UP Panchayat Chunav: आरक्षण पर HC के फैसले से सरकार को झटका, कहीं खुशी-कहीं गम, बढ़ते खर्च से दावेदार चिंतित

यूपी पंचायत चुनाव में आरक्षण में बदलाव से कहीं ख़ुशी कहीं गम (File)

High Court Decision: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि 26 साल पुराने आधार पर की गई आरक्षण की व्यवस्था नहीं चलेगी. 2015 को बेस मानकर आरक्षण लागू करो और 25 मई तक चुनाव कराओ. नए फैसले के बाद पंचायत चुनाव में खर्च बढ़ने से प्रत्याशियों की चिंता भी बढ़ गई है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में होने जा रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (UP Panchayat Chunav 2021) में आरक्षण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के लखनऊ बेंच की फैसले से योगी सरकार को एक बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने योगी सरकार द्वारा पंचायत चुनाव में वर्ष 1995 को बेस मानकर लागू की गई आरक्षण व्यवस्था को खारिज कर दिया और 2015 को बेस मानकर आरक्षण लागू करके आगामी 25 मई तक पंचायत चुनाव कराने के निर्देश जारी कर दिये. हाईकोर्ट के इस फैसले से कहीं खुशी-कहीं गम का नजारा देखने को मिल रहा है. क्योंकि एक ओर जहां योगी सरकार के साथ पंचायत प्रत्याशियों की मुसीबतें बढ़ गई हैं, जो बीते एक साल से प्रचार कर रहे हैं और चुनाव जीतने के लिए भारी खर्च कर रहे हैं. वहीं हाईकोर्ट के इस फैसेले से कुछ दावेदारों के चुनाव लड़ने की उम्मीदें भी एक बार फिर से बढ़ गई हैं.

दरअसल, हाईकोर्ट के इस फैसले के तहत यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले पंचायत चुनाव (Panchayat Election) कराने की तैयारी में जुटी न सिर्फ योगी सरकार को एक बार फिर निर्धारित समय सीमा के भीतर नये सिरे से आरक्षण सूची(Reservation List) जारी करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी, बल्कि इस दौरान बीडीसी, प्रधान, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत सदस्य जैसे पंचायत के विभिन्न पदो पर चुनाव लड़ने की तैयारियों में जुटे दावेदारों की भी मुसीबतें बढ़ जायेगी. क्योकि बीते करीब एक वर्ष से वोटरों को लुभाने के लिये दावेदार खर्च कर रहे हैं. अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर पंचायत चुनाव में खर्च बढ़ने की संभावना के चलते प्रत्याशी भी खासा परेशान नजर आ रहे है.



चुनाव में देरी से बढ़ रहा है खर्चा
सीतापुर जिले के सहोली ग्रामसभा के प्रधान शिव बहादुर सिंह बताते हैं कि ‘चुनाव के चलते बीते डेढ़ वर्ष से लगातार रोजाना 20 से 25 लोगो के खाने-पीने की हम व्यवस्था कर रहे थे. साथ ही इस दौरान खुद से संपर्क करने वाले ग्राम सभा के हर व्यक्ति की तन, मन, धन से मदद कर रहे थे. लेकिन पहले वर्ष 1995 को बेस मानकर किये गये आरक्षण के चलते हमारी सीट OBC के लिये आरक्षित कर दी गई थी. जिसके चलते एक बड़ा झटका तो जरूर लगा था, लेकिन खर्च में कुछ कमी आ गई थी. लेकिन हाईकोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर से आरक्षण बदलने के साथ हमारी भी सीट बदल जाने की संभावना है. जिसके चलते एक बार फिर से उसी जोश और उत्साह के साथ लोगों के फोन आने और मिलने का सिलसिला शुरू हो गया है. एक बार फिर उनके खाने-पीने की अपने स्तर से हर संभव व्यवस्था की जा रही है.’