UP में पंचायत चुनाव: जानिए पिछले 6 महीने में क्या-क्या हुआ, सरकार ने क्या उठाए कदम?

जानिए दूसरे चरण में किन-किन जिलों में होगी वोटिंग

जानिए दूसरे चरण में किन-किन जिलों में होगी वोटिंग

UP में पंचायत चुनाव: उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ी तैयारियां कर रखी हैं. कोविड के चलते चुनाव पर पहले असमंजस था, लेकिन उसके बाद आखिरकार चुनाव की तिथि घोषित कर दी गई है.

  • Last Updated: March 26, 2021, 11:31 AM IST
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लखनऊ. उत्‍तर प्रदेश में त्रिस्‍तरीय पंचायत चुनाव के लिए तिथियों का ऐलान हो गया है. वैसे तो यह चुनाव पिछले साल दिसंबर के महीने में ही खत्म हो जाने चाहिए थे, लेकिन कोविड-19 महामारी के चलते चुनाव में काफी विलंब हुआ है. पंचायत के प्रतिनिधियों का कार्यकाल पिछले साल दिसंबर में जब खत्म हो गया था, तब राज्य सरकार ने 6 महीने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों के पदों पर सरकारी अफसरों को प्रशासक नियुक्त किया था. इसके बाद से ही जल्द चुनाव कराए जाने की संभावनाएं जताई जाने लगी थी.

फरवरी के महीने में सरकार ने तेजी दिखाई और पंचायत चुनाव से जुड़ा एक बड़ा कदम उठाया. 11 फरवरी को शासनादेश जारी करके सरकार ने पंचायत प्रतिनिधियों के पदों पर आरक्षण की व्यवस्था को जारी किया. आरक्षण के लिए साल 1995 को आधार वर्ष बनाया गया और रोटेशन के आधार पर आरक्षण का प्रावधान किया गया.

आरक्षण की व्यवस्था को हाई कोर्ट में दी गई चुनौती

आरक्षण की अंतिम सूची 17 मार्च को जारी होने वाली थी, लेकिन इससे पहले ही आरक्षण की इस व्यवस्था को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गई. लखीमपुर खीरी के अजय कुमार ने लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल करके सरकार द्वारा 1995 को आधार वर्ष मानकर आरक्षण किए जाने को अवैध बताया. साथ ही हाई कोर्ट से मांग की कि सरकार को आदेश दिए जाएं कि 1995 को नहीं, बल्कि 2015 को आधार वर्ष मानकर आरक्षण किया जाए. याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव के लिए जारी किए गए शासन आदेश को रद्द कर दिया और सरकार को आदेश दिया कि 2015 को आधार वर्ष मान कर नए सिरे से आरक्षण की व्यवस्था की जाए. सरकार ने इसे तत्काल मान लिया और नए सिरे से पदों पर आरक्षण के लिए शासनादेश जारी किया गया.
हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

शासनादेश के मुताबिक 26 मार्च को आरक्षण की अंतिम सूची जिलों में जारी होनी है. जल्द से जल्द चुनाव कराने की चुनौती के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने आरक्षण सूची जारी होने के साथ ही चुनाव का ऐलान कर दिया है. हालांकि, इस बीच में हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दे दी गई है. सीतापुर के दिलीप कुमार ने 2015 को आधार वर्ष मानकर आरक्षण किए जाने के हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. मुख्य न्यायाधीश की बेंच इस याचिका पर आज 26 मार्च को ही सुनवाई करेगी.

हाई कोर्ट ने सरकार को ये दिया आदेश



बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि 25 मई से पहले पंचायत चुनाव प्रदेश में खत्म कर लिए जाएं. पंचायत चुनाव में कुल 6 पदों के लिए चुनाव होते हैं. इसमें ग्राम प्रधान, पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य इन 4 पदों पर आम जनता वोट करती है, जबकि ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए जनता द्वारा चुनकर आए क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य वोट करते हैं.
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