UP Panchayat Chunav: पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण लिस्ट जारी, मायूस दावेदार बना रहे प्लान

यूपी के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आरक्षण सूची जारी.

यूपी के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आरक्षण सूची जारी.

UP Panchayat Election-2021: 75 जिलों के लिए जारी हो चुकी पंचायत चुनाव की आरक्षण लिस्ट को लेकर 8 मार्च तक दावेदारों से आपत्तियां दर्ज कराने को कहा गया है. 12 मार्च तक इनके निस्तारण के बाद 15 मार्च तक आरक्षण की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (UP Gram Panchayat Chunav- 2021) को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में चल रही हैं . सभी जिलों के ग्राम पंचायतों, वार्डों और ब्लॉक प्रमुख पद की स्थिति अब स्पष्ट हो चुकी है. इस बार परिस्थितियां एकदम विपरीत हैं. कई दावेदार इस बार ऐसे हैं, जो चुनाव लड़ना चाहते थें और प्रचार में काफी पैसा भी खर्च चुके थे, सीटों के आरक्षण की तस्वीर सामने आने के बाद निराशा उनके हाथ लगी है. हालांकि, यह अंतिम सूची नहीं है. बुधवार से 75 जिलों के लिए जारी हो चुकी आरक्षण लिस्ट के लिए 8 मार्च तक दावेदार आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं. 12 मार्च तक आपत्तियों के निस्तारण के बाद 15 मार्च तक आरक्षण की फाइनल लिस्ट प्रकाशित कर दी जाएगी.

अभी जो आरक्षण लिस्ट आई है, उसमें ऐसी कई ग्राम पंचायतें हैं, जहां समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं. ऐसे में चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि वे आरक्षण लिस्ट घोषित होने से पहले ही प्रचार में काफी कुछ खर्च कर चुकें हैं. जब सीट किसी अन्य कैटेगरी में आरक्षित हो चुकी है तो वे अपने कैंडिडेट यानी अपने समर्थक को चुनाव में उतारने की तैयारी में है, ताकि वे गांव की सत्ता वे अपने हाथ में रख सकें. प्रयागराज, लखनऊ, सैफई, इटावा, मैनपुरी, वाराणसी, गोरखपुर समेत कई ऐसे जिले हैं, जहां दावेदार अपने समर्थित उम्मीदवार को मैदान में उतारने की तैयारी है.

फाइनल लिस्ट में बदलाव की सम्भावना कम

दरअसल, राज्य निर्वाचन आयोग को 15 मार्च तक आरक्षण की फाइनल लिस्ट मिल जाएगी. ऐसे में 25-26 मार्च तक पंचायत चुनाव अधिसूचना भी जारी हो जाएगी. उम्मीद है कि 10 अप्रैल के बाद चार चरणों में मतदान होगा. लेकिन, जिला पंचायत निर्वाचन अधिकारी की तरफ से जो लिस्ट जारी की गई है. उसमें बदलाव की संभावना बहुत कम हैं, क्योंकि कई ऐसी सीटें थीं जहां पर कई दशकों से आरक्षण की व्यवस्था नहीं लागू हुई थी. लिहाजा इस बार रोटेशन प्रणाली के तहत कई ग्राम पंचायतों की स्थिति बदल गई है, ऐसे में दावेदार अब रबर स्टाम्प कैंडिडेट को मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं. मसलन अगर कोई सीट एससी, एसटी, ओबीसी या महिला के लिए आरक्षित है तो दावेदार अपने करीबियों को मैदान में उतारने जा रहे हैं, ताकि सत्ता की चाभी उनके पास रहे. हालांकि, अभी यह बोलना जल्दबाजी होगा कि उनका यह प्लान कितना सफल होता है.
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