्बाजान शब्द को लांच किया तो राकेश टिकैत ने चचाजान को लांच कर दिया है. डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने भी एके-47 शब्द को चला दिया है. इन तीनों शब्दों की चर्चा जोरों पर हैं. आशंका तो ऐसी है कि ये सिलसिला और बढ़ता ही जायेगा.

सीएम योगी ने छोड़े अब्बाजान के तीर 
बीते रविवार को सीएम योगी ने फिर से कहा कि 2017 से पहले सारा राशन अब्बाजान कहने वाले हजम कर जाते थे. तब सारा राशन नेपाल और बांग्लादेश पहुंच जाता था. सबसे पहले उन्होंने पिछले महीने 7 अगस्त को एक निजी टीवी चैनल के सम्मेलन में बोलते हुए अब्बाजान शब्द का इस्तेमाल किया था. तब उन्होंने कहा था कि रामलला हम आयेंगे मंदिर वहीं बनायेंगे, ये हमीं ने कहा था. और हमने अपनी बात कितना सच किया है ये इससे पता चलता है कि अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण शुरु हो गया है. अखिलेश यादव पर तंज करते हुए सीएम य़ोगी ने कहा था कि उनके अब्बाजान तो कहते थे कि वहां परिंदा भी पर नहीं मारने देंगे. यहीं से यूपी के चुनाव में अब्बाजान शब्द उतर आया. पूरे महीने सपा और बीजेपी में अब्बाजान शब्द को लेकर बयानबाजी चलती रही.

टिकैत ने लॉन्च किया चचाजान
एक महीने बाद अब्बाजान की जगह चचाजान ने ले ली है. अब किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने इसे आगे बढ़ाया है. उन्होंने AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी को चचाजान कहकर पुकारा है. टिकैत ने एक सभा में कहा कि बीजेपी का चचाजान आ चुका है यूपी में, ओवैसी नाम का. उसका फुल आशीर्वाद है. वो गाली देगा ये कोई मुकदमा दर्ज नहीं करेंगे. वो कुछ भी करेगा, इनका चचाजान है. वो किसानों को बर्बाद करेगा. ये सभी ए और बी टीम हैं.

बुलडोजर बनाम AK-47
दूसरी ओर बुलडोजर और एके 47 फेमस हो रहे हैं. योगी सरकार में माफियाओं की करोड़ों की बेनामी संपत्ति ढ़हायी गयी है. इसपर तंज कसते हुए और विरोध करते हुए अखिलेश यादव ने कई मर्तबा कहा है कि बीजेपी को अपना चुनाव चिन्ह बुलडोजर रख लेना चाहिए. उनकी जुबान से फुटे बुलडोजर शब्द ने एके-47 को यूपी की चुनावी मार्केट में लांच कर दिया है. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने कहा है कि अखिलेश यादव को अपना चुनाव चिन्ह एके 47 रख लेना चाहिए. उन्होनें सिर्फ बुलडोजर का ही जवाब नहीं दिया बल्कि अखिलेश यादव को कटघरे में भी खड़ा किया. बीजेपी नेता हमेशा से अखिलेश सरकार पर माफियाओं और आतंकियों की सरपरस्ती का आरोप लगाते रहे हैं.

2019 में हिट हुए थे ये जुमले
2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में अभी कई महीने बाकी हैं. ऐसे में कई नये जुमलों की पैदाईश तय है. इससे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में मायावती के एक बयान से ऐसे ही शब्दों की पैदाईश हुई थी. सहारनपुर में हुई एक रैली में तब मायावती ने कहा था कि दलित और मुसलमान एक हो जायें तो जीत पक्की होगी. इसके जवाब में सीएम योगी ने कहा था कि सपा और बसपा को यदि अली की जरूरत है तो हमारे पास बजरंग बली हैं. उनके इस बयान पर आजम खान ने दोनों शब्दों को मिलाकर बजरंग अली के नारे लगवाये.

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