डेढ़ करोड़ बच्चों को अब तक स्वेटर नहीं, जूते-मोजे को तरस रहे कई स्कूल

दिसंबर का एक हफ्ता बीतने के बाद भी प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले स्वेटर का कुछ पता नहीं है. इतना ही नहीं कई स्कूलों में तो अभी तक बच्चों को जूते-मोजे तक नहीं मिले.

ETV UP/Uttarakhand
Updated: December 7, 2017, 2:37 PM IST
डेढ़ करोड़ बच्चों को अब तक स्वेटर नहीं, जूते-मोजे को तरस रहे कई स्कूल
स्वेटर के इंतजार में हैं बच्चे
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Updated: December 7, 2017, 2:37 PM IST
योजना भी है और बजट भी लेकिन क्या फायदा अगर उसका लाभ बच्चों तक न पहुंचे. दिसंबर का एक हफ्ता बीतने के बाद भी प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले स्वेटर का कुछ पता नहीं है. इतना ही नहीं कई स्कूलों में तो अभी तक बच्चों को जूते-मोजे तक नहीं मिले.

विभाग की सुस्त चाल की वजह से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब डेढ़ करोड़ बच्चे सर्दी में कंपकपाने को मजबूर हैं. इस साल से प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को जूते-मोजे और स्वेटर देने की योजना शुरू हुई.

सर्दी तो आ गई लेकिन अभी तक विभाग यह भी तय नहीं कर पाया है कि स्वेटर बांटने की जिम्मेदारी कौन सी फर्म को दी जाएगी. अभी के हालात देखकर तो ऐसा लगता है कि बच्चों को जनवरी में भी स्वेटर बंट जाएं तो बड़ी बात होगी.

हर साल की तरह इस बार भी इन स्कूलों में बच्चों ने खुद ही स्वेटर का इंतजाम करना शुरू किया है. हालांकि इसमें बहुत से बच्चे ऐसे भी हैं जो इतनी ठंड में भी बिना स्वेटर के ही स्कूल आने को मजबूर है. इन बच्चों के अभिभावकों का तो साफ कहना है कि अगर सर्दी बीतने के बाद स्वेटर बांटे जाते हैं तो उसका क्या फायदा?

वहीं जूते-मोजे बांटने की शुरुआत करीब दो महीना पहले हुई, लेकिन अब भी बहुत से बच्चे इसके इंतजार में हैं. राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश में कई जगह बच्चों को अभी तक जूते-मोजे नहीं मिले हैं.

मामले में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह कहते हैं कि भारत सरकार के जो मानक हैं, उन्हें पूरा किया जा रहा है. इसमें थोड़ी देर जरूर हो गई है. लेकिन अब टेंडर हो गया है हम दिसंबर माह में ही बच्चों को स्वेटर उपलब्ध करा देंगे.

(रिपोर्ट: शैलेश अरोड़ा)
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