UP Panchayat Chunav: 12.39 करोड़ मतदाता चुनेंगे गांव की सरकार, 80762 मतदान केंद्रों पर डालेंगे वोट

26 को तीसरे और 29 अप्रैल को चौथे चरण के लिए वोट डाले जाएंगे. (सांकेतिक फोटो)

26 को तीसरे और 29 अप्रैल को चौथे चरण के लिए वोट डाले जाएंगे. (सांकेतिक फोटो)

UP Panchayat Chunav: ग्राम पंचायतों (Gram Panchayats) के वार्डों की संख्या 732563 है, जबकि क्षेत्र पंचायतों की संख्या 826 है. ऐसे में सरकार के सामने निष्‍पक्ष चुनाव कराना एक चुनौती है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग (Uttar Pradesh State Election Commission) ने पंचायत चुनाव (Panchayat Election) का ऐलान कर दिया है. इसके साथ ही यूपी में आचार संहिता लागू हो गई है. यूपी में चार चरणों में पंचायत के चुनाव होंगे. इसके लिए प्रदेश भर में 80762 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे. वहीं, मतदान स्थल की संख्या 203050 होगी. इसी तरह ग्राम पंचायतों के वार्डों की संख्या 732563 है, जबकि क्षेत्र पंचायतों की संख्या 826 है. खास बात यह है कि इस बार उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में मतदान करने वाले मतदाताओं की संख्या 12.39 करोड़ है. इनमें से पुरुष मतदाताओं की संख्‍या 53.01 फीसदी हैं, जबकि 46.99 प्रतिशत महिला वोटर्स हैं.

जानकारी के मुताबिक, जनपद सीतापुर की 3 ग्राम पंचायतों, 1 ग्राम बहराइच और गोंडा की 9 ग्राम पंचायत में कार्यकाल पूरा न होने के कारण निर्वाचन प्रक्रिया पूरी नहीं होगी. यूपी पंचायत चुनाव में 732563 ग्राम पंचायत वार्ड हैं. बता दें कि 3 अप्रैल से पहले चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी. वहीं, दूसरे चरण में 7 अप्रैल से 8 अप्रैल तक नामांकन किया जा सकेगा. इसी तरह तीसरे चरण में 13 अप्रैल से 15 अप्रैल तक नामांकन होगा और चौथे चरण में 17 अप्रैल से 18 अप्रैल तक नामांकन होगा. वहीं, 2 मई को मतगणना होगी. 

2 मई को पंचायत चुनाव का परिणाम

तारीखों के ऐलान के साथ ही गांव की सरकार के लिए दावेदारों के बीच राजनीति तेज हो गई है. सभी उम्‍मीदवार प्रचार के लिए अपने-अपने क्षेत्र में कूद गए हैं. दरअसल, पहले चरण के तहत 15 अप्रैल को वोटिंग होगी. इसके बाद 19 को दूसरे, 26 को तीसरे और 29 अप्रैल को चौथे चरण के लिए वोट डाले जाएंगे. वहीं, 2 मई को पंचायत चुनाव का परिणाम आएगा.
अदालती प्रक्रिया

वहीं, आज ही सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पंचायत चुनाव को लेकर कोर्ट में सुनवाई भी होगी. ऐसे में जानकारों का कहना है कि आयोग की ओर से पंचायत चुनाव का ऐलान होने के साथ ही अब सरकार का सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क होगा कि उसने हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के आधार पर पहले आरक्षण सूची (Reservation List) जारी की और उसके बाद चुनाव का ऐलान कर दिया.
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